स्विट्जरलैंड को 'चोरी का अड्डा' कह कर बुरे फंसे बाइडन, उन पर ही उठी उंगलियां

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 01 May 2021 04:21 PM IST

सार

जो बाइडन के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्रालय की प्रवक्ता इसाबेल रोएश ने कहा- ‘अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं 2019 से लगातार कह रही हैं कि स्विट्जरलैंड सभी कर मानकों का पालन कर रहा है, जिसमें अलग-अलग देशों को वहां हुए विनिमय संबंधी सभी सारी जानकारियां देना भी शामिल है।’
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : twitter.com/JoeBiden
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विस्तार

स्विट्जरलैंड अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान से बहुत आहत है, जिसमें जो बाइडन ने उसे टैक्स हैवेन यानी चोरी का अड्डा बताया था। स्विस सरकार ने औपचारिक रूप से इस पर अपनी नाराजगी जताई है। स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को ‘अनुचित और पूरी तरह पुरानी पड़ चुकी सोच’ बताया है। आम तौर पर स्विट्जरलैंड का रुख अमेरिका के प्रति नरम रहता है। लेकिन इस मामले में उसने अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना करने में कोई संयम नहीं बरता।
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जो बाइडन ने गुरुवार (भारतीय समय के अनुसार) को अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में दिए भाषण के दौरान अमेरिका के धनी लोगों और कंपनियों से कहा था कि वे टैक्स का अपना उचित हिस्सा चुकाएं। इसी सिलसिले में उन्होंने कहा- ‘बहुत-सी कंपनियां स्विट्जरलैंड, बरमूडा और केमैन आइलैंड्स जैसे टैक्स हैवेन्स के जरिए कर चोरी करती हैं।’


वैसे बाइडन ने जो कहा, उसमें कोई नई बात नहीं है। स्विट्जरलैंड की लंबे समय से छवि टैक्स हैवेन के रूप में रही है। गुजरे वर्षों में स्विट्जरलैंड ने अपनी ये छवि बदलने की काफी कोशिश की है। लेकिन बाइडन के बयान से जाहिर है, इसमें उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली है। आज भी मोटे तौर पर दुनियाभर में माना जाता है कि धनी लोग और कंपनियां टैक्स की चोरी करने के लिए स्विट्जरलैंड के बैंकों में खाता खोलते हैं।

जो बाइडन के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्रालय की प्रवक्ता इसाबेल रोएश ने दावा किया कि उनका देश टैक्स के मामलों में सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करता है। उन्होंने कहा- ‘अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं 2019 से लगातार कह रही हैं कि स्विट्जरलैंड सभी कर मानकों का पालन कर रहा है, जिसमें अलग-अलग देशों को वहां हुए विनिमय संबंधी सभी सारी जानकारियां देना भी शामिल है।’ उन्होंने कहा कि पिछले साल स्विट्जरलैंड में टैक्स सुधार लागू किए गए, जिसके तहत कर संबंधी उन तमाम मॉडलों को रद्द कर दिया गया, जिनकी पहले ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) आलोचना करता था। ओईसीडी धनी देशों का एक संगठन है।

मीडिया संगठनों को जारी किए एक ई-मेल में इसाबेल रोएश ने दावा किया कि 2020 में ओईसीडी ने स्विट्जरलैंड के अब टैक्स हैवेन ना रहने की पुष्टि कर दी थी। पिछले हफ्ते ही उसकी सूचना अमेरिका के वित्त मंत्रालय को भेजी गई। इसके बावजूद अमेरिका का नया प्रशासन एक से ज्यादा बार स्विट्जरलैंड के लिए वैसी बातें कह चुका है, जो अनुचित हैं। रोएश ने कहा कि स्विट्जरलैंड की विदेश मंत्री उएली मॉरर जल्द ही इस बारे में अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन से बात करेंगे। जाहिर है, स्विट्जरलैंड ने अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी का बहुत बुरा माना है।

वैसे कर पारदर्शिता के लिए काम करने वाले संगठनों ने भी बाइडन की बात पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि असल में बाइडन को अमेरिका के उन नियमों की समीक्षा करनी चाहिए, जिससे देश के अंदर कर चोरी में मदद मिलती है। जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि लंदन स्थित संस्था टैक्स जस्टिस नेटवर्क ने पिछले साल अपनी एक रिपोर्ट में वित्तीय गोपनीयता बरतने वाले देशों की सूची में अमेरिका को दूसरे नंबर पर रखा था। इसमें पहले नंबर पर केमैन आइलैंड्स को रखा गया था। इस तरह इस मामले में अमेरिका का रिकॉर्ड स्विट्जरलैंड से खराब बताया गया था।

राष्ट्रपति बनने के पहले जो बाइडन लगातार 36 साल तक अमेरिका के डेलावेयर राज्य से सीनेटर रहे। जबकि इस राज्य की छवि कंपनियों और धनी व्यक्तियों की टैक्स चोरी में मदद करने वाले राज्य की है। धनी लोग उस राज्य में फर्जी कंपनियां रजिस्टर करवा कर टैक्स चोरी करते रहे हैं। टैक्स जस्टिस नेटवर्क से जुड़े विशेषज्ञ निक शैक्सॉन ने अमेरिकी मीडिया संस्थान एबीसी न्यूज ने कहा कि ये बुराई वर्षों से स्विट्जरलैंड और अमेरिका दोनों में मौजूद रही है। इसलिए जब कभी अमेरिका स्विट्जरलैंड पर अंगुली उठाता है, उसमें पाखंड का एक तत्व मौजूद रहता है। और जब डेलावेयर राज्य से आए बाइडन ऐसा कहते हैं, तो वो बात और ज्यादा पाखंड महसूस होती है। 

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