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ताइवान: महामारी संभालने के शानदार रिकॉर्ड पर अब लग रहे हैं दाग, बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले

Tue, 18 May 2021 03:42 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपेई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपेई Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 18 May 2021 03:42 PM IST
सार

ताइवान के केंद्रीय महामारी कमांड सेंटर के मुताबिक यहां फिलहाल जो संक्रमण के मामले सामने आए हैं, उनके संक्रमण का स्रोत देश के अंदर ही है। ताइवान की समाचार एजेंसी सीएनए के मुताबिक इस बार संक्रमण से सबसे पहले एक पायलट प्रभावित हुआ। बाद में यह समुदाय में पहुंच गया...

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Taiwan under troubled by a second wave of coronavirus infection
ताइवान - फोटो : ANI (File)

विस्तार

ताइवान कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से परेशान है। खासकर राजधानी ताइपेई में नए संक्रमित हो रहे लोगों की संख्या में पिछले एक हफ्ते में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को ये तादाद 335 तक पहुंच गई। रविवार को 207 नए मामले सामने आए थे। इसे देखते हुए यहां कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। पिछले साल कोरना वायरस संक्रमण की पहली लहर के दौरान ताइवान ने उसे जिस ढंग से संभाला, उसकी दुनियाभर में तारीफ हुई थी। उसके बाद से ये चीनी द्वीप मोटे तौर पर संक्रमण से बचा रहा। लेकिन अब जब महामारी ने एक बार फिर यहां सिर उठाया है, तो ये सवाल दुनिया भर में चर्चित हुआ है कि आखिर गड़बड़ी कहां हुई?

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ताइवान के केंद्रीय महामारी कमांड सेंटर के मुताबिक यहां फिलहाल जो संक्रमण के मामले सामने आए हैं, उनके संक्रमण का स्रोत देश के अंदर ही है। ताइवान की समाचार एजेंसी सीएनए के मुताबिक इस बार संक्रमण से सबसे पहले एक पायलट प्रभावित हुआ। बाद में यह समुदाय में पहुंच गया। चीन के सरकारी अखबार अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि ताइवान में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति बन गई है।
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ताइवान के स्वास्थ्य मंत्री चेन शिह-चुंग ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि स्थिति ने संकटपूर्ण रूप ले लिया है। इसे देखते हुए यहां सभी सामाजिक आयोजनों पर रोक लगा दी गई है। बार, क्लब, जिम आदि बंद कर दिए गए हैं। इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया है कि ताइवान सरकार ने महामारी को सियासी नजरिए से देखा और उसका ही परिणाम अब वहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अखबार का कहना है कि चीन सरकार ने ताइवान को चीन में बनी वैक्सीन देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे ताइवान सरकार ने ठुकरा दिया। गौरतलब है कि 1949 में चीन में कम्युनिस्ट क्रांति के दौरान वहां धनी-मानी लोग भाग कर ताइवान चले गए थे। तब से वहां उनका शासन है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, लेकिन वहां वास्तव में उसकी सत्ता नहीं है। चीन और ताइवान की सरकारों के बीच लगातार वैर भाव बना रहा है।  

ताइवान के स्वास्थ्य मंत्री चेन ने पिछले हफ्ते स्वीकार किया था कि देश में कोरोना वैक्सीन की कमी है। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां टीकाकरण सबसे धीमी गति से चल रहा है। दो करोड़ 30 लाख आबादी वाले इस द्वीप में अब तक एक फीसदी से भी कम लोगों को टीका लग सका है। ताइवान को सिर्फ एस्ट्राजेनेका का टीका मिला था, लेकिन हाल में उसकी सप्लाई रुक गई है। पहले दौर में सिर्फ राजनयिकों, मेडिकल कर्मियों और दूसरे फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीका लगा। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान में अभी संक्रमण की जो दर है, वह दुनिया के बहुत से देशों की तुलना में बहुत कम है। लेकिन जिस रफ्तार से उसमें पिछले एक हफ्ते में बढ़ोतरी हुई है, वह चिंताजनक है।


पिछले साल कोरोना महामारी आने के बाद से अब तक यहां दो हजार से कुछ ही ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं। सिर्फ 12 लोगों की मौत हुई है। इसलिए ब्लूमबर्ग ने महामारी को बेहतर ढंग से संभालने वाले देशों की सूची में ताइवान को पांचवें नंबर पर रखा था। ऑस्ट्रेलिया के लॉवी इंस्टीट्यूट ने अपनी लिस्ट में उसे तीसरे नंबर पर रखा था। लेकिन अब स्थिति बदल रही है और इसका असली कारण समझना मुश्किल बना हुआ है।

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