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श्रीलंका ने कहा- 'इंडिया फर्स्ट' नीति पर करेंगे काम, चीन को हंबनटोटा बंदरगाह देना बड़ी गलती थी
Wed, 26 Aug 2020 06:11 PM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 26 Aug 2020 06:11 PM IST
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पीएम मोदी और गोटबाया राजपक्षे
- फोटो : Social Media
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श्रीलंका ने भारत के साथ अपने रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ करने पर जोर दिया है। श्रीलंका के विदेश सचिव जयनाथ कोलंबेज ने कहा है कि श्रीलंका एक तटस्थ विदेश नीति को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन रणनीतिक और सुरक्षा मामलों में 'इंडिया फर्स्ट' दृष्टिकोण को बनाए रखेगा।
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श्रीलंकाई टीवी चैनल से बात करते हुए, कोलंबेज ने कहा, राष्ट्रपति (गोटबाया राजपक्षे) ने कहा है कि रणनीतिक सुरक्षा के संदर्भ में, हम 'इंडिया फर्स्ट' नीति का पालन करेंगे। हम भारत के लिए एक रणनीतिक सुरक्षा खतरा नहीं बन सकते हैं और हमें होना भी नहीं चाहिए।
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उन्होंने कहा, हमें भारत से लाभान्वित होने की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आप हमारी पहली प्राथमिकता हैं जहां तक सुरक्षा का सवाल है लेकिन मुझे आर्थिक समृद्धि के लिए अन्य देशों के साथ बेहतर रिश्ते बनाने होंगे।
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कोलंबेज ने कहा, तटस्थ विदेश नीति को आगे बढ़ाने के साथ, श्रीलंका भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा करेगा। श्रीलंकाई विदेश सचिव ने अपने बयान में कहा, चीन को 99 साल की लीज पर हंबनटोटा बंदरगाह देने का फैसला एक गलती थी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में अपने समकक्ष दिनेश गुणवर्द्धन के साथ मुलाकात की। वह राजपक्षे की टीम के सत्ता में आने के बाद श्रीलंका पहुंचे। राजपक्षे सरकार के इतिहास को देखते हुए इसे भारत की तुलना में चीन के अधिक करीब देखा गया है, जिस कारण भारत और श्रीलंका के रिश्ते प्रभावित हुए हैं।
भारत श्रीलंका के साथ जिस मुद्दे को सुलझाना चाहेगा, उसमें ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल का मुद्दा शामिल है, जहां स्थानीय लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि अपनी निजी बातचीत में, श्रीलंका ने भारत को अपने हितों की रक्षा करने का आश्वासन दिया है, लेकिन इसे औपचारिक रूप देना होगा।