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Sri Lanka: मुश्किल दौर में साथ देने पर विक्रमसिंघे ने पीएम मोदी का माना आभार, सर्वदलीय सरकार का आह्वान
Wed, 03 Aug 2022 02:57 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 03 Aug 2022 02:57 PM IST
सार
बुधवार को श्रीलंका की संसद के तीसरे सत्र के दौरान सरकार की ओर से नीतिगत बयान पेश करते हुए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने यह बात कही। इसके साथ ही उन्होंने श्रीलंका के राजनीतिक दलों को सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
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श्रीलंका की संसद के नए सत्र के दौरान राष्ट्रपति विक्रमसिंघे
- फोटो : ANI
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विस्तार
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने मुश्किल दौर में अपने देश का साथ देने के लिए बुधवार को भारत व पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। श्रीलंका की संसद में दिए भाषण में उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने हमारे संकटग्रस्त देश को राहत की सांस प्रदान की।
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बुधवार को श्रीलंका की संसद के तीसरे सत्र के दौरान सरकार की ओर से नीतिगत बयान पेश करते हुए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने यह बात कही। इसके साथ ही उन्होंने श्रीलंका के राजनीतिक दलों को सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
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विक्रमसिंघ ने अपने भाषण में भारत का खासतौर से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'आर्थिक पुनर्वास के हमारे प्रयासों में निकटतम पड़ोसी देश भारत द्वारा प्रदान की गई सहायता का मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने हमें संकट की घड़ी में प्राणवायु दी है। मैं अपनी ओर से प्रधानमंत्री मोदी, सरकार और भारत की जनता का आभार व्यक्त करता हूं।'
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21 जुलाई को शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति विक्रमसिंघे के नेतृत्व में श्रीलंका की संसद का यह पहला सत्र है। विक्रमसिंघे ने अपने संबोधन में श्रीलंका को आर्थिक संकट से निपटने में मदद के लिए एक सर्वदलीय सरकार के गठन को दोहराया।
संकट से निपटने के लिए संसद एकजुट हो
कोलंबो गजट ने राष्ट्रपति विक्रमसिंघे का पूरा भाषण प्रकाशित किया है। इसमें उन्होंने कहा कि श्रीलंका के मौजूदा संकट को दूर करने के लिए संसद को एकजुट होना चाहिए। कुछ राजनीतिक दलों ने पहले ही सर्वदलीय सरकार में शामिल होने के लिए रुचि व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय सरकार ऐसी सरकार नहीं होगी, जो एक पार्टी की एकमात्र राय पर कार्य करे। यह एक ऐसी सरकार होगी, जो एक सामान्य नीतिगत ढांचे के भीतर सभी दलों के विचारों को शामिल करते हुए निर्णय लेगी।
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि वे अगले 25 सालों के लिए एक राष्ट्रीय आर्थिक नीति तैयार कर रहे हैं। यह एक सामाजिक बाजार आधारित आर्थिक प्रणाली की नींव रखेगी और गरीब और वंचितों का विकास सुनिश्चित करेगी तथा छोटे और मध्यम उद्यमियों को प्रोत्साहित करेगी।
बता दें, 2022 की शुरुआत से ही श्रीलंका जबर्दस्त आर्थिक संकट से जूझ रहा है। सरकार विदेशी कर्ज चुकाने में विफल रही और डिफॉल्टर बन गई। इसे देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि 57 लाख लोगों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
भारत ने दी यह सहायता
श्रीलंका की संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था व आबादी को उबारने के लिए भारत ने हाल ही में 1850 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गत दिवस लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि भारत सरकार ने पिछले 10 वर्षों में रेलवे, बुनियादी ढांचे, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, पेट्रोलियम और उर्वरक सहित क्षेत्रों में श्रीलंका को आठ लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) प्रदान की है। इसके अलावा जनवरी 2022 में भारत ने सार्क वित्तीय तंत्र के तहत श्रीलंका को 40 करोड़ डॉलर की मुद्रा अदला-बदली की सुविधा दी और भारत ईंधन आयात के लिए 50 करोड़ रुपये की ऋण सहायता दी।