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दक्षिण एशिया: टूटने लगी अमेरिका से रिश्ते सुधरने की पाकिस्तानी उम्मीदें, बाइडन ने इमरान से बात तक नहीं की
Fri, 07 May 2021 09:30 PM IST
सुरेंद्र जोशी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 07 May 2021 09:30 PM IST
सार
पाकिस्तान से दूरी बना कर चलने की अमेरिका की नीति अभी भी जारी है। बाइडन ने राष्ट्रपति बनने के बाद अभी तक इमरान खान से बात तक नहीं की।
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US and Pakistan
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विस्तार
दक्षिण एशिया में जो बाइडन प्रशासन की नीति में एक पहलू यह सामने आया है कि पाकिस्तान से दूरी बना कर चलने की अमेरिका की नीति अभी भी जारी है। इस तरह डोनाल्ड ट्रंप के ह्वाइट हाउस से विदा होने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से अपने संबंधों को नया रूप मिलने की जो उम्मीद जोड़ी थी, वह अब टूटने लगी है।
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विश्लेषकों का कहना है कि अफगानिस्तान की शांति वार्ता में पाकिस्तान का अहम रोल है, इसके बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई है। कूटनीतिक जानकारों ने इस तरफ ध्यान खींचा है कि बाइडन के राष्ट्रपति बने साढ़े तीन महीने हो गए हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से सीधी बातचीत नहीं की है। जानकारों के मुताबिक बाइडन प्रशासन का ये आकलन है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान चीन और रूस के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। इसीलिए बाइडन प्रशासन ने पाकिस्तान के प्रति अपनी नाराजगी जताने में कोई हिचक नहीं बरती।
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नाराजगी का संकेत पिछले महीने तब साफ मिला, जब जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत जॉन केरी ने भारत और बांग्लादेश की यात्रा की, लेकिन वे इस्लामाबाद नहीं गए। इसी तरह अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने मार्च में भारत और अफगानिस्तान की यात्रा की, लेकिन वे भी पाकिस्तान नहीं गए। पाकिस्तान ने बाइडन प्रशासन के इस रुख पर अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। लेकिन हांगकांग की वेबसाइट एशिया टाइम्स के मुताबिक पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी निजी बातचीत में यह मानते हैं कि बाइडन प्रशासन सोचे-समझे ढंग से पाकिस्तान की उपेक्षा कर रहा है।
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उसका यह भी कहना है कि अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या के दोषी अहमद उमर सईद शेख और उसके तीन साथियों को हाल में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने रिहा कर दिया। इससे भी अमेरिकी प्रशासन खफा हुआ है। पर्ल की हत्या 2002 में हुई थी। राजनयिकों ने ध्यान दिलाया है कि अमेरिकी रणनीति में पाकिस्तान की अहमियत तब से घटती गई है, जब पाकिस्तान के शहर एबटाबाद में अल-कायदा का प्रमुख ओसामा बिन लादेन मारा गया था।
अमेरिका को शिकायत है कि पाकिस्तान ने अमेरिका के मोस्ट वॉन्टेड अपराधी को अपने यहां छिपा कर रखा था। ओसामा की हत्या अमेरिकी सेना ने एक गुप्त कार्रवाई में की थी। अमेरिकी राजनयिकों की राय है कि उस घटना के बाद से अमेरिका ने पाकिस्तान पर भरोसा करना छोड़ दिया।
पाक साबित करे चीन का मोहरा नहीं है वह
जानकारों के मुताबिक मौजूदा समय में अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान यह साबित करे कि वह चीन का मोहरा नहीं है। लेकिन पाकिस्तान के लिए ऐसा करना आसान नहीं है। पाकिस्तान चीन की महत्त्वाकांक्षी योजना- बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इस योजना के तहत पाकिस्तान में बन रहे चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर में चीन 60 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है।
भारत से अमेरिकी गठजोड़ का उल्टा असर होगा
उधर पाकिस्तान की अपनी शिकायतें हैं। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता और विश्लेषक मुशाहिद हुसैन सईद ने एशिया टाइम्स से कहा कि अफगानिस्तान की आग से अमेरिका को बचाने के लिए पाकिस्तान ने जो किया है और आज भी कर रहा है, उसके लिए अमेरिका ने अपनी कृतज्ञता नहीं जताई है।
उन्होंने कहा- ‘आतंकवाद, भारत, अफगानिस्तान आदि से जुड़े मसलों पर पाकिस्तान ने सही कदम उठाए हैं। लेकिन अमेरिका आज भी पाकिस्तान को उभर रहे नए शीत युद्ध के नजरिए से देखता है। वह चीन को नियंत्रित करने के लिए भारत से गठजोड़ कर रहा है, जिसका उलटा असर होगा।’
रिश्तों में सुधार की उम्मीद कम
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों तरफ जिस तरह की कड़वाहट है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में निकट भविष्य में कोई सुधार होगा। इसका एक असर यह जरूर हो सकता है कि पाकिस्तान और भी ज्यादा चीन के खेमे से जुड़ जाए।