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HRCSL: श्रीलंका मानवाधिकार संस्था ने रोहिंग्याओं से मिलने से मना करने पर जताई नाराजगी, राष्ट्रपति को लिखा पत्र
Sun, 29 Dec 2024 04:15 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 29 Dec 2024 04:15 PM IST
सार
श्रीलंकाई मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को पत्र लिखकर शिकायत की है कि उन्हें रोहिंग्या शरणार्थियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। जानकारी के मुताबिक ये शरणार्थी एक सैन्य शिविर में रहे हैं।
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अनुरा कुमारा दिसानायके, श्रीलंका के राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीएसएल) ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने शिकायत की है कि उन्हें पिछले हफ्ते से एक सैन्य शिविर में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। मानवाधिकार के पत्र के अनुसार, 26 दिसंबर को मानवाधिकार आयोग के एक निदेशक समेत अधिकारियों की एक टीम ने उत्तरी प्रांत के मुल्लैतिवु में मौजूद श्रीलंका वायु सेना शिविर में इन शरणार्थियों की हिरासत की स्थिति की जांच करने की कोशिश की। लेकिन उन्हें इन शरणार्थियों से मिलने की इजाजत नहीं दी गई।
20 दिसंबर को समंदर से बचाए गए थे 100 रोहिंग्या
20 दिसंबर को, श्रीलंकाई नौसेना ने कहा था कि उन्होंने देश के पूर्वोत्तर तट के पास समुद्र में संकटग्रस्त स्थिति में मिले 100 से अधिक रोहिंग्याओं को बचाया था। इन्हें मुल्लैतिवु जिले के वेल्लमुल्लिवैक्कल क्षेत्र में स्थानीय मछुआरों ने देखा था। बाद में सरकार ने कहा कि इनकी उपस्थिति मानव तस्करी रैकेट का हिस्सा हो सकती है।
देश में रखे गए किसी भी व्यक्ति पर हमारी शक्तियां लागू- आयोग
वहीं विदेश मामलों के उप मंत्री अरुण हेमाचंद्र ने एक समाचार पत्र को बताया, 'जांच में पता चला है कि ये जानबूझकर यहां उतरे हैं और हम इन्हें अवैध प्रवासी मानते हैं।' जबकि मानवाधिकार आयोग के पत्र में कहा गया है कि आयोग की शक्तियां केवल श्रीलंका के नागरिकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के भीतर हिरासत में रखे गए 'किसी भी व्यक्ति' तक बढ़ती हैं।
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मामले में आयोग ने जिम्मेदार अधिकारियों को किया तलब
आयोग ने आगे कहा कि उसे कानूनी अधिकार है कि वह संबंधित वायु सेना शिविर का दौरा करे और वहां मौजूद सभी शरणार्थियों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, की हिरासत की स्थिति की जांच करे। एचआरसीएसएल ने 31 दिसंबर को आव्रजन और उत्प्रवास के नियंत्रक जनरल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को तलब किया है, जिन्होंने आयोग को अपनी जांच करने से रोका था। इन अधिकारियों को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया है।
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20 दिसंबर को समंदर से बचाए गए थे 100 रोहिंग्या
20 दिसंबर को, श्रीलंकाई नौसेना ने कहा था कि उन्होंने देश के पूर्वोत्तर तट के पास समुद्र में संकटग्रस्त स्थिति में मिले 100 से अधिक रोहिंग्याओं को बचाया था। इन्हें मुल्लैतिवु जिले के वेल्लमुल्लिवैक्कल क्षेत्र में स्थानीय मछुआरों ने देखा था। बाद में सरकार ने कहा कि इनकी उपस्थिति मानव तस्करी रैकेट का हिस्सा हो सकती है।
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देश में रखे गए किसी भी व्यक्ति पर हमारी शक्तियां लागू- आयोग
वहीं विदेश मामलों के उप मंत्री अरुण हेमाचंद्र ने एक समाचार पत्र को बताया, 'जांच में पता चला है कि ये जानबूझकर यहां उतरे हैं और हम इन्हें अवैध प्रवासी मानते हैं।' जबकि मानवाधिकार आयोग के पत्र में कहा गया है कि आयोग की शक्तियां केवल श्रीलंका के नागरिकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के भीतर हिरासत में रखे गए 'किसी भी व्यक्ति' तक बढ़ती हैं।
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मामले में आयोग ने जिम्मेदार अधिकारियों को किया तलब
आयोग ने आगे कहा कि उसे कानूनी अधिकार है कि वह संबंधित वायु सेना शिविर का दौरा करे और वहां मौजूद सभी शरणार्थियों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, की हिरासत की स्थिति की जांच करे। एचआरसीएसएल ने 31 दिसंबर को आव्रजन और उत्प्रवास के नियंत्रक जनरल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को तलब किया है, जिन्होंने आयोग को अपनी जांच करने से रोका था। इन अधिकारियों को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया है।