फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   The most difficult situation in Europe has arisen for Germany amid tensions between US and Russia over Ukraine conflict

यूक्रेन मुद्दा: रूस और चीन के प्रति इतना नरम क्यों है जर्मनी का रुख?

Fri, 04 Feb 2022 06:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 04 Feb 2022 06:51 PM IST
सार

शीत युद्ध के बाद जर्मनी की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हुई। रूस, सोवियत खेमे से निकले पूर्वी यूरोप के देश, और चीन के रूप में जर्मनी को नया बाजार मिला। जर्मनी की बनी महंगी कारें इन देशों में खूब बिकीं। पूर्वी यूरोप के दूसरे देश भी जर्मनी का बाजार बन कर सामने आए...

विज्ञापन
The most difficult situation in Europe has arisen for Germany amid  tensions between US and Russia over Ukraine conflict
व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग - फोटो : Agency

विस्तार

यूक्रेन के मुद्दे पर अमेरिका और रूस के बीच बढ़े तनाव के बीच यूरोप में सबसे ज्यादा कठिन स्थिति जर्मनी के लिए पैदा हुई है। उसके लिए किसी एक का खुल कर पक्ष लेना मुश्किल बना हुआ है। जर्मनी में आम तौर पर ये आशंका जताई गई है कि अगर ये टकराव बढ़ा, तो जर्मनी को उन फायदों से हाथ धोना पड़ सकता है, जो शीत युद्ध खत्म होने के बाद उसे हासिल हुए थे।

विज्ञापन


विश्लेषकों के मुताबिक 30 साल पहले शीत युद्ध खत्म होने का सबसे ज्यादा फायदा जर्मनी को ही हुआ था। 1945 में दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति पर जर्मनी का आधा हिस्सा उसके हाथ से निकल गया था। वहां तत्कालीन सोवियत संघ ने जर्मन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक यानी पूर्वी जर्मनी नाम से अलग देश बना दिया था। शीत युद्ध खत्म होने के बाद पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का एकीकरण हुआ।

विज्ञापन

बाजार हाथ से निकलने का डर

शीत युद्ध के बाद जर्मनी की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हुई। रूस, सोवियत खेमे से निकले पूर्वी यूरोप के देश, और चीन के रूप में जर्मनी को नया बाजार मिला। जर्मनी की बनी महंगी कारें इन देशों में खूब बिकीं। पूर्वी यूरोप के दूसरे देश भी जर्मनी का बाजार बन कर सामने आए। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसीलिए जर्मनी नहीं चाहता कि अब रूस के साथ अमेरिका या उसके नेतृत्व वाले सैनिक गठबंधन नाटो का युद्ध हो। उससे न सिर्फ पूर्वी यूरोप का बाजार उसके हाथ से निकल सकता है, बल्कि चीन के साथ भी रिश्ते खराब हो सकते हैँ। चीन इस विवाद में खुल कर रूस का साथ दे रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले दिनों जब अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य मदद देने की अपील की, तो जर्मनी अकेला बड़ा यूरोपीय देश बना, जिसने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उधर जर्मनी ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के रुख से अलग चीन से भी अपेक्षाकृत बेहतर संबंध बनाए रखे हैं। जर्मनी की फौरी चिंता रूस से आने वाली गैस है। यूरोप अभी गैस की महंगाई झेल रहा है। ऐसे में अंदेशा है कि अगर युद्ध हुआ, तो रूस गैस की सप्लाई रोक सकता है। उससे यूरोप में हालत और बिगड़ जाएगी। इसके अलावा रूस से जर्मनी तक बनी नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइपलाइन का चालू होना और मुश्किल हो जाएगा। जबकि जर्मनी अपने लिए इस पाइपलाइन को बेहद अहम मानता है।

चीन के साथ मजबूत संबंध

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अगर जर्मनी यूक्रेन विवाद पर अपने मौजूदा असमंजस से नहीं निकलता है, तो उसके लिए यूरोप में अपनी अग्रणी भूमिका बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने नाते अकसर यूरोपियन यूनियन के भीतर जर्मनी फैसलों को अपने माफिक प्रभावित करता रहा है।



यूरोपियन यूनियन के कई देश पहले से ही चीन के प्रति नरम रुख को लेकर जर्मनी से खफा रहे हैं। पूर्व चांसलर अंगेला मैर्केल के शासनकाल में जर्मनी ने लगातार चीन के साथ अपने संबंध मजबूत किए। पिछले साल जब जर्मनी में नई सरकार बनी, तब उम्मीद की गई थी कि अब जर्मनी का चीन और रूस के प्रति रुख सख्त हो जाएगा। लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ है। जानकारों का कहना है कि जर्मन सरकार अपने व्यापारियों के हितों का ज्यादा ख्याल कर रही है। वह नहीं चाहती कि जर्मन कारोबारियों की राह में मुश्किल आए। इसके बदले वह अमेरिका और दूसरे यूरोपीय देशों को नाराज करने का जोखिम उठा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed