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बाइडन और शी का संबोधन: बातें शांति की, लेकिन संकेत टकराव बढ़ने के

Wed, 22 Sep 2021 04:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यू यॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यू यॉर्क Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 22 Sep 2021 04:58 PM IST
सार

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ रहा तनाव इस समय सारी दुनिया की चिंता का कारण बना हुआ है। बीते हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी थी कि बढ़ रहे टकराव से नए शीत युद्ध का खतरा है। गुतारेस ने अमेरिका और चीन से बातचीत, सहयोग, समानता और पारस्परिक सम्मान की भावना से अपने मतभेद दूर करने की अपील की थी....

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The speech of Joe Biden and Xi Jinping at the United Nations General Assembly shows there will be any reduction in the confrontation in the near future
जो बाइडन और शी जिनपिंग - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक ही दिन हुए भाषणों से ये साफ संकेत मिला कि विश्व समस्याओं को देखने का इन दोनों देशों का नजरिया एक-दूसरे के विपरीत है। यहां पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसे देखते हुए ये नहीं लगता कि निकट भविष्य में इन दोनों के टकराव में कोई कमी आएगी।

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बाइडन और शी दोनों ने कोरोना महामारी और जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में दुनिया की मदद करने का संकल्प जताया। लेकिन बाकी मसलों पर उनका रुख बिल्कुल अलग रहा। बतौर राष्ट्रपति महासभा को पहली बार संबोधित करते हुए बाइडन ने वैश्विक व्यापार और टेक्नोलॉजी नेटवर्क की जटिल होती स्थितियों को संभालने के लिए ‘नियम आधारित व्यवस्था’ पर जोर दिया। उन्होंने ‘आर्थिक जोर-जबर्दस्ती’ का मुकाबला करने की जरूरत बताई। बाइडन ने कहा- ‘तानाशाही सोच विश्व में लोकतंत्र के युग की समाप्ति का एलान करने का प्रयास कर सकती है। लेकिन सच यह है कि लोकतांत्रिक दुनिया हर जगह है। यह भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं और मानव अधिकारों के रक्षकों में निवास करती है।’
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जानकारों के मुताबिक ये तमाम बातें चीन को निशाने पर रखते हुए कही गईं। बाइडन के बाद शी की बारी आई। अपने पहले से रिकॉर्ड किए जा चुके भाषण में शी ने अमेरिकी नजरिए का बारीक लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा- ‘लोकतंत्र कोई ऐसा विशेष अधिकार नहीं है, जिसे किसी खास देश के लिए आरक्षित कर दिया गया हो। हाल की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं ने फिर दिखाया है कि बाहर से सैनिक हस्तक्षेप और तथाकथित लोकतांत्रिक रूपांतरण से नुकसान के अलावा और कुछ नहीं होता है।’

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शी ने समावेशी विकास को अपने भाषण का केंद्रीय पहलू बनाया। उन्होंने एक ‘वैश्विक विकास पहल’ शुरू करने का एलान किया, हालांकि उन्होंने इसका विवरण पेश नहीं किया। उन्होंने कहा- ‘जरूरत इस बात की है कि हम शांति, विकास, न्याय, समता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता की वकालत करें, जो पूरी मानवता के साझा उसूल हैं। साथ ही जरूरत यह है कि टकराव बढ़ाने वाले छोटे गुट बनाने की कोशिशों को अस्वीकार किया जाए।’ साफ तौर पर ये तमाम बातें अमेरिका को निशाने पर रखते हुए कही गईं।

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ रहा तनाव इस समय सारी दुनिया की चिंता का कारण बना हुआ है। बीते हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी थी कि बढ़ रहे टकराव से नए शीत युद्ध का खतरा है। गुतारेस ने अमेरिका और चीन से बातचीत, सहयोग, समानता और पारस्परिक सम्मान की भावना से अपने मतभेद दूर करने की अपील की थी। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के भाषण से ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील पर ध्यान दिया है।

बाइडन ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका नया शीत युद्ध नहीं चाहता है। वह नहीं चाहता कि दुनिया दो खेमों में बंटे। उधर शी ने भी शांति और विकास पर जोर दिया। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच जिन मुद्दों को लेकर टकराव है, उन पर किसी देश का रुख नरम होने के संकेत नहीं मिले।

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