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Sri Lanka Crisis: नाबालिग बेटियों की शादी करने पर मजबूर हैं मुसीबत के मारे परिवार, जानें क्या है मामला

Sat, 22 Oct 2022 03:15 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 22 Oct 2022 03:15 PM IST
सार

सर्वे रिपोर्ट को ‘श्रीलंका की जटिल आपात जरूरतों की मूल्यांकन रिपोर्ट’ के नाम से प्रकाशित किया गया है। सर्वे में शामिल रिसर्च ग्रुप के सदस्य सिनहा विक्रमसेकरा ने बुधवार को बताया कि सर्वे में 11 जिलों के 2,871 परिवारों की राय ली गई। सर्वे के दौरान कई स्थलों पर जागरूक लोगों के साथ चर्चा का आयोजन भी किया गया।

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Sri Lanka Crisis updates families are forced to marry minor daughters due to trouble know what is the matter
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : ANI

विस्तार

श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के गंभीर सामाजिक नतीजे देखने को मिल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में परिवार का खर्च जुटाने में बढ़ती दिक्कतों के बीच गरीब लोग अपनी नाबालिग बेटियों का विवाह करने के बारे में सोचने लगे हैं। यह बात श्रीलंका रेड क्रॉस सोसायटी और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस के एक साझा सर्वे से सामने आई है। समाजशास्त्रियों का कहना है कि अगर इस ट्रेंड को नहीं संभाला गया, तो श्रीलंका को इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम झेलने होंगे।

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रेड क्रॉस की श्रीलंका और इंटरनेशनल शाखाओं ने अपनी रिपोर्ट में गांवों में लोगों की बन रही मनोदशा की तस्वीर पेश की है। सर्वे के दौरान लोगों से पूछा गया था कि अगर आर्थिक हालात नहीं सुधरे, तो क्या वे अगले तीन से छह महीनों में अपनी नाबालिग बेटियों की शादी करने के बारे में सोचेंगे? इस सवाल पर 51 फीसदी परिवारों ने कहा कि उनकी पास तब यही रास्ता बचेगा। श्रीलंका में लड़कियों की विवाह योग्य न्यूनतम उम्र 18 वर्ष मानी जाती है।
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सर्वे रिपोर्ट को ‘श्रीलंका की जटिल आपात जरूरतों की मूल्यांकन रिपोर्ट’ के नाम से प्रकाशित किया गया है। सर्वे में शामिल रिसर्च ग्रुप के सदस्य सिनहा विक्रमसेकरा ने बुधवार को बताया कि सर्वे में 11 जिलों के 2,871 परिवारों की राय ली गई। सर्वे के दौरान कई स्थलों पर जागरूक लोगों के साथ चर्चा का आयोजन भी किया गया।
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श्रीलंका में महीनों से चल रहे आर्थिक संकट से राहत पाने की अभी भी कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। देश की मुद्रा का मूल्य कई महीने पहले पाताल तक गिर गया था। उसमें कोई सुधार नहीं हुआ है। इस कारण महंगाई की दर 70 फीसदी तक बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक श्रीलंका नोटों की छपाई कर काम चला रही है, जिस वजह से मुद्रा का मूल्य गिरता चला गया है।

इस वर्ष के आरंभ में श्रीलंकाई रुपये का मूल्य प्रति अमेरिकी डॉलर 200 था। अब एक डॉलर 363 रुपये से भी अधिक का हो चुका है। श्रीलंका सरकार ने इस वर्ष अप्रैल में अपने को डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) घोषित कर दिया था। तब से संकट और गहराया हुआ है।

रेड क्रॉस के सर्वे से यह भी सामने आया है कि 50 फीसदी परिवारों ने महंगाई के कारण अपने भोजन में मांस और मछली की मात्रा घटा दी है। 11 फीसदी परिवारों को पूरी तरह से मांस-मछली या दूध से बने उत्पादों को छोड़ना पड़ा है। लोगों ने इलाज के खर्च में भी कटौती की है। सर्वे के दौरान 58 फीसदी परिवारों ने बताया कि जनवरी 2022 के बाद से घर के लोगों की सेहत बिगड़ी है। 30 प्रतिशत परिवारों को बीते तीन महीनों में पैसा ना होने के कारण इलाज कराने में दिक्कत आई।  


विक्रमसेकरा ने बताया कि हमने सर्वे के दौरान पाया कि दवाओं की कीमतें आसमान पर हैं। परिवहन भी बेहद महंगा हो चुका है। लोगों को परिवहन का खर्च तो उठाना ही पड़ता है। लेकिन वे दवाओं में कटौती कर रहे हैं, जबकि अस्पतालों में भी उन्हें मुफ्त दवा नहीं मिल पा रही है।

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