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ब्रिटेन की संसदीय समिति की रिपोर्ट: 'देश की सुरक्षा के लिए चीन खतरा, इससे निपटने के लिए सरकार के कदम नाकाफी'
Fri, 14 Jul 2023 10:35 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 14 Jul 2023 10:35 AM IST
सार
ब्रिटेन की मीडिया में संसद की खुफिया और सुरक्षा कमेटी की इस रिपोर्ट पर बहस जारी है। इस रिपोर्ट में ब्रिटिश सरकार पर मुद्दों को पहचान पाने में नाकाम रहने का आरोप लगा है। इसके अलावा कहा गया है कि चीन ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर में सेंध लगा ली है।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
ब्रिटेन की संसदीय समिति ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चीन बड़ा खतरा है। इसके मुताबिक, चीन अब तक ब्रिटेन को आक्रामकता से निशाना बनाने में सफल रहा है, क्योंकि सरकार की तरफ से इस खतरे से निपटने के लिए कोई बेहतर नीति नहीं बनाई गई है।
ब्रिटेन की मीडिया में संसद की खुफिया और सुरक्षा कमेटी की इस रिपोर्ट पर बहस जारी है। इस रिपोर्ट में ब्रिटिश सरकार पर मुद्दों को पहचान पाने में नाकाम रहने का आरोप लगा है। इसके अलावा कहा गया है कि चीन ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर में सेंध लगा ली है।
गौरतलब है कि इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा था कि उनकी सरकार चीनी तकनीक पर ब्रिटेन की निर्भरता कम रखने के लिए अहम कदम उठा रही है। हालांकि, उन्होंने चीन के साथ खुले रिश्ते रखने की इच्छा जताई थी। सुनक की कंजर्वेटिव सरकार की आलोचना करते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के आकार, उसकी क्षमता और उसके जुनून की वजह से वह ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर में सेंध लगाने में कामयाब हुआ है। इसमें कहा गया कि सरकार की तरफ से चीन के इस खतरे को रोकने के लिए उठाए गए कदम नाकाफी हैं।
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खुफिया एजेंसियों की निगाह से चूकीं चीन की हरकतें
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में चीन का जुड़ाव, उसका प्रभाव और दखल को पकड़ पाना काफी मुश्किल है। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने इससे पहले ऐसी चीजों पर गौर भी नहीं किया। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियां चीन की गुप्त गतिविधियों पर नजर रखती हैं, यानी वे सीधे-सीधे चीन की ओर से उठाए गए कदमों को पहचानने की जिम्मेदारी भी उठा नहीं पाए।
चीन के संवेदनशील निवेशों को परखना भी नहीं चाहती सरकार
इसमें चीन के ब्रिटेन में किए गए निवेश को लेकर भी कई अहम तथ्य रखे गए हैं। कहा गया है कि अब तक चीन के निवेश की कोई जांच नहीं हुई है। इतना ही नहीं कमेटी ने पाया कि सरकार चीन के साथ अहम क्षेत्रों में हुए संवेदनशील निवेश समझौतों को दोबारा परखना भी नहीं चाहती। इसमें कहा गया है कि कुछ अकादमिक संस्थान भी चीन की इन हरकतों को नजरअंदाज कर रहे हैं और उनके पैसे लेकर ही खुश हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हम उस मार्ग पर हैं, जहां चीन हमारे ब्लूप्रिंट चुरा सकता है, खुद के नए मानक (स्टैंडर्ड) तय कर सकता है और खुद उत्पादन कर सकता है, जिससे हर स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव पैदा किया जा सके।
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ब्रिटेन की मीडिया में संसद की खुफिया और सुरक्षा कमेटी की इस रिपोर्ट पर बहस जारी है। इस रिपोर्ट में ब्रिटिश सरकार पर मुद्दों को पहचान पाने में नाकाम रहने का आरोप लगा है। इसके अलावा कहा गया है कि चीन ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर में सेंध लगा ली है।
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गौरतलब है कि इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा था कि उनकी सरकार चीनी तकनीक पर ब्रिटेन की निर्भरता कम रखने के लिए अहम कदम उठा रही है। हालांकि, उन्होंने चीन के साथ खुले रिश्ते रखने की इच्छा जताई थी। सुनक की कंजर्वेटिव सरकार की आलोचना करते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के आकार, उसकी क्षमता और उसके जुनून की वजह से वह ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर में सेंध लगाने में कामयाब हुआ है। इसमें कहा गया कि सरकार की तरफ से चीन के इस खतरे को रोकने के लिए उठाए गए कदम नाकाफी हैं।
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खुफिया एजेंसियों की निगाह से चूकीं चीन की हरकतें
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में चीन का जुड़ाव, उसका प्रभाव और दखल को पकड़ पाना काफी मुश्किल है। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने इससे पहले ऐसी चीजों पर गौर भी नहीं किया। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियां चीन की गुप्त गतिविधियों पर नजर रखती हैं, यानी वे सीधे-सीधे चीन की ओर से उठाए गए कदमों को पहचानने की जिम्मेदारी भी उठा नहीं पाए।
चीन के संवेदनशील निवेशों को परखना भी नहीं चाहती सरकार
इसमें चीन के ब्रिटेन में किए गए निवेश को लेकर भी कई अहम तथ्य रखे गए हैं। कहा गया है कि अब तक चीन के निवेश की कोई जांच नहीं हुई है। इतना ही नहीं कमेटी ने पाया कि सरकार चीन के साथ अहम क्षेत्रों में हुए संवेदनशील निवेश समझौतों को दोबारा परखना भी नहीं चाहती। इसमें कहा गया है कि कुछ अकादमिक संस्थान भी चीन की इन हरकतों को नजरअंदाज कर रहे हैं और उनके पैसे लेकर ही खुश हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हम उस मार्ग पर हैं, जहां चीन हमारे ब्लूप्रिंट चुरा सकता है, खुद के नए मानक (स्टैंडर्ड) तय कर सकता है और खुद उत्पादन कर सकता है, जिससे हर स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव पैदा किया जा सके।