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पौलेंड : गर्भपात असंवैधानिक करार देने के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर, हिंसक झड़पें

Sun, 01 Nov 2020 03:05 PM IST
Tanuja Yadav डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, वॉरसा
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, वॉरसा Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 01 Nov 2020 03:05 PM IST
सार

  • गर्भपात के मुद्दे पर पोलैंड में हिंसक हालात
  • वॉरसा की सड़कों पर प्रदर्शन, पुलिस ने फेंके आग के गोले 
  • सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को असंवैधानिक ठहराया

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supreme court of Poland held abortion unconstitutional violence in Poland over decision
पोलैंड में विरोध प्रदर्शन - फोटो : Twitter - @mjluxmoore

विस्तार

पोलैंड की सुप्रीम कोर्ट द्वारा हर तरह के स्वैच्छिक गर्भपात को असंवैधानिक करार देने के बाद देश में हिंसा के हालात बन गए हैं। राजधानी वॉरसा में शुक्रवार को चार लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर निकल आए। गर्भपात के अधिकार के समर्थक गत सप्ताह देशभर में जोरदार प्रदर्शन करते रहे। वॉरसा में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आग के गोले फेंके। दर्जन भर लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों और दक्षिणपंथी गुटों के बीच देश के कुछ दूसरे शहरों में भी झड़पें हुईं। अब इस हफ्ते ऐसा होने की आशंकाएं और गहरा गई हैं। दक्षिणपंथी गुट 'फालांगना' ने एलान किया है कि गर्भपात विरोधी हजारों लोग इस हफ्ते सड़कों पर उतरेंगे।
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इस गुट ने चेतावनी दी है कि उसके समर्थक संघर्ष के तरीकों में प्रशिक्षित हैं। अगर उनका विरोध हुआ, तो वे अपने तरीके से उससे निपटेंगे। इससे वहां हिंसा की आशंका और बढ़ गई है।
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चुनिंदा मामलों में हो सकेगा गर्भपात
बता दें, बीते 23 अक्तूबर को पोलैंड के सुप्रीम कोर्ट ने हर तरह के स्वैच्छिक गर्भपात पर रोक लगा दी है। उसने कहा था कि गर्भपात असंवैधानिक है। पोलैंड में दूसरे यूरोपीय देशों की तुलना में गर्भपात कराना पहले से ही काफी कठिन था। अब भ्रूण में दोष होने पर भी इसकी इजाजत नहीं होगी। सिर्फ उन मामलों में गर्भपात कराने की इजाजत होगी, जिनमें गर्भ या तो बलात्कार या पारिवारिक यौन संबंध की वजह से ठहरा हो या फिर मां की जान खतरे में हो।
फैसला सत्तारूढ़ दल के अनुकूल
कोर्ट का ये फैसला सत्ताधारी दक्षिणपंथी पार्टी के विचारों के मुताबिक आया। इससे महिला अधिकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने आंदोलन का आह्वान किया लेकिन उसे इतना बड़ा समर्थन मिलेगा, इसका अनुमान खुद उन्हें भी नहीं था।
1989 के प्रदर्शन से तुलना
शुक्रवार को तो इतना बड़ा प्रदर्शन राजधानी वॉरसा में हुआ कि उसकी तुलना 1989 के सॉलिडरिटी आंदोलन के दौरान हुए प्रदर्शनों से की गई। सॉलिडरिटी नामक मजदूर यूनियन के आंदोलन की वजह से ही पोलैंड में कम्युनिस्ट शासन खत्म हुआ था। उससे ही वो शुरुआत हुई, जिसके परिणामस्वरूप आखिरकार सोवियत संघ का पूरा कम्युनिस्ट खेमा ढह गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सत्ताधारी लॉ एंड जस्टिस पार्टी के राज में आम लोगों से वे स्वतंत्रताएं छीनी जा रही हैं, जो कम्युनिस्ट शासन के बाद बड़ी मुश्किल से पोलैंड के लोगों ने हासिल की हैं।
400 जगह हुए प्रदर्शन
पिछले हफ्ते देश में जो नजारा देखने को मिला, उससे लगता है कि इस राय से पौने चार करोड़ आबादी वाले इस देश में बहुत से लोग इत्तेफाक रखते हैं। खुद पुलिस के मुताबिक पिछले बुधवार को देश भर में 400 से ज्यादा प्रदर्शन हुए। शुक्रवार को वॉरसा में हुए प्रदर्शन में चार लाख 30 हजार लोगों ने भाग लिया।

सारी दुनिया का ध्यान खींचा
कोरोना वायरस के फैलाव के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर उतरने की घटनाओं ने सारी दुनिया का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री मातेउस्ज मोराविकी ने फिलहाल लोगों से कोरोना महामारी पर ध्यान देने की अपील की है। हालांकि विपक्षी गुटों का आरोप है कि कोर्ट से ये फैसला जानबूझ कर इस वक्त दिलवाया गया ताकि कोरोना महामारी पर काबू पाने में सरकार की नाकामी से ध्यान हटाया जा सके।
हिंसा बढ़ने के आसार
इन आरोप-प्रत्यारोपों से अलग कई विश्लेषकों का कहना है कि गर्भपात के मुद्दे ने देश में पैदा हुए सामाजिक विभाजन को सबके सामने ला दिया है। ये विभाजन इतने तीखे हैं कि इसके बीच हिंसा एक वास्तविक आशंका है। इस आशंका के इस हफ्ते और गहराने के संकेत हैं।

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