Britain: पत्नी अक्षता के शेयर के कारण PM सुनक की बढ़ रहीं मुश्किलें, FTA मामले में किए जा सकते हैं सवाल
कहा जा रहा है कि विपक्षी लेबर पार्टी और व्यापार विशेषज्ञ सौदे पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे अक्षता के पिता नारायण मूर्ति की बेंगलुरु स्थित अंतरराष्ट्रीय आईटी सेवाओं और परामर्श कंपनी इंफोसिस को फायदा होगा।
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सुनक को भारत के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में पत्नी अक्षता मूर्ति के अनुमानित 500 करोड़ पाउंड के इंफोसिस शेयरों से संबंधित कुछ सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
ऑब्जर्वर' का दावा है कि विपक्षी लेबर पार्टी और व्यापार विशेषज्ञ सौदे पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इस सौदे से अक्षता के पिता नारायण मूर्ति की बेंगलुरु स्थित अंतरराष्ट्रीय आईटी सेवाओं और परामर्श कंपनी इंफोसिस को फायदा होगा।
बता दें, भारत और ब्रिटेन लगातार मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। यह अब 12वें दौर की वार्ता में है। वहीं, सुनक अगले महीने जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।
सांसद डेरेन जोन्स ने कहा कि प्रधानमंत्री को अब समझ आ गया होगा कि कोई भी घोषणा सोच-समझ कर करें। किसी एक के हित में होकर कोई फैसला न ले। जोन्स ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि वह भारत व्यापार समझौते के संबंध में सोच-समझ कर फैसला लेंगे। बता दें, जोन्स क्रॉस-पार्टी हाउस ऑफ कॉमन्स बिजनेस एंड ट्रेड सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष भी है। यह कमेटी एफटीए वार्ता की जांच कर रहा है।
यह है मामला
हाल ही में एक जांच रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ‘भ्रम वश’ और ‘अनजाने’ में पत्नी अक्षता मूर्ति के संबंधित व्यावसायिक हितों को सार्वजनिक करने में असफल रहे हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश संसदीय निगरानी संस्था से माफी मांगी थी।
सरकार ने बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थाओं को वित्तीय सहायता देने के सरकार के फैसले के बाद प्रधानमंत्री सुनक यह घोषित करने में असफल रहे थे कि सरकार द्वारा वित्तीय सहायता देने के लिए चुनी गई ऐसी संस्थाओं में से एक की शेयरधारक उनकी पत्नी भी हैं। इस संबंध में सुनक पर आरोप लगने के बाद मानक मामलों के संसदीय आयुक्त डैनियल ग्रीनबर्ग ने प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच शुरू की थी।
43 वर्षीय सुनक ने संसदीय निगरानी संस्था को बताया था कि उन्होंने ‘मिनिस्टीरियल रजिस्टर’ में इसकी घोषणा की थी, जिसके बाद ग्रीनबर्ग ने निष्कर्ष निकाला कि हितों की घोषणा के संबंध में सुनक भ्रम की स्थिति में थे।
बुधवार को जारी अपनी जांच रिपोर्ट में ग्रीनबर्ग ने कहा था कि मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि घोषणा करने में यह असफलता भ्रम के कारण हुई है और सुनक ने अनजाने में ऐसा किया। हालांकि, संस्था के स्थाई आदेश के अनुरूप सुनक ने नियमों के उल्लंघन को स्वीकार किया और इसके लिए माफी मांगी।
उन्होंने आयुक्त को लिखे पत्र में कहा था कि मैं अनजाने में हुई इन गलतियों के लिए माफी मांगता हूं और आपके सुधारात्मक उपायों को स्वीकार करता हूं।