{"_id":"6286e4ac0e7b8f1e7f029bde","slug":"summer-that-comes-once-in-the-first-300-years-will-now-scorch-every-three-years","type":"story","status":"publish","title_hn":"Climate Change: 300 साल में एक बार आने वाली गर्मी अब हर तीन साल में झुलसाएगी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Climate Change: 300 साल में एक बार आने वाली गर्मी अब हर तीन साल में झुलसाएगी
Fri, 20 May 2022 06:15 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 20 May 2022 06:15 AM IST
सार
भारत-पाक में साझा उच्चतम औसत तापमान 1990 के बाद से 2010 की भीषण गर्मी के ज्यादातर रिकॉर्ड अप्रैल-मई में टूटने के कगार पर 2010 में सर्वाधिक दर्ज किया गया।
विज्ञापन
गर्मी का मौसम
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत और पाकिस्तान में भीषण गर्मी का जो दौर पहले 300 साल में एक बार आता था, अब हर तीन साल में आएगा। ब्रिटेन के मौसम कार्यालय ने एक अध्ययन के आधार पर दावा किया कि उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में भीषण गर्मी की आशंका 100 गुना बढ़ गई है।
विज्ञापन
इसके साथ ही अनुमान जताया है कि आने कुछ सप्ताह में दोनों देशों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। भारत-पाक में साझा उच्चतम औसत तापमान 1990 के बाद से 2010 की भीषण गर्मी के ज्यादातर रिकॉर्ड अप्रैल-मई में टूटने के कगार पर 2010 में सर्वाधिक दर्ज किया गया। तब औसत तापमान से अधिक गर्मी की आशंका 312 साल में एक बार होती थी। अब यह आशंका 3.1 साल में एक बार बढ़ गई है।
विज्ञापन
प्रो. पीटर स्टॉट ने कहा, जब अप्रैल व मई के सभी दिनों का तापमान साथ रखकर देखा जाएगा , तो पता चलेगा कि इस बार उच्चतम तापमान के 2010 के ज्यादातर रिकॉर्ड टूट चुके हैं।
विज्ञापन