आपातकाल की समयावधि बढ़ाकर श्रीलंका ने दुनिया को चौंकाया
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श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने शनिवार को आपातकाल की समयावधि बढ़ाकर देश और दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा को देखते हुए ऐसा कदम उठाया है। उनके इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह बताई जा रही है। मैत्रीपाला सिरिसेना के मुताबिक आपातकाल की इस अवधि को बढ़ाने के पीछे उनका मुख्य मकसद सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों को लागू करना है। आपको बता दें कि श्रीलंका में ईस्टर रविवार को हुए धमाकों के बाद सुरक्षा कारणों के चलते आपातकाल घोषित किया गया था। इन धमाकों में 258 लोगों की जान चली गई थी।
अप्रैल में ईस्टर रविवार को तीन गिरजाघरों और तीन होटलों में हुए सिलसिलेवार धमकों से श्रीलंका दहल उठा था। इस घटना ने पूरे विश्व को अपनी ओर आकर्षित किया था। धमाकों में 258 लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में 10 महिलाओं सहित 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। इसके बाद देश की सुरक्षा और हमले के बाद बने हालतों पर काबू पाने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी। मई के अंत में सिरिसेना ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, अमेरिका और यूरोपीय राज्यों के राजनायिकों को बताया था कि सुरक्षा स्थिति ‘‘99 प्रतिशत सामान्य हो गई है’’ और वह 22 जून तक आपातकाल हटा लेंगे। लेकिन शनिवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा को लेकर अपने फैसले से सबको चौंका दिया। उन्होंने देश में आपातकाल की अवधि खत्म करने के बजाय बढ़ा दिया है।
उनके इस फैसले के पीछे आतंकवादियों और संदिग्धों पर कार्रवाई जारी रखने की वजह मानी जा रही है। क्योंकि पुलिस और सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार देने वाला यह कानून शनिवार को समाप्त होने वाला था। अपने फैसले को सुनाते हुए मैत्रीपाला सिरिसेना ने कहा कि उनका मानना है कि देश में ‘‘सार्वजनिक आपातकाल’’ था और वह आपातकाल की स्थिति को बढ़ाते हुए सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों को लागू कर रहे हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति के इस फैसले पर कोई सरकारी बयान जारी नहीं हुआ है। देश की राजधानी में सुरक्षा पहले जैसी ही बनी हुई है। आपातकाल की अवधि एक महीने ही हो सकती है, इसके लिए भी दस दिनों के अंदर ही संसद को इस पर अपनी मुहर लगानी होती है।