फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   UAE first Hindu Temple will not use steel and iron for construction

यूएई में बन रहा पहला हिंदू मंदिर, निर्माण में नहीं होगा किसी भी इस्पात का इस्तेमाल

Fri, 14 Feb 2020 06:42 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, दुबई
पीटीआई, दुबई Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 14 Feb 2020 06:42 PM IST
सार

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबूधाबी में पहले हिंदू मंदिर के निर्माण का कार्य पूरी तेजी से हो रहा है। वहीं, बताया गया है कि इस मंदिर के निर्माण में किसी भी प्रकार के इस्पात का प्रयोग नहीं किया जाएगा। 

विज्ञापन
UAE first Hindu Temple will not use steel and iron for construction
यूएई में बन रहे मंदिर की सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Twitter

विस्तार

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबूधाबी में पहले हिंदू मंदिर के निर्माण में लोहे या उससे बनी सामग्री का इस्तेमाल नहीं होगा। इसका निर्माण भारत की पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के तहत किया जाएगा। मंदिर समिति के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

विज्ञापन


मंदिर के शिलान्यास के दो साल बाद गुरुवार को इसकी नींव में फ्लाई ऐश कंकरीट भरने का काम पूरा हो गया। इस दौरान बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग मंदिर स्थल पर मौजूद रहे।
विज्ञापन


मंदिर समिति के प्रवक्ता अशोक कोटेचा ने 'गल्फ न्यूज' से कहा, 'आमतौर पर, (भवन) की बुनियाद में कंक्रीट और लोहे का इस्तेमाल किया जाता है। भारत की पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के अनुसार, इस मंदिर के निर्माण में इस्पात या इससे बनी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।' उन्होंने कहा, 'नींव को मजबूती देने के लिये फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया जाएगा।'
विज्ञापन
विज्ञापन


फ्लाई ऐश का उपयोग नींव में कंक्रीट को सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा। फ्लाई ऐश का ज्यादातर उपयोग कंक्रीट में सुदृढीकरण के रूप में किया जाता है। कुछ मामलों में, फ्लाई ऐश कंक्रीट की ताकत को बढ़ा देता है और इसके टिकाउपन को दुरुस्त करता है। फ्लाई ऐश कंक्रीट की व्यावहारिकता में काफी सुधार कर सकता है।

पीएम मोदी ने 2018 में रखी थी आधारशिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में संयुक्त अरब अमीरात में दुबई के ओपेरा हाउस से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम संस्था (बीएपीएस) मंदिर की आधारशिला रखी थी। यूएई में भारतीय मूल के 30 लाख से अधिक लोग रहते हैं।

मंदिर निर्माण के लिए 3,000 कारीगर भारत में काम कर रहे 

मंदिर निर्माण के लिए भारत में 3,000 कारीगर दिन रात काम में लगे हुए हैं, जो 5000 टन इटालियन मार्बल से नक्काशीदार चिह्न और मूर्तियां बना रहे हैं। वहीं, मंदिर का बाहरी हिस्सा 12,250 टन गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी होगा।

यूएई के भारत के राजदूत पवन कपूर और दुबई में भारतीय महावाणिज्यदूत विपुल दुबई और अबू धाबी के भारतीय व्यापार समुदाय के कई प्रमुख सदस्यों और सामुदायिक विकास प्राधिकरण (सीडीए) के सदस्यों के साथ मौजूद थे।

लोगों को संबोधित करते हुए कपूर ने यूएई सरकार को धन्यवाद जताते हुए कहा कि पहली बार मंदिर स्थल का दौरा करना बहुत ही सौभाग्य और सम्मान की बात थी।

घर जैसा महसूस करना महत्वपूर्ण

सीडीए दुबई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमर अल मुथन्ना ने कहा कि विदेश में घर जैसा महसूस करने के लिए धर्म एक महत्वपूर्ण कारक है। यूएई एक गुजारा करने वाला घर नहीं है। हम चाहते हैं कि आप यहां पूरी तरह से घर जैसा महसूस करें और यह हमारी प्रतिबद्धता है।



समारोह बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर समूह के सबसे वरिष्ठ संत ब्रह्मविहारी दास द्वारा आयोजित किया गया था। उनके द्वारा परियोजना और यूएई के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed