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भारत स्टारलिंक पर क्यों सख्त?: यूक्रेन को मिला धोखा, कीव के सवाल पर मस्क ने झाड़ा पल्ला; क्या है पूरा विवाद?
Fri, 16 Oct 2026 08:44 AM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, कीव/वाशिंगटन।
एजेंसी, कीव/वाशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 16 Oct 2026 08:44 AM IST
सार
यूक्रेन में स्टारलिंक की सेवाएं सीमित होने से सैन्य अभियानों पर असर पड़ने का आरोप लगा है। स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क ने कहा है कि सेवाओं पर नियंत्रण अमेरिकी सेना के हाथ में है। वहीं, भारत डाटा सुरक्षा और नेटवर्क पर सरकारी नियंत्रण को लेकर सख्त शर्तें चाहता है। यूक्रेन के अनुभव से भारत सतर्क क्यों? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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एलन मस्क
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
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अमेरिकी अरबपति कारोबारी एलन मस्क भारत में अपनी कंपनी स्टारलिंक की सेवाएं शुरू करने को लेकर काफी जोर देते रहे हैं। लेकिन हाल में यूक्रेन में सामने आई घटना कहीं न कहीं यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि भारत की तरफ से उठाई जा रही सुरक्षा चिंताएं जायज हैं। अब प्वाइंट टू प्वाइंट जानते हैं कि यूक्रेन और स्टारलिंक का विवाद क्या है और भारत ने स्टारलिंक के सामने क्या शर्तें रखी है।
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यूक्रेन में स्टारलिंक को लेकर क्या विवाद सामने आया है?
दरअसल, यूक्रेनी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि स्टारलिंक ने उसके देश में अपनी सेवाएं धीमी कर दीं, जिससे रूसी ड्रोन हमले रोकने की उसकी क्षमता कमजोर पड़ गई और कीव बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से दहल उठा। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के एक सलाहकार ने बताया कि बिना किसी पूर्व चेतावनी के बुधवार रात 100 मील प्रति घंटे (लगभग 160 किमी/घंटा) से तेज रफ्तार से चलने वाले स्टारलिंक टर्मिनलों की सेवा सीमित कर दी गई। इसका सीधा असर यूक्रेन के ड्रोन ऑपरेशन्स पर पड़ा, क्योंकि इन्हें सैटेलाइट इंटरनेट के जरिये ही उड़ाया जाता है। यूक्रेनी अधिकारियों ने मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पर स्टारलिंक सैटेलाइट सेवाएं धीमी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे यूक्रेन के सैन्य अभियानों में बाधा आ रही है और कीव पर जानलेवा हमलों का खतरा बढ़ गया है। यूक्रेन के रक्षातकनीक सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्तनोव ने टेलीग्राम पर लिखा कि इस कदम ने यूक्रेन से शाहेद ड्रोनों से अपना बचाव करने का एक अहम जरिया छीन लिया है।
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मस्क ने पहले क्या भरोसा दिया था और अब क्या कह रहे हैं?
स्पेसएक्स और इसके सैन्य संस्करण स्टारशील्ड के प्रमुख एलन मस्क ने पूरे मामले में सफाई देते हुए कहा कि पाबंदियां लगाने से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसका नियंत्रण पूरी तरह अमेरिकी सेना के हाथ में है। उन्होंने दावा किया कि स्टारशील्ड की स्पीड और इस्तेमाल पर सारा नियंत्रण अमेरिकी सरकार और सेना का है। मस्क ने एक पोस्ट में लिखा, स्पीड या इस्तेमाल पर किसी भी तरह की पाबंदी का फैसला अमेरिकी सेना और आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति ही लेते हैं। हालांकि, इस मामले पर व्हाइट हाउस ने अभी तक कोई पुष्टि या इन्कार नहीं किया है। पेंटागन ने भी फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मार्च 2025 में मस्क ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था, साफ शब्दों में कहूं तो, यूक्रेन नीति से मेरी चाहे कितनी भी असहमति क्यों न हो, स्टारलिंक कभी भी अपने टर्मिनल्स बंद नहीं करेगा। मैं बस इतना कह रहा हूं कि स्टारलिंक के बिना यूक्रेन का अग्रिम मोर्चा ढह जाएगा क्योंकि रूसी सेना बाकी सभी संचार माध्यमों को जाम कर सकती है। हम ऐसा कभी नहीं करेंगे और न ही इसे किसी सौदेबाजी के मोहरे के रूप में इस्तेमाल करेंगे।
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भारत ने स्टारलिंक के सामने कड़ी शर्तें क्यों रखी हैं?
भारत सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि स्टारलिंक का सैटेलाइट नेटवर्क क्रॉस-बॉर्डर लेजर लिंक का उपयोग करता है। भारत चाहता है कि देश के नागरिकों और संस्थानों का सारा डाटा भारत के भीतर ही स्टोर और प्रोसेस हो। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा या संकट के समय सरकार के पास इस नेटवर्क को तुरंत नियंत्रित या बंद करने का अधिकार हो। भारतीय कानूनों के मुताबिक, किसी भी सेवा प्रदाता के लिए यह अनिवार्य है कि वह देश की जांच व सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और डाटा एक्सेस की पूरी सुविधा दे।
स्टारलिंक और स्टारशील्ड सेवाओं में क्या अंतर है?
स्टारशील्ड स्पेसएक्स की एक वाणिज्यिक शाखा है, जो अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के लिए सैन्य और खुफिया सैटेलाइट सिस्टम बनाती है। स्टारशील्ड की सेवा स्टारलिंक की आम इंटरनेट सेवा से अलग है। आम स्टारलिंक सेवा का इस्तेमाल हमलावर सैन्य कार्रवाइयों के लिए नहीं किया जा सकता, इसका उपयोग केवल रक्षात्मक गतिविधियों या आम नागरिकों के लिए ही संभव है। स्टारशील्ड में सैन्य हमलों और रणनीतिक क्षमताओं की अनुमति है। यह संवेदनशील जानकारियों को भेजने के लिए बेहद सुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। इसके अलावा, स्टारशील्ड अपने यूजर्स को ड्रोन जैसी चीजों पर सेंसर्स जोड़ने की सुविधा भी देता है। स्टारशील्ड का यह सुरक्षित नेटवर्क वास्तव में स्टारलिंक के 11,000 सैटेलाइट्स के विशाल नेट पर काम करता है, जिन्हें एलन मस्क और स्पेसएक्स ने 2019 से अंतरिक्ष में भेजा है।
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यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरी पर हमला क्यों किया?
यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर एक बार फिर हमले शुरू किए हैं। यूक्रेन ने रूस के रियाजान क्षेत्र में एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। रूस और यूक्रेन के अधिकारियों ने गुरवार को इसकी पुष्टि की। रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमले में एयर डिफेंस सिस्टम ने यूक्रेन की चार फ्लेमिंगो मिसाइलों और 69 ड्रोन को मार गिराया। हालांकि, ड्रोन के मलबे से रिफाइनरी में आग लग गई। गोपनीयता की शर्त पर यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी पुष्टि की कि यूक्रेनी सेना ने रात में रियाजान रिफाइनरी को निशाना बनाया।