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फिर बढ़ा टैरिफ का खतरा: अमेरिका ने भारत समेत 16 व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ शुरू की जांच, क्या हैं आरोप?

Fri, 13 Mar 2026 04:24 AM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Fri, 13 Mar 2026 04:24 AM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत समेत 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ नई व्यापारिक जांच शुरू कर दी है। यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी उद्योग और व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं।

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Trump tariff threats increase America started investigation against 16 trade partner countries including India
अमेरिका के आरोप क्या? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वैश्विक व्यापार में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत समेत 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ नई जांच शुरू की है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही हैं और इससे अमेरिकी बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।
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यह जांच 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की जा रही है। यह वही कानून है जिसके तहत अमेरिका किसी देश की व्यापारिक नीतियों को अनुचित मानते हुए एकतरफा टैरिफ बढ़ा सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदेह हैं या नहीं।
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किन देशों के खिलाफ शुरू हुई जांच?
अमेरिका ने जिन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है उनमें भारत, चीन, बांग्लादेश, कंबोडिया, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ताइवान, मलयेशिया, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों की औद्योगिक नीतियों के कारण वैश्विक बाजार में अत्यधिक उत्पादन हो रहा है और इसका असर अमेरिकी उद्योगों पर पड़ रहा है।
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जांच का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण तो नहीं हैं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या इन नीतियों के कारण अमेरिकी व्यापार पर बोझ पड़ रहा है या उसका विस्तार सीमित हो रहा है। जांच में विनिर्माण क्षेत्र में अतिरिक्त उत्पादन और क्षमता से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।




टैरिफ बढ़ाने की तैयारी क्यों?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह अपने औद्योगिक आधार को कमजोर नहीं होने देगा। अधिकारियों के मुताबिक कई देशों में अतिरिक्त उत्पादन को अमेरिकी बाजार में निर्यात किया जा रहा है। इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। इसलिए ट्रंप प्रशासन नए टैरिफ लगाने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है ताकि घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिल सके।

इस जांच प्रक्रिया के तहत 17 मार्च से टिप्पणियां दर्ज की जाएंगी। 15 अप्रैल तक कंपनियों और आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद 5 मई के बाद सार्वजनिक सुनवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ समाप्त होने से पहले ही जांच के नतीजे और संभावित नए टैरिफ प्रस्ताव सामने आ सकते हैं।

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