Tariffs: अमेरिका के बाद अब यूरोपीय संघ ने की भारत से अपील, कार आयात पर लगे टैरिफ को हटाने की मांग की
कुछ सप्ताह पहले अमेरिका ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों सहित कारों पर आयात शुल्क समाप्त करने की मांग की थी। इसी बीच अब यूरोपीय संघ की ओर से भी कारों पर शुल्क कम करने मांग उठी है। जिससे घरेलू कार निर्माताओं पर दबाव बढ़ गया है।
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अमेरिकी टैरिफ से पूरी दुनिया में मची हाहाकार के बीच यूरोपीय संघ ने भी भारत के साथ लंबित व्यापार समझौते के तहत कार आयात पर टैरिफ समाप्त करने की मांग की है। सूत्रों ने बताया कि मोदी सरकार वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए अपने वर्तमान प्रस्ताव को और अधिक सरल बनाने को तैयार है। कुछ सप्ताह पहले अमेरिका ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों सहित कारों पर आयात शुल्क समाप्त करने की मांग की थी, जिससे घरेलू कार निर्माताओं पर दबाव बढ़ गया है।
ऑटो उद्योग और सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत टैरिफ को 100 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के लिए तैयार है। ऐसा तब है जब भारत के ऑटो उद्योग ने सीमित संख्या में पेट्रोल कारों पर टैरिफ को तत्काल 100 फीसदी से घटाकर 70 फीसदी करने और फिर चरणबद्ध तरीके से 30 फीसदी तक कटौती करने का प्रस्ताव दिया है। ईवी के मामले में, कार निर्माता चाहते हैं कि 2029 तक टैरिफ में कोई कटौती न की जाए और उसके बाद सीमित आयात पर चरणबद्ध तरीके से 30 फीसदी तक कटौती की जाए।
फायदे में रहेंगी विदेशी कंपनियां
टैरिफ में कटौती फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय कार निर्माता कंपनियों के लिए एक जीत होगी, जिससे भारत में उनकी पहुंच बढ़ेगी। यह अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की टेस्ला के लिए भी एक जीत हो सकती है, जो इस साल संभवतः अपने बर्लिन प्लांट से भारत में आयातित ईवी की बिक्री शुरू करेगी। इसके विपरीत, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। इनका कहना है कि इससे उस क्षेत्र को नुकसान होगा जिसमें उन्होंने भारी निवेश किया है और जिसमें वे और अधिक पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं।
भारत बेहतर पेशकश के पक्ष में
सूत्रों ने बताया कि यूरोपीय संघ बेहतर सौदे की मांग कर रहा है और भारत बेहतर पेशकश करना चाहता है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों और ऑटो उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में यूरोपीय संघ की मांगों और भारत के रुख से अवगत कराया। यूरोपीय संघ की तरफ से इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी तो नहीं की गई, लेकिन उसके व्यापार मामलों के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने एक बयान में कहा, कई प्रमुख क्षेत्रों के लिए यूरोपीय संघ और भारत के दृष्टिकोण और उद्देश्य अलग-अलग हैं। कुछ मामलों में इसका मतलब महत्वाकांक्षा के अलग-अलग स्तर हैं।
वहीं, भारतीय वाणिज्य मंत्रालय और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम), जो दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कार बाजार में प्रमुख कार निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करता है, ने भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया।
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