श्रीलंका में आधी रात से इमरजेंसी लागू, हमले में मृतकों की संख्या 290
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ईस्टर पर हुए आत्मघाती हमलों के बाद गम और खौफ में डूबे श्रीलंका में अब भी खतरा कम नहीं हुआ है। हमले के अगले दिन सोमवार को कोलंबो पुलिस ने राजधानी के मुख्य बस स्टैंड से 87 बम डेटोनेटर बरामद किए। जबकि कोलंबो में ही एक चर्च के पास बम को डिफ्यूज करने के दौरान वैन में धमाका हो गया। हालांकि, इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। इतना ही नहीं, राजधानी में एयरपोर्ट के पास एक देसी बम भी बरामद हुआ, जिसे वायुसेना की टीम ने डिफ्यूज कर दिया। धमाकों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 290 हो गई, जिनमें चार और भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। आतंकी खतरों को देखते हुए श्रीलंका में सोमवार आधी रात से आपातकाल लागू कर दी गई।
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राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की बैठक में आपातकाल लागू करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों को और अधिक शक्तियां मिल गई हैं। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि आपातकाल लागू होने से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलेगी। हालांकि, सरकार का यह कहना है कि इसका अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही इसमेें किसी तरह की कटौती की गई है। इस बीच, सोमवार को भी पुलिस ने मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन से जुड़े 11 और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद यह संख्या बढ़कर 24 हो गई।
धमाकों में जनता दल एस के 6 नेताओं की भी मौत, एक लापता
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बताया कि श्रीलंका धमाकों में उनकी पार्टी जेडीएस के छह कार्यकर्ताओं की भी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि कोलंबो समेत तीन शहरों में हुए आतंकी हमलों के बाद से जेडीएस के सात कार्यकर्ता लापता थे, जिनमें छह की मौत की पुष्टि हुई है। इनकी पहचान लक्ष्मण गौड़ा रमेश, केएम लक्ष्मी नारायणन, एम रंगप्पा, केजी हनुमनथरप्पा, नारायण चंद्रशेखर और शिवकुमार के रूप में हुई है।