Sri Lanka Crisis: श्रीलंका पर मंडरा रहा है लंबी राजनीतिक अस्थिरता का खतरा, कारोबार जगत में चिंता
श्रीलंका के राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाया गया है कि विपक्षी समगी जना बुलावेगया (एसजेवी) के नेता सजित प्रेमदासा को नया राष्ट्रपति चुना जाएगा। लेकिन राजनीतिक हलकों और जन संगठनों के दायरे में यह मांग भी तेज है कि किसी गैर-राजनीतिक व्यक्ति को यह पद दिया जाए, ताकि देश में आगे के रास्ते को लेकर आम सहमति बन सके...
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जिस समय श्रीलंका के राजनेता नई अंतरिम व्यवस्था बनाने में जुटे हुए हैं, कारोबारी और अर्थशास्त्री देश में अस्थिरता के लंबा खिंचने की आशंका से घिरे हुए हैं। राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के पद छोड़ देने के एलान करने के बाद श्रीलंका की संसद ने नई सरकार बनाने का एक रोडमैप बनाया है। इसके तहत संसद 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव करेगी। पद के दावेदार नेता 19 जुलाई तक अपनी उम्मीदवारी का पर्चा भर सकेंगे।
श्रीलंका के राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाया गया है कि विपक्षी समगी जना बुलावेगया (एसजेवी) के नेता सजित प्रेमदासा को नया राष्ट्रपति चुना जाएगा। लेकिन राजनीतिक हलकों और जन संगठनों के दायरे में यह मांग भी तेज है कि किसी गैर-राजनीतिक व्यक्ति को यह पद दिया जाए, ताकि देश में आगे के रास्ते को लेकर आम सहमति बन सके।
गैर-राजनीतिक व्यक्ति को राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बनाने पर सहमत नहीं विपक्ष
मुख्य विपक्षी दल आम सहमति के गैर-राजनीतिक व्यक्ति को राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बनाने की मांग से सहमत नहीं है। बल्कि पार्टी ने साफ कहा है कि वह सरकार बनाने की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं। पार्टी के नेता प्रेमदासा ने एक वीडियो मैसेज में कहा- ‘हम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक सरकार नियुक्त करेंगे। अगर कोई भी इसका विरोध करता है या संसद में रुकावट पैदा करता है, हम उसे देशद्रोही घटना मानेंगे।’
जानकारों का कहना है कि एसजेबी का यह रुख एक नए राजनीतिक तनाव को जन्म दे सकता है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि सजित प्रेमदासा नौ जुलाई को सरकार विरोधी प्रदर्शन में भाग लेने गए थे। लेकिन तब प्रदर्शनकारियों ने धक्का-मुक्की करके उन्हें वहां से भगा दिया। इसका यह मतलब समझा गया कि देश में भड़का जनविरोध सिर्फ सरकार के प्रति नहीं, बल्कि प्रमुख विपक्षी दल के प्रति भी है।
टीकाकारों की राय में श्रीलंका में महीनों से चल रहे आर्थिक संकट के दौरान विपक्ष भी जनता को नेतृत्व दे पाने में नाकाम रहा है। उसने ऐसी कोई नीति या कार्यक्रम सामने नहीं रखा है, जिसे संकट वैकल्पिक समाधान माना जाए।
आम चुनावों का करें एलान
पर्यवेक्षकों की राय में सियासी सूरत अभी बहुत अनिश्चित और अस्थिर है। इसलिए अभी जताई जा रही कोई भी संभावना सिर्फ कयास है। यही स्थिति श्रीलंका के कारोबार जगत में चिंता की वजह बनी हुई है। सोमवार को श्रीलंका के बिजनेस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने देश में शांतिपूर्ण और शीघ्र सत्ता हस्तांतरण की अपील की। उन्होंने ध्यान दिलाया कि श्रीलंका इस वक्त अपने इतिहास के सबसे गहरे आर्थिक संकट में है। देश में ईंधन, बिजली और दवाओं की भारी कमी है।
व्यापार जगत के इन संगठनों ने कहा कि नई सरकार का गठन जल्द से जल्द होना चाहिए और नई सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बताए रास्ते पर चलते हुए जरूरी आर्थिक सुधार लागू करना चाहिए। चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने अपने साझा बयान में यह मांग भी की है कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल को उसके गठन के साथ ही तय किया जाना चाहिए। देश को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि अगले आम चुनाव कब होंगे। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि अगले आम चुनाव का समय अभी घोषित कर दिया जाए।