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US: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की चुनौती पर दिया बड़ा झटका, डेलिंगर को पद पर बनाए रखने का दिया आदेश

Sat, 22 Feb 2025 07:15 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 22 Feb 2025 07:15 AM IST
सार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे पर कई कानूनी मुद्दों पर अपना पहला बयान दिया। इसके तहत कोर्ट ने ट्रंप को झटका देते हुए सरकारी मुखबिरों की सुरक्षा करने वाली संघीय एजेंसी के प्रमुख, हैम्पटन डेलिंगर को अस्थायी रूप से पद पर बनाए रखने का आदेश दिया।

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Supreme Court won't allow Trump to immediately fire head of whistleblower office World News In Hindi
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे पर कई कानूनी मुद्दों पर अपना पहला बयान दिया। कोर्ट ने सरकारी मुखबिरों की सुरक्षा करने वाली संघीय एजेंसी के प्रमुख, हैम्पटन डेलिंगर को अस्थायी रूप से पद पर बनाए रखने का आदेश दिया।

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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एक अहस्ताक्षरित आदेश में कहा कि डेलिंगर कम से कम 26 फरवरी तक अपने पद पर बने रह सकते हैं, जब तक निचली अदालत का अस्थायी आदेश खत्म नहीं हो जाता। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया, जिसमें डेलिंगर को तुरंत हटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस मामले को स्थगित करते हुए यह कहा कि यह आदेश कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगा।
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राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख
रूढ़िवादी न्यायाधीश नील गोरसच और सैमुअल एलिटो ने प्रशासन के पक्ष में राय दी, जबकि उदारवादी न्यायाधीश सोनिया सोटोमोर और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने प्रशासन के अनुरोध को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर मजबूत रुख अपनाया है। पिछली बार, कोर्ट ने एक ऐसे फैसले में राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए उनके कार्यों के लिए अभियोजन से छूट दी थी। न्याय विभाग ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह डेलिंगर की बर्खास्तगी को मंजूरी दे, ताकि ट्रंप प्रशासन नए एजेंडे को लागू कर सके।
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सॉलिसिटर जनरल सारा हैरिस का बयान
मामले में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल सारा हैरिस ने कहा कि निचली अदालत का फैसला राष्ट्रपति की शक्तियों का उल्लंघन है, क्योंकि इससे प्रशासन की कार्यकारी एजेंसियों के संचालन में रुकावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि विशेष परामर्शदाता कार्यालय (ओएससी) संघीय कर्मचारियों को अवैध कार्यों से बचाने के लिए जिम्मेदार है, खासकर मुखबिरी के लिए प्रतिशोध से। इसके प्रमुख को केवल अकुशलता या कर्तव्य की उपेक्षा के कारण राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि डेलिंगर को डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नियुक्त किया था और उनकी नियुक्ति को 2024 में सीनेट द्वारा पांच साल के लिए पुष्टि भी मिली थी। इसके लिए हैरिस ने अदालत से कहा कि यह मामला उन संघीय न्यायाधीशों पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने हाल ही में ट्रंप प्रशासन के कई फैसलों को रोकने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि इन फैसलों ने राष्ट्रपति की शक्तियों का अतिक्रमण किया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1935 के एक फैसले को पहले ही वापस ले लिया था, जिसमें कहा गया था कि स्वतंत्र एजेंसियों के प्रमुखों को राष्ट्रपति बिना कारण के नहीं हटा सकते। यह फैसला राष्ट्रपति के लिए एक बड़ा अधिकार था, लेकिन रूढ़िवादी न्यायाधीशों ने इसे चुनौती दी है, जैसा कि 2020 में हुआ था, जब कोर्ट ने उपभोक्ता वित्तीय सुरक्षा ब्यूरो के प्रमुख को ट्रंप द्वारा हटाने की अनुमति दी थी। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि राष्ट्रपति की हटाने की शक्ति नियम है, अपवाद नहीं," लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि व्हिसलब्लोअर वॉचडॉग को हटाने के प्रयासों को लेकर कोर्ट अलग दृष्टिकोण अपना सकता है।

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