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आर्थिक संकट: श्रीलंका का एलान- नॉर्वे और इराक में दूतावास, ऑस्ट्रेलिया में वाणिज्य दूतावास होगा बंद
Tue, 05 Apr 2022 05:51 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 05 Apr 2022 05:51 PM IST
सार
आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका की हालत पस्त है और उसने दो देशों में अपना दूतावास और एक देश में वाणिज्य दूतावास को अस्थाई रूप से बंद करने का फैसला किया है।
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गोटाबाया राजपक्षे
- फोटो : twitter
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विस्तार
गहरे आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका को एक और बड़ा फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा है। श्रीलंका ने दो देशों नॉर्वे और इराक में अपने दूतावास और ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका ने यह फैसला लिया है। फिलहाल इन्हें अस्थाई रूप से बंद किया गया है।
मंत्रिमंडल ने दिया था सामूहिक इस्तीफा
बता दें कि श्रीलंका में हिंसा और राजनीतिक अटकलों के बीच मंत्रिमंडल ने तीन मार्च की देर रात सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने त्यागपत्र नहीं दिया था। इसके बाद श्रीलंका में जल्द ही सर्वदलीय सरकार बनने की संभावना जताई जा रही थी जिसमें विपक्ष के नेताओं को भी शामिल करने की बात कही गई थी। हालांकि, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की कोशिशें सिरे नहीं चढ़ पाई थी और विपक्षी नेताओं ने इसका हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया था।
राष्ट्रपति गोटबाया के खिलाफ लोगों का विरोध-प्रदर्शन
कोलंबो में जारी आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ लोगों का विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने सोमवार को श्रीलंका सरकार के खिलाफ इंडिपेंडेंस स्क्वायर पर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति राजपक्षे के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उधर, श्रीलंकाई संसद में नेता विपक्ष सजिथ प्रेमदासा ने बताया कि श्रीलंका के दो मुख्य विपक्षी दलों, एसजेबी और जेवीपी ने राष्ट्रपति के सर्वदलीय अंतरिम सरकार बनाने के अनुरोध को खारिज कर दिया। इनकी मांग थी कि राष्ट्रपति को इस्तीफा दे देना चाहिए।
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कर्फ्यू के बावजूद कोलंबो में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार देर रात एक विशेष गजट अधिसूचना जारी कर श्रीलंका में एक अप्रैल से तत्काल प्रभाव से आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी।
पुराना दोस्त भारत आया काम
श्रीलंका की बदहाल अर्थव्यवस्था के बीच उसका पुराना दोस्त भारत ही काम आया है। भारत ने श्रीलंका को न केवल डीजल और अन्य पेट्रो पदार्थों की मदद उपलब्ध कराई है, बल्कि चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी भेजी है। श्रीलंका को दो चरणों में एक अरब डॉलर और 1.5 अरब डॉलर की आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराई गई है। इससे श्रीलंका के जनसमुदाय के बीच भारत के प्रति समर्थन बढ़ा है। जबकि श्रीलंका में भारी निवेश करने वाले चीन के प्रति नाराजगी बढ़ी है।
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मंत्रिमंडल ने दिया था सामूहिक इस्तीफा
बता दें कि श्रीलंका में हिंसा और राजनीतिक अटकलों के बीच मंत्रिमंडल ने तीन मार्च की देर रात सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने त्यागपत्र नहीं दिया था। इसके बाद श्रीलंका में जल्द ही सर्वदलीय सरकार बनने की संभावना जताई जा रही थी जिसमें विपक्ष के नेताओं को भी शामिल करने की बात कही गई थी। हालांकि, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की कोशिशें सिरे नहीं चढ़ पाई थी और विपक्षी नेताओं ने इसका हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया था।
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राष्ट्रपति गोटबाया के खिलाफ लोगों का विरोध-प्रदर्शन
कोलंबो में जारी आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ लोगों का विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने सोमवार को श्रीलंका सरकार के खिलाफ इंडिपेंडेंस स्क्वायर पर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति राजपक्षे के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उधर, श्रीलंकाई संसद में नेता विपक्ष सजिथ प्रेमदासा ने बताया कि श्रीलंका के दो मुख्य विपक्षी दलों, एसजेबी और जेवीपी ने राष्ट्रपति के सर्वदलीय अंतरिम सरकार बनाने के अनुरोध को खारिज कर दिया। इनकी मांग थी कि राष्ट्रपति को इस्तीफा दे देना चाहिए।
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कर्फ्यू के बावजूद कोलंबो में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार देर रात एक विशेष गजट अधिसूचना जारी कर श्रीलंका में एक अप्रैल से तत्काल प्रभाव से आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी।
पुराना दोस्त भारत आया काम
श्रीलंका की बदहाल अर्थव्यवस्था के बीच उसका पुराना दोस्त भारत ही काम आया है। भारत ने श्रीलंका को न केवल डीजल और अन्य पेट्रो पदार्थों की मदद उपलब्ध कराई है, बल्कि चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी भेजी है। श्रीलंका को दो चरणों में एक अरब डॉलर और 1.5 अरब डॉलर की आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराई गई है। इससे श्रीलंका के जनसमुदाय के बीच भारत के प्रति समर्थन बढ़ा है। जबकि श्रीलंका में भारी निवेश करने वाले चीन के प्रति नाराजगी बढ़ी है।