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श्रीलंका संकट: दवाओं की कमी से बन रहे हैं मेडिकल इमरजेंसी के हालात, विदेशी मुद्रा की कमी की इसकी बड़ी वजह
Thu, 14 Apr 2022 11:13 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 14 Apr 2022 11:13 PM IST
सार
श्रीलंका में खाद्य पदार्थों, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजों की कमी की खबरें इस समय दुनिया भर के मीडिया में छाई हुई हैं। इस बीच दवाओं की कमी की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है।
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श्रीलंका संकट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
श्रीलंका का आर्थिक संकट अब जानलेवा बनने के मुकाम पर पहुंच गया है। अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी हो गई है। अस्पतालों के मुताबिक उन्हें उन उपकरणों की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिनकी आपातकालीन इलाज में जरूरत पड़ती है। इस अभाव का सीधा कारण देश में विदेशी मुद्रा की कमी है। इस कारण दवाओं और जरूरी उपकरणों का आयात नहीं पा रहा है।
श्रीलंका सरकार ने मंगलवार को कर्ज डिफॉल्ट करने का फैसला किया। यानी उसने एलान कर दिया कि वह तय समयसीमा के अंदर कर्ज और ब्याज को नहीं चुका पाएगी। जानकारों का कहना है कि इस फैसले के बाद श्रीलंका के लिए विदेशी मुद्रा हासिल करना और कठिन हो जाएगा। टीवी चैनल अल-जजीरा के मुताबिक अब श्रीलंका सरकार ने अपनी सारी उम्मीदें चीन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पर टिका दी हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि अब आईएमएफ बेहत सख्त शर्तों पर ही कर्ज देने को राजी होगा।
श्रीलंका में खाद्य पदार्थों, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजों की कमी की खबरें इस समय दुनिया भर के मीडिया में छाई हुई हैं। इस बीच दवाओं की कमी की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। कोलंबो में एक बेहद नाराज दिख रहे डॉक्टर ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि हमने तीन महीने पहले दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के अभाव के बारे में सरकार को चेतावनी दी थी। लेकिन उनकी तरफ से यही कहा जाता रहा कि आयात करने के लिए डॉलर उपलब्ध नहीं है। ये सरकार स्वास्थ्य का बुनियादी अधिकार सुनिश्चित करने में नाकाम रही है।
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खबरों के मुताबिक इस अभाव का असर सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों पर पड़ा है। जिन दवाओं की सबसे ज्यादा कमी हो गई है, उनमें हृदय रोग की दवाएं भी हैं। ब्लड क्लॉट्स को डिसॉल्व करने के लिए दी जानी दवा टेनेक्टाप्लेज आज शायद ही किसी अस्पताल में उपलब्ध है। यही हाल हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं का भी है। डायबिटीज के इंजेक्शन इंसुलीन और मिर्गी के इलाज के लिए दी जाने वाली दवा सोडियम वालप्रोएट की भी भारी कमी हो चुकी है। एंटी-बायोटिक दवाएं भी कम मात्रा में उपलब्ध हैं।
वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक दवाओं के अभाव के कारण कई अस्पतालों ने सर्जरी रोक दी है। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि अगर दवाओं की कमी जारी रही, तो श्रीलंका को मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ सकता है।
श्रीलंका मेडिकल एसोसिएशन ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे को एक पत्र लिखा था। उसमें दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की पैदा हो रही कमी को लेकर उन्हें आगाह किया गया था। इस पत्र में कहा गया था कि इस अभाव के कारण पैदा होने वाले आपातकाल से 2004 में आई सुनामी और कोविड-19 महामारी जैसी तबाही हो सकती है। सूनामी के कारण तब 30 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। कोविड-19 से 16 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
डॉक्टर इस बात से खासे नाराज हैं कि राजपक्षे सरकार लोगों की सेहत के तकाजों की लगातार उपेक्षा कर रही है। उसके नजरिए की आलोचना करते हुए आलोचकों ने ध्यान दिलाया है कि इस समय देश में स्वास्थ्य मंत्री का पद खाली है।
कोलंबो में विरोध प्रदर्शन जारी
आर्थिक संकट के बीच राजधानी कोलंबो में लोगों का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। लोग श्रीलंका के राष्ट्रपति सचिवालय के बाहर राजधानी कोलंबो के मुख्य समुद्र तट गॉल फेस पर एकत्र हुए और देश में आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और पीएम महिंदा राजपक्षे के खिलाफ नारेबाजी की।
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श्रीलंका सरकार ने मंगलवार को कर्ज डिफॉल्ट करने का फैसला किया। यानी उसने एलान कर दिया कि वह तय समयसीमा के अंदर कर्ज और ब्याज को नहीं चुका पाएगी। जानकारों का कहना है कि इस फैसले के बाद श्रीलंका के लिए विदेशी मुद्रा हासिल करना और कठिन हो जाएगा। टीवी चैनल अल-जजीरा के मुताबिक अब श्रीलंका सरकार ने अपनी सारी उम्मीदें चीन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पर टिका दी हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि अब आईएमएफ बेहत सख्त शर्तों पर ही कर्ज देने को राजी होगा।
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श्रीलंका में खाद्य पदार्थों, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजों की कमी की खबरें इस समय दुनिया भर के मीडिया में छाई हुई हैं। इस बीच दवाओं की कमी की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। कोलंबो में एक बेहद नाराज दिख रहे डॉक्टर ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि हमने तीन महीने पहले दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के अभाव के बारे में सरकार को चेतावनी दी थी। लेकिन उनकी तरफ से यही कहा जाता रहा कि आयात करने के लिए डॉलर उपलब्ध नहीं है। ये सरकार स्वास्थ्य का बुनियादी अधिकार सुनिश्चित करने में नाकाम रही है।
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खबरों के मुताबिक इस अभाव का असर सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों पर पड़ा है। जिन दवाओं की सबसे ज्यादा कमी हो गई है, उनमें हृदय रोग की दवाएं भी हैं। ब्लड क्लॉट्स को डिसॉल्व करने के लिए दी जानी दवा टेनेक्टाप्लेज आज शायद ही किसी अस्पताल में उपलब्ध है। यही हाल हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं का भी है। डायबिटीज के इंजेक्शन इंसुलीन और मिर्गी के इलाज के लिए दी जाने वाली दवा सोडियम वालप्रोएट की भी भारी कमी हो चुकी है। एंटी-बायोटिक दवाएं भी कम मात्रा में उपलब्ध हैं।
वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक दवाओं के अभाव के कारण कई अस्पतालों ने सर्जरी रोक दी है। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि अगर दवाओं की कमी जारी रही, तो श्रीलंका को मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ सकता है।
श्रीलंका मेडिकल एसोसिएशन ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे को एक पत्र लिखा था। उसमें दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की पैदा हो रही कमी को लेकर उन्हें आगाह किया गया था। इस पत्र में कहा गया था कि इस अभाव के कारण पैदा होने वाले आपातकाल से 2004 में आई सुनामी और कोविड-19 महामारी जैसी तबाही हो सकती है। सूनामी के कारण तब 30 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। कोविड-19 से 16 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
डॉक्टर इस बात से खासे नाराज हैं कि राजपक्षे सरकार लोगों की सेहत के तकाजों की लगातार उपेक्षा कर रही है। उसके नजरिए की आलोचना करते हुए आलोचकों ने ध्यान दिलाया है कि इस समय देश में स्वास्थ्य मंत्री का पद खाली है।
कोलंबो में विरोध प्रदर्शन जारी
आर्थिक संकट के बीच राजधानी कोलंबो में लोगों का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। लोग श्रीलंका के राष्ट्रपति सचिवालय के बाहर राजधानी कोलंबो के मुख्य समुद्र तट गॉल फेस पर एकत्र हुए और देश में आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और पीएम महिंदा राजपक्षे के खिलाफ नारेबाजी की।
#WATCH | People gathered at Galle Face, the main beachfront in capital Colombo, outside Sri Lankan President’s secretariat and raised slogans against President Gotabaya Rajapaksa & PM Mahinda Rajapaksa amid the economic crisis in the country pic.twitter.com/rACWQLsQiu
— ANI (@ANI) April 15, 2022