Tea Garden: विश्व चाय बाजार में अपनी धाक जमाने की फिराक में है बांग्लादेश
जानकारों के मुताबिक बीते कुछ दशकों में बांग्लादेश के किसानों ने कभी चाय की खेती को तरजीह नहीं दी। उनका ध्यान धान, मक्का, आलू, तंबाकू और गन्ने की खेती पर टिका रहा। लेकिन शेख हसीना वाजेद की सरकार की कोशिशों से अब सूरत बदल रही है...
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बड़ी संख्या में बांग्लादेश के किसान अब चाय की खेती करने लगे हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ने के संकेत हैं। अब चाय के कारोबार से जुड़े लोग यह दावा कर रहे हैं कि अगले कुछ वर्षों में बांग्लादेश विश्व बाजार के लिए चाय एक बड़ा सप्लायर बन जाएगा। जानकारों के मुताबिक बीते कुछ दशकों में बांग्लादेश के किसानों ने कभी चाय की खेती को तरजीह नहीं दी। उनका ध्यान धान, मक्का, आलू, तंबाकू और गन्ने की खेती पर टिका रहा। लेकिन शेख हसीना वाजेद की सरकार की कोशिशों से अब सूरत बदल रही है। शेख हसीना की अवामी लीग सरकार बांग्लादेश को चाय का एक बड़ा उत्पादक देश बनाने की योजना पर काम कर रही है।
प्रति एकड़ दो हजार किलोग्राम तक चाय
इसके तहत कुछ किसानों ने प्रति एकड़ दो हजार किलोग्राम तक चाय की पत्ती उपजाई है। बताया जाता है कि ज्यादातर आलू किसानों ने चाय की खेती को अहमियत दी है। इसकी वजह यह है कि आलू की खेती घाटे का सौदा बनती चली गई है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने अब चाय की खेती कर रहे किसान मौदूद हुसैन की कहानी छापी है।
हुसैन ने पिछले साल चाय की पत्तियों की बिक्री से 18 लाख टका का मुनाफा कमाया। बाकी किसी फसल से उन्हें इतना मुनाफा नहीं हुआ था। उन्होंने वेबसाइट से कहा- ‘जब मैंने देखा कि बहुत कम मेहनत और निवेश से चाय की फसल उग सकती है, तो मेरी सोच बदल गई। एक सीजन में हम पांच से छह बार इन पत्तियों को तोड़ कर सीधे फैक्टरियों को बेच सकते हैं, जिससे हमें काफी फायदा होता है।’
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिछले एक दशक में चाय की खेती करने वाले किसानों की संख्या में दस गुना बढ़ोतरी हुई है। देश के सिर्फ पांच उत्तरी जिलों में जिलों में आज आठ हजार से ज्यादा किसान चाय की खेती कर रहे हैं। बांग्लादेश के इस इलाके में चाय उद्योग में अब 30 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इन जिलों में चाय के लगभग दो दर्जन प्रोसेसिंग प्लांट हैं।
उत्पादन नौ करोड़ 65 लाख किलोग्राम तक पहुंचा
बांग्लादेश टी बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में पांच उत्तरी जिलों में 11,400 एकड़ से अधिक जमीन पर चाय की खेती हुई। जबकि 2020 में मुश्किल से 455 एकड़ जमीन पर ये खेती हुई थी। 2021 में यहां एक करोड़ 40 लाख किलोग्राम से अधिक तय की प्रोसेसिंग हुई, जबकि 2020 में ये आंकड़ा एक करोड़ 32 लाख किलोग्राम था।
वैसे बांग्लादेश का कुल चाय उत्पादन पिछले साल नौ करोड़ 65 लाख किलोग्राम था। आज भी बांग्लादेश में चाय का सबसे ज्यादा उत्पादन देश के पूर्वी जिलों में होता है। इनमें अब श्रीमंगल जिले को देश की चाय राजधानी के नाम से जाना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक बांग्लादेश में चाय की खेती की शुरुआत ब्रिटिश काल में ही हुई थी। एक समय ये इलाका चाय के प्रमुख उत्पादकों में था। लेकिन बाद में यहां चाय की खेती का चलन घट गया।
अब सरकार ने फिर किसानों को चाय उपजाने के लिए प्रेरित किया है। लेकिन जानकारों के मुताबिक बांग्लादेश में उत्पादित चाय की गुणवत्ता अभी भी कमजोर है। अगर सरकार क्वालिटी सुधारने की अपनी योजना में सफल रही, तो अनुमान है कि बांग्लादेश विश्व चाय बाजार में अपनी धाक जमा लेगा।