कोर्ट का फैसला: स्पर्म डोनर को बच्चे का भविष्य तय करने का अधिकार, कानूनी तौर पर वही असली पिता
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बच्ची की मां अपनी समलैंगिक जीवनसाथी के साथ देश छोड़कर जाना चाहती थी। स्पर्म डोनेट किए जाने के बाद उसे वह बच्ची हुई थी। बच्ची को विदेश ले जाने का मां का फैसला, उस व्यक्ति को ठीक नहीं लगा, जिसने अपना स्पर्म डोनेट किया था। वह कोर्ट की शरण में गया, लेकिन निचली अदालत से उसे निराशा हाथ लगी। आखिरकार वह हाईकोर्ट गया, जहां अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया।
यह वाकया ऑस्ट्रेलिया का है, जहां हाईकोर्ट ने स्पर्म डोनेट करने वाले शख्स को बच्चे का कानूनी तौर पर असली पिता करार दिया। स्पर्म डोनर ने 2006 में अपनी दोस्त को स्पर्म डोनेट किए थे। हाइकोर्ट के इस फैसले के अनुसार, स्पर्म डोनर को बच्चे का भविष्य तय करने के लिए सारे जरुरी अधिकार होंगे। हालांकि, यह बात स्पष्ट नहीं हो सकी है कि क्या इस फैसले को भविष्य में ऐसे ही अन्य मामलों के लिए आधार माना जाएगा।
खबरों के अनुसार, इस मामले में विवाद तब पैदा हुआ, जब साल 2015 में बच्ची की मां अपनी समलैंगिक पार्टनर के साथ न्यूजीलैंड जाना चाहती थी। मां के इस फैसले के खिलाफ स्पर्म डोनर ने कोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन उसे निराशा हाथ लगी। लंबी सुनवाई चली। उसके बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्ची पर अधिकार केवल उसकी मां का है। रॉबर्ट ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। बुधवार को हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया।
हाइकोर्ट की जज ने आखिर क्या कहा?
हाइकोर्ट की जज मारग्रेट क्लेरी ने निचली अदालत के फैसले को सरासर गलत बताते हुए कहा कि बच्ची के बर्थ सर्टिफिकेट पर स्पर्म डोनर का नाम है और उन दोनों का संबंध बेहद आत्मीय है। बेशक वह बच्ची के साथ नहीं रहता, लेकिन बच्ची का सारा खर्च उठा रहा है, इसलिए उसे ही असली पिता माना जाएगा।
जज ने यह भी कहा कि स्पर्म डोनर को बच्ची का भविष्य तय करने का अधिकार है। उसे बच्ची से मिलने में परेशानी न हो, इसलिए मां को बच्ची के साथ ऑस्ट्रेलिया में ही रहना होगा।