यूएई ने अंतरिक्ष में अपना पहला यात्री भेजा, पीएम मोदी ने कहा- 2022 के लिए हमें प्रेरणा मिलेगी
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दो साल पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारी करने वाले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए अपना पहला एस्ट्रोनॉट भेजा है। बताया जा रहा है कि पहली बार किसी इस्लामिक देश से कोई एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष पहुंचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर यूएई को बधाई दी है।
यूएई ने पूर्व वायुसेना पायलट हज्जा-अल-मंसूरी रूसी अंतरिक्ष यान सोयूज एमएस-15 से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन गए हैं। हज्जा-अल-मंसूरी के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर और रूसी कॉस्मोनॉट ओलेग स्क्रिपोचका भी गए हैं। ओलेग स्क्रिपोचका तीसरी बार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गए हैं, जबकि बाकी दोनों यात्रियों का यह पहला अनुभव होगा।
हज्जा बोले- देश के सपनों को नए आयाम पर ले जा रहा
यूएई में लोग 35 वर्षीय हज्जा अल-मंसूरी को देश का हीरो बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि हज्जा अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन पर आठ दिन तक रहेंगे। आईएसएस जाने से पहले हज्जा ने कहा कि मैं अपने देश के सपनों और महत्वाकांक्षाओं को नए आयाम पर ले जा रहा हूं। अल्लाह मुझे इस मिशन में सफलता दे।
पीएम मोदी हज्जा को 'भाई' कह कर दी बधाई
यूएई के हज्जा अल-मंसूरी को अंतरिक्ष जाने पर बधाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को 2022 के अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए इससे प्रेरणा मिली है। उन्होंने ट्वीट किया कि हमारे भाई हज्जा की सफल शुरुआत के बारे में जानकर बहुत खुशी हुई जो निश्चित रूप से अंतरिक्ष में एक शानदार यात्रा होगी। मैं शेख मोहम्मद बिन जायेद की भी प्रशंसा करता हूं, बधाई हो यूएई।
Very happy to learn of the successful start to what will surely be a fabulous journey into outer space by our brother Hazza. I laud the vision of Sheikh @MohamedBinZayed! Congratulations UAE! https://t.co/dS3CRXrKkj
— Narendra Modi (@narendramodi) September 25, 2019
क्राउन प्रिंस बोले- एक नए युग की शुरुआत है
क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह मिशन एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। देश उन्नत वैज्ञानिक विकास के एक नए चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है।
प्रिंस ने कहा कि यह उपलब्धि अरब के विज्ञान के ऐतिहासिक योगदान की याद दिलाती है, जो आज भी दुनिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों में पढ़ाया जा रहा है।