{"_id":"618ed13581b2c964c669dd58","slug":"third-dossier-of-evidence-on-chinese-atrocities-on-uyghurs-submitted-to-icc","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीन: उइगरों पर चीनी अत्याचारों के साक्ष्यों का तीसरा डोजियर आईसीसी में पेश","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
चीन: उइगरों पर चीनी अत्याचारों के साक्ष्यों का तीसरा डोजियर आईसीसी में पेश
Sat, 13 Nov 2021 02:11 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, द हेग।
एजेंसी, द हेग।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 13 Nov 2021 02:11 AM IST
सार
डोजियर में एक उइगर शख्स इस बारे में बात करता है कि कैसे उसे ताजिकिस्तान में चीनी अधिकारियों के साथ काम करने के लिए मजबूर किया गया है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : ani
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ चीनी अधिकारियों द्वारा किए गए नरसंहार और मानवता विरोधी अपराधों की जांच के लिए साक्ष्यों का तीसरा डोजियर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) को सौंप दिया गया है। पूर्वी तुर्किस्तान में निर्वासित सरकार ने कहा है कि यह नया सबूत ताजिकिस्तान के भीतर चीनी भागीदारी की सीमा को भी उजागर करता है।
विज्ञापन
निर्वासित सरकार ने कहा है कि चीनी अधिकारी न सिर्फ उइगरों का पीछा कर रहे हैं बल्कि उन्हें निर्वासित करने, अपहरण करने और उन्हें गायब करने के मामलों में भी संलिप्त हैं। बयान में कहा गया कि ताजिक क्षेत्र से गायब होने की भयावहता तीसरे डोजियर में दिए गए साक्ष्यों में पुष्ट होती है।
विज्ञापन
इससे पता चलता है कि चीन किस तरह से गैरकानूनी कार्य, जिनमें नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं, उनमें लिप्त है। नए साक्ष्य को अंदरूनी गवाहों के साथ संकलित किया गया है।
विज्ञापन
इसमें बताया गया है कि कैसे उइगरों को लक्षित करने के लिए ताजिकिस्तान और मध्य एशियाई देशों में काम कर रहे चीनी अधिकारी तैनात किए गए हैं। डोजियर में एक उइगर शख्स इस बारे में बात करता है कि कैसे उसे ताजिकिस्तान में चीनी अधिकारियों के साथ काम करने के लिए मजबूर किया गया है।
तिब्बत में धर्म-संस्कृति दांव पर : डोल्मा त्सेरिंग
तिब्बत की निर्वासित संसद के उपाध्यक्ष डोल्मा त्सेरिंग ने कहा है कि चीनी शासन के तहत तिब्बत में बौद्ध धर्म पर आधारित संस्कृति और जीवन शैली क्षेत्र में दांव पर है। इससे पूर्व तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा ने बुधवार को चीनी नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा था कि वे विभिन्न संस्कृतियों की विविधता को नहीं समझते हैं।
डोल्मा ने कहा कि तिब्बत में संस्कृति ही दांव पर है। तिब्बत में तथाकथित स्वतंत्रता पर बोलते हुए डोल्म त्सेरिंग ने कहा, यदि तिब्बत में आजादी है तो चीन सरकार वहां पर विश्व मीडिया को जाने की इजाजत क्यों नहीं देती। यह बताता है कि चीन कुछ ऐसा है जिसे छुपा रहा है।