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New US Trade Policy: आखिर इतना क्यों अमेरिका से खफा हो गए हैं दक्षिण कोरिया के लोग?

Sat, 17 Sep 2022 05:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 17 Sep 2022 05:26 PM IST
सार

New US Trade Policy: अमेरिकी कानून में प्रावधान है कि अमेरिका में निर्मित इलेक्ट्रिक कारों को खरीदने वाले लोगों को 7,500 डॉलर की टैक्स छूट मिलेगी। इस प्रावधान के कारण दक्षिण कोरियाई कंपनी ह्यूंदै और उसकी सहयोगी कंपनी किया को भारी नुकसान होगा...

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South Korea Angry Over New US Trade Policy
New US Trade Policy: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

चीन पर लगाम लगाने की कोशिश में अमेरिका ने अपने खास सहयोगी देश दक्षिण कोरिया को नाराज कर दिया है। अमेरिका ने हाल में इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट नाम से एक नया कानून बनाया, जिसका एक प्रमुख मकसद इलेक्ट्रिक कार की सप्लाई चेन से चीन को बाहर करना और अमेरिका में ऐसी कारों का उत्पादन बढ़ाना है। लेकिन दक्षिण कोरिया में ये कानून एक बड़ा मुद्दा बन गया है। दक्षिण कोरियाई अखबारों ने कहा है कि इससे दक्षिण कोरियाई कंपनियों के साथ भेदभाव होगा।

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अमेरिकी वेबसाइट वॉक्स से बातचीत में अमेरिकी विश्लेषकों ने कहा है कि दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया अमेरिकी मकसद को पूरा करने में आ रही दिक्कतों की सिर्फ एक मिसाल है। पिछले महीने पारित हुए अमेरिकी कानून में प्रावधान है कि अमेरिका में निर्मित इलेक्ट्रिक कारों को खरीदने वाले लोगों को 7,500 डॉलर की टैक्स छूट मिलेगी। इस प्रावधान के कारण दक्षिण कोरियाई कंपनी ह्यूंदै और उसकी सहयोगी कंपनी किया को भारी नुकसान होगा। इन कंपनियों के दक्षिण कोरिया में निर्मित इलेक्ट्रिक कारों का अमेरिका में बड़ा बाजार रहा है। टेस्ला कंपनी के बाद इन्हीं कंपनियों की ऐसी कारें वहां सबसे ज्यादा बिकती हैं।

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दक्षिण कोरिया के कंजरवेटिव नेता जूनगांग इल्बो ने वेबसाइट वॉक्स से कहा- ‘अमेरिका पहले मुक्त बाजार का अभिभावक था, लेकिन अब वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों में बाधक गया है। इस मामले में राष्ट्रपति जो बाइडन किसी रूप में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अलग नहीं हैं।’ दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्री अहन दुक-गियून ने बीते मंगलवार को कहा था कि इस अमेरिकी कानून को लेकर उभरे मतभेदों से अमेरिका-दक्षिण कोरिया व्यापार संबंध में भरोसा हिल जाएगा।

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वेबसाइट वॉक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया में दिखी प्रतिक्रिया कई और एशियाई देशों में जताई गई भावनाओं के मुताबिक ही है। लेकिन दक्षिण कोरिया में ऐसी नाराजगी जताई जाएगी, इसका अंदाजा अमेरिकी विश्लेषकों को नहीं था। दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिक अड्डा है, जहां 28 हजार अमेरिकी फौजी तैनात हैं। इसके अलावा चीन विरोधी अपनी रणनीति में अमेरिका काफी हद तक दक्षिण कोरिया पर निर्भरता रहता है। इस साल मई में कंजरवेटिव नेता यून सुक यिओल दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति बने, जिन्होंने अमेरिका के साथ सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने का वादा किया है। इसके बीच उठे ताजा विवाद से दोनों देशों के संबंध में नया पेच पड़ गया है।

सियोल स्थित सूंगसिल यूनिवर्सिटी में में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर जियोंगमीन सुह ने कहा है कि इस विवाद से कुछ दक्षिण कोरियाई कंपनियां ही प्रभावित होंगी, इसलिए इसका ज्यादा असर आम लोगों में नहीं दिखेगा। लेकिन दूसरे विश्लेषकों ने राय जताई है कि अगर मौजूदा विवाद का जल्द हल नहीं निकाला गया, तो उसके कूटनीतिक नतीजे हो सकते हैं।

दक्षिण कोरिया के प्रमुख अखबार हेनकियोरेह ने अपने संपादकीय में लिखा है- ‘अगर दक्षिण कोरिया निष्क्रिय बना रहा, तो यह एक बार फिर बड़ी ताकतों का शिकार बन सकता है। इसलिए अब दक्षिण कोरिया को छोटा देश होने की मानसिकता से उबरने और सक्रिया तेवर अपनाने की जरूरत है।’

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