बांग्लादेश: बंगबंधु शेख मुजीब के खिलाफ कुछ बोला, तो होगी जेल! असहमति को दबाने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2009 में शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश में उनके पिता के 1000 से अधिक भित्ति चित्र और स्मारक बनाए गए हैं। उन स्मारकों का अपमान करने के आरोप में पहले से ही दर्जनों लोगों के खिलाफ मुकदमे चल रहे थे। ये मुकदमे विवादित इंटरनेट कानून के तहत दर्ज किए गए, जो अब देश में काफी बदनाम हो चुका है...
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बांग्लादेश में शेख हसीना वाजेद की सरकार पर असहमति को दबाने का आरोप गहराता जा रहा है। अब प्रधानमंत्री शेख हसीना की अपने पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबर रहमान की ‘भक्ति’ और मूलभूत मानव अधिकारों के बीच टकराव खड़ा होने के संकेत हैं। ताजा विवाद एक मेयर की गिरफ्तारी से भड़का है। मेयर ने शेख मुजीब के एक भित्ति-चित्र को स्थापित करने से इनकार कर दिया था। मेयर ने दलील दी थी कि भत्ति चित्र को लगाना इस्लामी मान्यताओं के खिलाफ है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2009 में शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश में उनके पिता के 1000 से अधिक भित्ति चित्र और स्मारक बनाए गए हैं। उन स्मारकों का अपमान करने के आरोप में पहले से ही दर्जनों लोगों के खिलाफ मुकदमे चल रहे थे। ये मुकदमे विवादित इंटरनेट कानून के तहत दर्ज किए गए, जो अब देश में काफी बदनाम हो चुका है।
इस्लामी शरिया कानून में नहीं है भित्ति चित्र लगाना
ताजा घटना पश्चिमी शहर राजशाही की है। वहां मेयर अब्बास अली पिछले महीने चर्चा में आए, जब शेख मुजीब के भित्ति चित्र के बारे में उनकी एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उस ऑडियो क्लिप में अली को यह कहते सुना गया कि भित्ति चित्र को लगाना इस्लामी शरिया कानून के मुताबिक नहीं है। उन्होंने कहा- ‘इसीलिए मैं उसे नहीं स्वीकार करूंगा। मैं योजना के मुताबिक बाकी सभी चीजों का निर्माण करूंगा, लेकिन भित्ति चित्र लगाना मुझे मंजूर नहीं है।’
यही कहने के आरोप में अब्बास अली पर मुकदमा दर्ज किया गया। इस हफ्ते बुधवार को पुलिस ने ढाका के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। अली की टिप्पणी के खिलाफ देश के कई जगहों पर सत्ताधारी आवामी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। मामला भड़कते देख पहले अली ने खंडन किया कि उन्होंने यह बात कही थी। लेकिन बाद में एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने इसके लिए माफी मांग ली। तब से वे राजशाही से गायब थे।
एमनेस्टी इंटरनेशनल बोला- असहमति पर हमला
अली की गिरफ्तारी से देश में विवाद भड़क उठा है। शेख हसीना सरकार पर असहमति को दबाने के आरोप लगाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि बांग्लादेश सरकार ने असहमति पर हमला बोल दिया है।
इस बीच अली गिरफ्तारी के मामले ने पुलिस ने गुरुवार को एक बयान जारी किया। उसमें कहा गया कि अली ने विवादित बात कहने की बात मान ली है। वे 23 नवंबर से फरार थे और अलग-अलग होटलों में छिप रहे थे। पुलिस ने कहा- हमें खबर मिली थी कि अली देश से भागने की तैयारी में हैं।
इसके पहले पिछले महीने ही एक दूसरी घटना में शेख मुजीब को ‘बदनाम’ करने के आरोप में बांग्लादेश सरकार ने एक मेयर को बर्खास्त कर दिया था। जहांगीर आलम गाजीपुर शहर के मेयर थे। आलम और अब्बास अली दोनों सत्ताधारी आवामी पार्टी के सदस्य हैं। लेकिन शेख मुजीब के बारे में उनकी आम जैसी दिखने वाली टिप्पणियां उनके लिए मुसीबत बन गईं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये दोनों घटनाएं हाल के वर्षों में देश में मानवाधिकारों के बढ़े उल्लंघनों की ही ताजा मिसाल हैं।