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Yvette Cooper: भारत दौरे पर आएंगी ब्रिटिश विदेश मंत्री, वैश्विक चुनौतियों के बीच रणनीतिक सहयोग पर होगी चर्चा
Sun, 31 May 2026 04:27 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 31 May 2026 04:27 PM IST
सार
Yvette Cooper: ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर चीन के बाद भारत दौरे पर आएंगी, जहां वह अपने समकक्ष एस जयशंकर समेत व्यापार, शिक्षा और सरकारी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी। इस यात्रा में वैश्विक सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य और भारत-ब्रिटेन सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। वहीं, दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को आगे बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। पढ़िए रिपोर्ट-
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यवेटे कूपर, ब्रिटेन की विदेश मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स//यवेटे कपूर
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विस्तार
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर सोमवार को चीन का दौरा करेंगी। इसके बाद वह भारत आएंगी। उनका यह दो देशों का दौरा वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित होगा।
एफसीडीओ ने कूपर के दौरे पर क्या कहा?
ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) ने कहा, चीन और भारत जैसे दो प्रमुख देशों के साथ होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठकों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, यूक्रेन पर रूस के हमले और अफ्रीका में इबोला प्रकोप जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। कूपर गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके बाद वह व्यापार और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के साथ भी बातचीत करेंगी। एफसीडीओ ने कहा, विदेश मंत्री कूपर भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से मुलाकात करेंगी। वह उद्यमियों, शिक्षाविदों और सरकारी साझेदारों से भी मिलेंगी, जो 'ब्रिटेन-भारत दृष्टिकोण 2035' को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।
भारत दौरा क्यों अहम माना जा रहा है?
कूपर दिल्ली दौरा ऐसे समय में कर रही हैं, जब करीब एक साल पहले भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया गया था। यह समझौता पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व में संपन्न हुआ था। उस समय दोनों नेताओं ने 'ब्रिटेन-भारत दृष्टिकोण 2035' को भी मंजूरी दी थी।इसे एक महत्वाकांक्षी और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया समझौता बताया गया था। यह समझौता तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों की पारस्परिक विकास, समृद्धि और एक सुरक्षित व स्थिर दुनिया के निर्माण के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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ये भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को नई धमकी: 'अमेरिका बहुत अच्छे समझौते के करीब, नहीं बनी बात तो अपनाएंगे दूसरा रास्ता'
भारत-ब्रिटेन व्यापार में कितनी वृद्धि हुई?
भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) को लेकर ब्रिटेन की संसद में अनुमोदन प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से प्रस्तावित नए इस्पात आयात प्रतिबंधों के कारण एफटीए को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस सप्ताह जारी 'इंडिया मीट्स ब्रिटेन ट्रैकर-2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 47.4 अरब पाउंड पहुंच गया। यह उससे पिछले वर्ष की तुलना में 11.7 फीसदी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले हफ्तों में सीईटीए लागू होने के बाद व्यापार में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
चीन में कूपर किन नेताओं से मिलेंगी?
बीजिंग में कूपर चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग और विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत करेंगी। इसके बाद वह बुधवार को शेनझेन जाएंगी, जहां उनका कार्यक्रम विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित रहेगा। इसके बाद वह भारत के लिए रवाना होंगी। दक्षिण एशिया की उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया और यूरोप में जारी संघर्षों के कारण दुनिया में काफी अस्थिरता बनी हुई है। इसका असर दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाओं पर पड़ रहा है।
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एफसीडीओ ने कूपर के दौरे पर क्या कहा?
ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) ने कहा, चीन और भारत जैसे दो प्रमुख देशों के साथ होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठकों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, यूक्रेन पर रूस के हमले और अफ्रीका में इबोला प्रकोप जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। कूपर गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके बाद वह व्यापार और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के साथ भी बातचीत करेंगी। एफसीडीओ ने कहा, विदेश मंत्री कूपर भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से मुलाकात करेंगी। वह उद्यमियों, शिक्षाविदों और सरकारी साझेदारों से भी मिलेंगी, जो 'ब्रिटेन-भारत दृष्टिकोण 2035' को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।
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भारत दौरा क्यों अहम माना जा रहा है?
कूपर दिल्ली दौरा ऐसे समय में कर रही हैं, जब करीब एक साल पहले भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया गया था। यह समझौता पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व में संपन्न हुआ था। उस समय दोनों नेताओं ने 'ब्रिटेन-भारत दृष्टिकोण 2035' को भी मंजूरी दी थी।इसे एक महत्वाकांक्षी और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया समझौता बताया गया था। यह समझौता तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों की पारस्परिक विकास, समृद्धि और एक सुरक्षित व स्थिर दुनिया के निर्माण के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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भारत-ब्रिटेन व्यापार में कितनी वृद्धि हुई?
भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) को लेकर ब्रिटेन की संसद में अनुमोदन प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से प्रस्तावित नए इस्पात आयात प्रतिबंधों के कारण एफटीए को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस सप्ताह जारी 'इंडिया मीट्स ब्रिटेन ट्रैकर-2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 47.4 अरब पाउंड पहुंच गया। यह उससे पिछले वर्ष की तुलना में 11.7 फीसदी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले हफ्तों में सीईटीए लागू होने के बाद व्यापार में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
चीन में कूपर किन नेताओं से मिलेंगी?
बीजिंग में कूपर चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग और विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत करेंगी। इसके बाद वह बुधवार को शेनझेन जाएंगी, जहां उनका कार्यक्रम विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित रहेगा। इसके बाद वह भारत के लिए रवाना होंगी। दक्षिण एशिया की उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया और यूरोप में जारी संघर्षों के कारण दुनिया में काफी अस्थिरता बनी हुई है। इसका असर दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाओं पर पड़ रहा है।