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Sri Lanka: पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद विक्रमसिंघे का बड़ा बयान, बोले- हम वन चाइना पॉलिसी के लिए प्रतिबद्ध

Thu, 04 Aug 2022 04:51 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 04 Aug 2022 04:51 PM IST
सार

राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को एक ट्वीट में कहा कि 'वन चाइना पॉलिसी के साथ-साथ राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के संयुक्त राष्ट्र चार्टर सिद्धांतों के लिए श्रीलंका दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।' बुधवार को श्रीलंका में चीन के राजदूत महामहिम क्यूई जेनहोंग के साथ एक बैठक के बाद उनका ये ट्वीट आया है।

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Sri Lanka crisis live update President Wickremesinghe says Sri Lanka committed to one-China policy
विक्रमसिंघे

विस्तार

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को वन चाइना पॉलिसी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए अपना बयान दिया। बीजिंग के जोरदार विरोध के बावजूद अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के एक दिन बाद गुरुवार को उन्होंने कहा कि श्रीलंका वन चाइना पॉलिसी के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।

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श्रीलंका वन चाइना पॉलिसी के प्रति प्रतिबद्ध
राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को एक ट्वीट में कहा कि 'वन चाइना पॉलिसी के साथ-साथ राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के संयुक्त राष्ट्र चार्टर सिद्धांतों के लिए श्रीलंका दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।' उन्होंने बुधवार को श्रीलंका में चीन के राजदूत महामहिम क्यूई जेनहोंग के साथ एक बैठक की। जिसमें विक्रमसिंघे ने कहा कि देशों को उकसावे से बचना चाहिए जो मौजूदा वैश्विक तनाव को और बढ़ाते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि श्रीलंका वन चाइना पॉलिसी के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि आपसी सम्मान और देशों के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप शांतिपूर्ण सहयोग और गैर-टकराव के लिए महत्वपूर्ण नींव है। 
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गौरतलब है कि अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी मंगलवार देर रात ताइवान पहुंची थीं। चीन ने उनकी इस यात्रा के लिए अमेरिका को पहले ही चेतावनी दी थी कि उसे इसके लिए गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। वहीं, पेलोसी के पहुंचते ही चीन आगबबूला हो गया और ताइवान पर कई प्रतिबंध लगा दिए। इतना ही नहीं चीनी सेना ने  21 सैन्य विमानों से ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में उड़ान भरकर अपनी ताकत दिखाई।
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चीन-ताइवान के बीच विवाद क्या है?
ताइवान दक्षिण पूर्वी चीन के तट से करीब 100 मील दूर स्थिति एक द्वीप है। ताइवान खुद को संप्रभु राष्ट्र मानता है। उसका अपना संविधान है। ताइवान में लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार है। वहीं चीन की कम्युनिस्ट सरकार ताइवान को अपने देश का हिस्सा बताती है। चीन इस द्वीप को फिर से अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान और चीन के पुन: एकीकरण की जोरदार वकालत करते हैं। ऐतिहासिक रूप से से देखें तो ताइवान कभी चीन का ही हिस्सा था।

आर्थिक संकटों का सामना कर रहा है श्रीलंका
गौरतलब है कि श्रीलंका 1948 के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। जिसके कारण वहां ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई है। वहां की जनता सरकार का लगातार विरोध कर रही है। कुछ समय पहले आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा कर लिया था। जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश से भागना भी पड़ा था। वहीं, जनता अभी भी विरोध प्रदर्शन कर रही है। 

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के आदेश को किया मानने से इनकार
श्रीलंका के राष्ट्रपति कार्यालय के पास गाले फेस विरोध स्थल पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने गुरुवार को पुलिस के आदेश की अवहेलना की है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुलिस को गाले फेस इलाके से उन्हें हटाने के लिए अदालत का आदेश नहीं मिला है, जो पिछले राजपक्षे शासन के खिलाफ यहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस क्षेत्र को पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की पिछली सरकार द्वारा एक आंदोलन स्थल के रूप में नामित किया गया था इसलिए धरना स्थल छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।

गौरतलब है कि श्रीलंकाई पुलिस ने बुधवार को प्रदर्शनकारियों के लिए राष्ट्रपति कार्यालय के पास गाले फेस में सभी अवैध तंबू और शिविरों को हटाने के लिए कहा था। पुलिस ने इसके लिए पांच अगस्त तक का समय दिया है। 

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