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घटती आबादी से परेशान द. कोरिया, नए नागरिकता नियम से चीन विरोधी भावनाएं भड़कीं

Thu, 17 Jun 2021 04:22 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 17 Jun 2021 04:22 PM IST
सार

दक्षिण कोरिया में साल 2000 तक विदेशियों के लिए नागरिकता पाना लगभग असंभव था। तब तक सिर्फ 33 विदेशी दक्षिण कोरिया की नागरिकता हासिल करने में कामयाब हुए थे। लेकिन उसके बाद इस मामले में नरमी बरती गई, जिससे पिछले 20 साल में 14 हजार से ज्यादा विदेशियों को इस देश की नागरिकता मिली है...

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South Korea recently changed the citizenship rules to increase its population
दक्षिण कोरिया - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दक्षिण कोरिया ने पिछले दिनों अपनी आबादी बढ़ाने के लिए नागरिकता संबंधी नियम में बदलाव किया। उसने इसके लिए जारी अधिसूचना में विदेशी निवासियों को भी नागरिकता देने का प्रावधान किया। लेकिन इससे देश में चीन विरोधी भावनाएं भड़क उठी हैं। इस योजना के खिलाफ चलाए गए अभियान के क्रम में तीन लाख से ज्यादा लोग एक ऑनलाइन याचिका पर दस्तखत कर चुके हैँ।

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नियम बदलने का प्रस्ताव दक्षिण कोरिया के न्याय मंत्रालय ने अप्रैल में पेश किया था। इसमें कहा गया था कि जो विदेशी दक्षिण कोरियाई लंबे समय से में हैं, उनकी संतानों को दक्षिण कोरिया की नागरिकता दी जाएगी। अब इस मामले में भड़के विरोध को देखते हुए मंत्रालय ने कहा है कि जनमत पर गौर करते हुए उसने विशेषज्ञों की राय लेने का फैसला किया है। उनकी राय आने के बाद ही इस मामले में विधेयक का मसविदा तैयार किया जाएगा।
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देश के जाने-माने वकील जांग युन-मी ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘भड़के विरोध को देखते हुए इस प्रस्ताव पर सरकार का रुख धीमा पड़ गया है।’ विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण कोरिया घटती आबादी की समस्या से परेशान है। देश में जन्म दर में लगातार गिरावट आई है। उधर ज्यादातर आबादी अब बुजुर्ग होने की तरफ है। ऐसे में देश में आबादी बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन इस मामले में भड़की भावनाओं से साफ हुआ है कि इस दिशा में कोई कदम उठाना बहुत बड़ी चुनौती है।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नियम में बदलाव से कुल 3,930 लोग दक्षिण कोरिया की नागरिकता पाने के हकदार हो गए थे। उनमें 3,725 चीनी मूल के थे। इससे दक्षिण कोरिया की आबादी के एक बड़े हिस्से में डर फैल गया कि नागरिकता के नियम बदलने का मतलब होगा दक्षिण कोरिया पर चीनी लोगों का वर्चस्व बन जाना। देश के एक बड़े तबके में चीन विरोधी भावनाएं पहले से मौजूद रही हैं। हाल में जब चीन के सोशल मीडिया पर ये दावा किया गया था कि दक्षिण कोरियाई खाद्य और पहनावे के कई पहलू चीनी मूल के हैं, तो उस पर दक्षिण कोरिया के भीतर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी।

दक्षिण कोरिया में रहने वाले चीनी मूल के समुदाय का कहना है कि नागरिकता संबंधी नियमों में प्रस्तावित बदलाव में ऐसा कुछ नहीं है कि उस पर इतनी तीखी प्रतिक्रिया हो। इस समुदाय के अखबार ई-कोरिया वर्ल्ड के संपादक किम योंग-फिल के मुताबिक इस मामले को लेकर चीनी मूल के लोगों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि इसकी आड़ में चीन मूल के लोगों पर हमले भी हो सकते हैँ।


दक्षिण कोरिया में साल 2000 तक विदेशियों के लिए नागरिकता पाना लगभग असंभव था। तब तक सिर्फ 33 विदेशी दक्षिण कोरिया की नागरिकता हासिल करने में कामयाब हुए थे। लेकिन उसके बाद इस मामले में नरमी बरती गई, जिससे पिछले 20 साल में 14 हजार से ज्यादा विदेशियों को इस देश की नागरिकता मिली है। उनमें 58 फीसदी चीनी और 30 प्रतिशत वियतनामी हैं। ताजा नियम का मकसद दक्षिण कोरिया में काम रहे विदेशियों को यहीं बस जाने के लिए प्रोत्साहित करना है। लेकिन चीन विरोधी भावनाओं ने फिलहाल सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है।

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