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Summit For Democracy: डेमोक्रेसी समिट गले की हड्डी क्यों बन गया पाकिस्तान के लिए?
Thu, 09 Dec 2021 07:28 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 09 Dec 2021 07:28 PM IST
सार
पाकिस्तानी विश्लेषकों के मुताबिक ऐसे कई मसले हैं, जिनकी वजह से पाकिस्तान के लिए इस आमंत्रण पर फैसला करना मुश्किल बना रहा। इनमें एक यह भी है कि राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन ने दुनिया के जिन कुछ नेताओं से अभी तक बात नहीं की है, उनमें इमरान खान भी हैं।
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जो बाइडन और इमरान खान
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने लोकतांत्रिक देशों के शिखर सम्मेलन (समिट ऑफ डेमोक्रेसीज) के लिए जिन देशों को आमंत्रित किया, उनमें पाकिस्तान भी है। लेकिन ये आमंत्रण इमरान खान सरकार के लिए गले की हड्डी की बन गया। सम्मेलन वर्चुअल माध्यम से 9 और 10 दिसंबर को हो रहा है। लेकिन मंगलवार शाम तक पाकिस्तान ये फैसला नहीं कर पाया था कि इसमें उसका प्रतिनिधित्व किस स्तर पर होगा।
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पाकिस्तानी विश्लेषकों के मुताबिक ऐसे कई मसले हैं, जिनकी वजह से पाकिस्तान के लिए इस आमंत्रण पर फैसला करना मुश्किल बना रहा। इनमें एक यह भी है कि राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन ने दुनिया के जिन कुछ नेताओं से अभी तक बात नहीं की है, उनमें इमरान खान भी हैं। एक दूसरा मसला यह है कि इस सम्मेलन के लिए चीन को आमंत्रित नहीं किया गया है। जबकि अमेरिका ने ताइवान को आमंत्रित किया है, जिसे चीन अपना इलाका समझता है। विश्लेषकों का कहना है कि इस मसले में चीन की नाराजगी भी पाकिस्तान के लिए असमंजस का एक कारण रही है।
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पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक मंगलवार शाम को कूटनीतिक सूत्रों ने उसे बताया कि व्हाइट हाउस तब तक इस मामले में पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा था। इस डेमोक्रेसी समिट के लिए दुनिया भर के तकरीबन 110 देश आमंत्रित किए गए हैं। उनमें दक्षिण एशिया के चार देश भारत, पाकिस्तान, नेपाल और मालदीव शामिल हैं। कूटनीतिक सूत्रों ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि पाकिस्तान के इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने पर चीन को कोई आपत्ति नहीं होगी। इसके बावजूद कुछ ऐसे मसले हैं, जिसकी वजह से इमरान खान सरकार के लिए इस बारे में निर्णय लेना कठिन साबित हुआ।
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पाकिस्तान के कूटनीतिकों ने मीडिया से बातचीत में इस बात का जिक्र किया है कि अमेरिका ने सभी आमंत्रित देशों से अपनी भागीदारी के बारे में पिछले सप्ताहांत तक पुष्टि कर देने का अनुरोध किया था। लेकिन उस समयसीमा तक पाकिस्तान ने कोई जवाब नहीं भेजा। इस बीच यहां इस पर विचार होता रहा कि शिखर सम्मेलन में खुद प्रधानमंत्री इमरान खान शामिल हों, या किसी मंत्री या अधिकारी को इसमें पाकिस्तान का पक्ष रखने को कहा जाए।
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर तनाव है। उनमें एक अफगानिस्तान को लेकर उसका रुख भी है। बताया जाता है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद इमरान खान ने जो बयान दिए, उसे व्हाइट हाउस ने पसंद नहीं किया। ये बात खान को बता दी गई। उधर इमरान खान भी अमेरिका को लेकर हाल में बहुत उत्साहित नहीं रहे हैं। डेमोक्रेसी समिट के बारे में फैसला लेने में देर कर उन्होंने संभवतः अपनी नाराजगी जताई है।
विश्लेषकों का कहना है कि इसके बावजूद पाकिस्तान अमेरिका से संबंध कायम रखना चाहता है। पाकिस्तान यह संकेत देने की कोशिश में भी रहा है कि उसे चीन का पिछलग्गू ना समझा जाए। इसलिए डेमोक्रेसी समिट के आमंत्रण को ठुकराना भी उसके लिए आसान नहीं रहा है।