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अफगानिस्तान में हिंसा: तालिबानी आतंकियों ने की सरकार के मीडिया प्रमुख की हत्या
Fri, 06 Aug 2021 04:32 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 06 Aug 2021 04:32 PM IST
सार
लंबे समय से हिंसा के दौर से जूझ रहे अफगानिस्तान में ये सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तालिबान की ओर से की जा रहीं इन हिंसक घटनाओं और हत्याओं की फेहरिस्त अफगान सरकार के शीर्ष मीडिया अधिकारी दावा खान मेनापाल का नाम जुड़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान ने मेनापाल की हत्या तब कर दी जब वह नमाज पढ़ रहे थे।
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तालिबानी आतंकी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अफगानिस्तान में सरकारी मीडिया व सूचना केंद्र के प्रमुख दावा खान मेनापाल की तालिबानी आतंकवादियों ने शुक्रवार को हत्या कर दी। आंतरिक मंत्रालय के अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि तालिबान ने मेनापाल की हत्या शुक्रवार की नमाज पढ़ते वक्त की। मेनापाल ने राष्ट्रपति अशरफ गनी की आउटरीच टीम में प्रवक्ता के तौर पर भी सेवाएं दी थीं।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा मेनापाल की हत्या मुजाहिदीन द्वारा किए गए एक खास हमले में की गई और उनके कर्मों के लिए सजा दी गई। उल्लेखनीय है कि युद्धग्रस्त देश में विरोधियों की आवाजें दबाने के लिए तालिबानी आतंकवादी कई हत्याएं कर चुके हैं। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता, नौकरशाह, न्यायाधीश शामिल हैं।
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बता दें कि तालिबान और अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों के बीच लड़ाई पिछले कुछ महीनों में तेज हुई है। अमेरिकी और नाटो सैनिकों ने भी अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को पूरी तरह से वापस बुला लिया है। ऐसी स्थिति में तालिबान छोटे प्रशासनिक जिलों को अपने नियंत्रण में ले चुका है और अब प्रांतीय राजधानियों को कब्जा करने की कोशिशें कर रहा है।
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वहीं, भारत ने गुरुवार को कहा था कि वह छह अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में अफगानिस्तान में बिगड़ रहे हालात को लेकर अपने विचार साझा करेगा। इसके साथ ही, तालिबान की हिंसा को देखते हुए व्यापक संघर्ष विराम के लिए जोर देगा। उल्लेखनीय है कि अगस्त माह के लिए यूएनएससी की अध्यक्षता भारत के पास है।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में बढ़ते संघर्ष के कारण इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक करीब तीन लाख 60 हजार लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सहायता अभियान ने शहरी इलाकों में लड़ाई तुरंत बंद करने का आह्वान किया है। इसने कहा है कि आम जनता हिंसा का शिकार हो रही हैं।