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नासा के वार्षिक रोवर चैलेंज में लहराया भारत का परचम, तीन टीमों ने जीते पुरस्कार

Mon, 15 Apr 2019 06:14 PM IST
Gaurav Pandey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 15 Apr 2019 06:14 PM IST
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Three Indian Teams won awards in Annual rover challenge of NASA
प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने वार्षिक ह्यूमन एक्सप्लोरेशन रोवर चैलेंज में भारत की तीन टीमों को पुरस्कृत किया है। इस चैलेंज के तहत हाईस्कूल और कॉलेज के छात्रों को चांद और मंगल ग्रहों पर भविष्य के अभियान के लिए रोविंग यान निर्मित करने तथा उनका परीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

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नासा ने एक बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में केआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की टीम ने ‘एआईएए नील आर्मस्ट्रांग बेस्ट डिजाइन अवार्ड’ जीता। यह अवार्ड रोवर चैलेंज की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों के लिए दिया जाता है।
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वहीं, महाराष्ट्र में मुंबई के मुकेश पटेल स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग ने ‘फ्रैंक जो सेक्सटन मेमोरियल पिट क्रू अवार्ड’ जीता। इसके अलावा पंजाब के फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की टीम ने रॉकेट और अन्य अंतरिक्ष संबंधित विषयों पर दिए जाने वाले ‘स्टेम एंगेजमेंट अवार्ड’ जीता।
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इस प्रतियोगिता में करीब 100 टीमों ने भाग लिया था। इसमें अमेरिका, बांग्लादेश, बोलिविया, ब्राजील, डोमिनिक गणराज्य, मिस्र, इथियोपिया, जर्मनी, मैक्सिको, मोरक्को और पेरू समेत रिकॉर्ड संख्या में देशों ने भाग लिया।

भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र नीत टीम के क्यूबसैट को नासा करेगी प्रक्षेपित

नासा ने भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र की अगुवाई वाली एक टीम को चुना है। इस टीम के क्यूबसैट को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के भविष्य के मिशनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। बता दें कि क्यूबसैट अनुसंधान करने वाला एक लघु उपग्रह है जो ब्रह्मांडीय किरणों का पता लगा सकता है। 

केशव राघवन (21) की अगुवाई में येल अंडरग्रेजुएट एयरोस्पेस एसोसिएशन (वाईयूएए) के अनुसंधानकर्ताओं की टीम देश भर की उन 16 टीमों में शामिल है जिनके क्यूबसैट को 2020, 2021 और 2022 में अंतरिक्ष में भेजे जाने की योजना है। 

टीम के क्यूबसैट बलास्ट (बोशेट लो अर्थ अल्फा/ बीटा स्पेस टेलीस्कोप) का नाम भौतिकीविद् एडवर्ड ए बोशेट के नाम पर रखा गया है जो अमेरिका में पीएचडी प्राप्त करने वाले पहले अफ्रीकी अमेरिकी हैं। छात्रों ने चार साल में इस उपग्रह को तैयार किया और नासा के क्यूबसैट लॉन्च इनिशिएटिव प्रतियोगिता के जरिए प्रक्षेपण की अनुमति प्राप्त की। 

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