यूएई में बन रहा पहला हिंदू मंदिर, निर्माण में नहीं होगा किसी भी इस्पात का इस्तेमाल
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबूधाबी में पहले हिंदू मंदिर के निर्माण का कार्य पूरी तेजी से हो रहा है। वहीं, बताया गया है कि इस मंदिर के निर्माण में किसी भी प्रकार के इस्पात का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबूधाबी में पहले हिंदू मंदिर के निर्माण में लोहे या उससे बनी सामग्री का इस्तेमाल नहीं होगा। इसका निर्माण भारत की पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के तहत किया जाएगा। मंदिर समिति के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
मंदिर के शिलान्यास के दो साल बाद गुरुवार को इसकी नींव में फ्लाई ऐश कंकरीट भरने का काम पूरा हो गया। इस दौरान बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग मंदिर स्थल पर मौजूद रहे।
मंदिर समिति के प्रवक्ता अशोक कोटेचा ने 'गल्फ न्यूज' से कहा, 'आमतौर पर, (भवन) की बुनियाद में कंक्रीट और लोहे का इस्तेमाल किया जाता है। भारत की पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के अनुसार, इस मंदिर के निर्माण में इस्पात या इससे बनी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।' उन्होंने कहा, 'नींव को मजबूती देने के लिये फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया जाएगा।'
फ्लाई ऐश का उपयोग नींव में कंक्रीट को सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा। फ्लाई ऐश का ज्यादातर उपयोग कंक्रीट में सुदृढीकरण के रूप में किया जाता है। कुछ मामलों में, फ्लाई ऐश कंक्रीट की ताकत को बढ़ा देता है और इसके टिकाउपन को दुरुस्त करता है। फ्लाई ऐश कंक्रीट की व्यावहारिकता में काफी सुधार कर सकता है।
पीएम मोदी ने 2018 में रखी थी आधारशिला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में संयुक्त अरब अमीरात में दुबई के ओपेरा हाउस से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम संस्था (बीएपीएस) मंदिर की आधारशिला रखी थी। यूएई में भारतीय मूल के 30 लाख से अधिक लोग रहते हैं।
मंदिर निर्माण के लिए 3,000 कारीगर भारत में काम कर रहे
मंदिर निर्माण के लिए भारत में 3,000 कारीगर दिन रात काम में लगे हुए हैं, जो 5000 टन इटालियन मार्बल से नक्काशीदार चिह्न और मूर्तियां बना रहे हैं। वहीं, मंदिर का बाहरी हिस्सा 12,250 टन गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी होगा।
यूएई के भारत के राजदूत पवन कपूर और दुबई में भारतीय महावाणिज्यदूत विपुल दुबई और अबू धाबी के भारतीय व्यापार समुदाय के कई प्रमुख सदस्यों और सामुदायिक विकास प्राधिकरण (सीडीए) के सदस्यों के साथ मौजूद थे।
लोगों को संबोधित करते हुए कपूर ने यूएई सरकार को धन्यवाद जताते हुए कहा कि पहली बार मंदिर स्थल का दौरा करना बहुत ही सौभाग्य और सम्मान की बात थी।
घर जैसा महसूस करना महत्वपूर्ण
सीडीए दुबई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमर अल मुथन्ना ने कहा कि विदेश में घर जैसा महसूस करने के लिए धर्म एक महत्वपूर्ण कारक है। यूएई एक गुजारा करने वाला घर नहीं है। हम चाहते हैं कि आप यहां पूरी तरह से घर जैसा महसूस करें और यह हमारी प्रतिबद्धता है।
समारोह बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर समूह के सबसे वरिष्ठ संत ब्रह्मविहारी दास द्वारा आयोजित किया गया था। उनके द्वारा परियोजना और यूएई के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं।