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Pakistan: विरोध के बाद POJK सरकार ने वापस लिया विवादास्पद अध्यादेश, प्रदर्शनों से पहले अनुमति लेना था अनिवार्य
Tue, 10 Dec 2024 06:13 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
एजेंसी, मुजफ्फराबाद
एजेंसी, मुजफ्फराबाद
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 10 Dec 2024 06:13 AM IST
सार
प्रेसिडेंट बैरिस्टर सुल्तान महमूद ने अध्यादेश वापस लेने की घोषणा की। इसे लेकर एक लिखित समझौता भी हुआ है। इसके तहत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी मामले वापस लिए जाएंगे और 13 मई की गोलीबारी की घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।
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पीओजेके में विरोध प्रदर्शन के बाद नए अध्यादेश को निरस्त करने का फैसला
- फोटो : एएनआई
विस्तार
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जनता के भारी विरोध और बंद के बाद सरकार ने विवादास्पद अध्यादेश वापस ले लिया। अध्यादेश के जरिये सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों से पहले सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था।
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प्रेसिडेंट बैरिस्टर सुल्तान महमूद ने अध्यादेश वापस लेने की घोषणा की। इसे लेकर एक लिखित समझौता भी हुआ है। इसके तहत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी मामले वापस लिए जाएंगे और 13 मई की गोलीबारी की घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा। सरकार के फैसले के बाद एक प्रदर्शनकारी ने कहा, जनता के विरोध ने सरकार व नौकरशाहों को करारा जवाब दिया है। उसने साबित किया है कि पीओजेके का अपना कानून और प्रणाली है। पीओजेके के प्रधानमंत्री अनवर उल हक ने कहा कि अध्यादेश में प्रदर्शनों से पहले सरकार की अनुमति लेने का प्रावधान सुरक्षा चिंताओं को लेकर किया गया था।
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बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं पीओजेके के नागरिक
मालूम हो कि पाकिस्तान सरकार लंबे समय से पीओजेके के लोगों का दमन कर रही है। यहां उनके अधिकारों, बुनियादी जरूरतों और आकांक्षाओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है। इस क्षेत्र के लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों, सामाजिक असहमति को लेकर चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है। हाल के वर्षों में सरकार या सत्तारूढ़ अधिकारियों की आलोचना करने वाले व्यक्तियों, मीडिया प्रतिष्ठानों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उत्पीड़न, धमकी और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
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