Taragiri: 3 अप्रैल नौसेना में शामिल होगा 'तारागिरी' युद्धपोत, 75 फीसदी स्वदेशी उपकरणों से तैयार
भारतीय नौसेना 3 अप्रैल को स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ शामिल करेगी। यह अत्याधुनिक युद्धपोत 75% स्वदेशी तकनीक से बना है और नौसेना की शक्ति व आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
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भारतीय नौसेना अपनी स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'तारागिरी' को 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में शामिल करने जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। यह कदम देश की नौसेना शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
'तारागिरी' प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी का चौथा और मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल), मुंबई द्वारा निर्मित तीसरा युद्धपोत है। इसे पिछले साल 28 नवंबर को नौसेना को सौंपा गया था। यह 6,670 टन वजनी फ्रिगेट 'मेक इन इंडिया' भावना और स्वदेशी इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है। नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘यह समारोह भारत की समुद्री संप्रभुता के लिए एक निर्णायक क्षण होगा।’ यह युद्धपोत नौसेना डिजाइन, स्टील्थ, मारक क्षमता और स्वचालन में एक बड़ी छलांग दर्शाता है। इसमें संयुक्त डीजल या गैस (CODOG) प्रोपल्शन संयंत्र है, जो इसे उच्च गति और लंबी सहनशक्ति प्रदान करता है। 'तारागिरी' बहु-आयामी समुद्री अभियानों के लिए डिज़ाइन की गई है। इसमें 75 फीसदी स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है, जो 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देता है और हजारों भारतीय रोजगार पैदा करता है।
अत्याधुनिक क्षमताएं
'तारागिरी' का हथियार सूट विश्व स्तरीय है। इसमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध सूट शामिल है। ये प्रणालियां अत्याधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से एकीकृत हैं। यह फ्रिगेट पिछले डिजाइनों की तुलना में बेहतर है, जिसमें कम रडार क्रॉस-सेक्शन इसे घातक स्टील्थ के साथ संचालित करने की अनुमति देता है।
बहुमुखी मिशन प्रोफाइल
अपनी युद्धक भूमिका के अलावा, 'तारागिरी' आधुनिक कूटनीति और मानवीय संकटों के लिए भी तैयार की गई है। इसका लचीला मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत तक हर चीज के लिए आदर्श बनाता है। यह 'आत्मनिर्भर' बल के रूप में भारतीय नौसेना की वृद्धि में योगदान देती है। 'तारागिरी' एक विकसित और समृद्ध भारत के लिए समुद्री सीमाओं की रक्षा करने के लिए तैयार है।