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यूनेस्को की स्टडी रिपोर्ट: खतरे में दुनिया के एक तिहाई ग्लेशियर, 2050 तक पूरी तरह पिघल जाएंगे
Fri, 04 Nov 2022 05:18 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 04 Nov 2022 05:18 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र के निकाय यूनेस्को ने अपनी स्टडी में पाया है कि विश्व धरोहर सूची में शामिल एक तिहाई ग्लेशियर खतरे में हैं। इसके बावजूद बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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ग्लेशियर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र के निकाय यूनेस्को ने अपनी स्टडी में पाया है कि विश्व धरोहर सूची (यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज) में शामिल एक तिहाई ग्लेशियर खतरे में हैं और 2050 ये ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल जांएगे। एजेंसी ने आग्रह किया है कि बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए प्रयास तेज किए जाने की आवश्यकता है।
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आईयूसीएएन के महानिदेश डॉ. ब्रूनो ओबेरल ने बताया कि जब ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं, तो लाखों लोगों को पानी की कमी के संकट का सामना करना पड़ता और बाढ़ जैसी प्राकृति आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है। लाखों लोग समुद्र का स्तर बढ़ने से विस्थापित हो सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि यह स्टडी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी और प्रकृति आधारित समाधानों में तत्काल निवेश की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है जो जलवायु परिवर्तन के संकट को कम करने में मदद कर सकता है।
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यूनेस्को विश्व धरोहर में पचास ग्लेशियर हैं, जो पृथ्वी के कुल ग्लेशियर क्षेत्र का करीब दस प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें सबसे ऊंचा ग्लेशियर माउंट एवरेस्ट के पास में, सबसे लंबा अलास्का में और अफ्रीका में अंतिम शेष ग्लेशियर शामिल हैं।
यूनेस्को ने यह स्टडी 'प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ' के साथ साझेदारी में की है। स्टडी में पता चलता है कि ये ग्लेशियर कार्बनडॉय ऑक्साइड (सीओ2) के उत्सर्जन के कारण तेजी से गर्म हो रहे हैं और साल 200 के बाद से तेजी से पिघल रहे हैं।
स्टडी के मुताबिक, साल 2000 के बाद से बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि पचास विश्व धरोहर स्थलों में से एक तिहाई ग्लेशियर 2050 तक गायब हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तापमान में वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं होती है, तो शेष दो तिहाई स्थलों में ग्लेशियर को बचाया जा सकता है।
स्टडी में बताया गया है कि 2050 तक जो ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल जाएंगे उनमें अफ्री का किलिमंजारो नेशनल पार्क और माउंट केन्या शामिल हैं। इसके अलावा यूरोप में पाइरेनीज और डोलोमाइट्स में कुछ ग्लेशियर तीन दशक बाद पूरी तरह से गायब हो जाएंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका में येलोस्टोन और योसेमाइट राष्ट्रीय उद्यानों में भी ग्लेशियरों का यही हाल हो सकता है।
2022 का संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप-27) इस साल मिस्र के शर्म-अल-शेख में 6 से 18 नवंबर 2022 तक आयोजित किया जाएगा।