{"_id":"60c6bac26d1a4c269b503108","slug":"snow-algae-s-blood-message-on-bloom-mountains-in-paris","type":"story","status":"publish","title_hn":"एल्गी ब्लूम : पर्वतों पर हिम शैवालों का 'रक्त संदेश'","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
एल्गी ब्लूम : पर्वतों पर हिम शैवालों का 'रक्त संदेश'
Mon, 14 Jun 2021 07:41 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, पेरिस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, पेरिस
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 14 Jun 2021 07:41 AM IST
सार
- वैज्ञानिकों के मुताबिक, पेरिस में ऊंचाई पर मौजूद हिम शैवालों की तेज वृद्धि (एल्गी ब्लूम) के कारण बन रही हैं। इसलिए आल्प्स पर्वतों में बर्फ रंग बदल रही है। इनका यह रक्त संदेश पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ने से लेकर ग्लेशियर सिकुड़ने की रफ्तार तेज कर सकता है।
विज्ञापन
ब्लूम पर्वत पर हिम शैवाल का गुलाबी रंग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पिछले कुछ वर्षों से फ्रांस के आल्प्स पर्वतों की ढलान में गर्मी के मौसम में गहरे रंग दिखने लगे हैं। इस दौरान वहां बर्फ कभी सुर्ख लाल तो कभी नारंगी या गुलाबी हो जाती है। स्थानीय लोग इसे 'सांग डे ग्लेशियर' या 'ग्लेशियर ब्लड' तो पर्वतों में घूमने वाले लोग इसे 'वाटरमैलन स्नो' भी कहने लगे हैं।
विज्ञापन
पारिस्थितिकी बिगड़ने और ग्लेशियर सिकुड़ने की दे रहे चेतावनी, आल्प्स पर्वतों में सुर्ख लाल हो रही बर्फ
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऊंचाई पर मौजूद हिम शैवालों की तेज वृद्धि (एल्गी ब्लूम) के कारण बन रही हैं। इसलिए आल्प्स पर्वतों में बर्फ रंग बदल रही है। इनका यह रक्त संदेश पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ने से लेकर ग्लेशियर सिकुड़ने की रफ्तार तेज कर सकता है।
विज्ञापन
शोधकर्ताओं का कहना है कि वैसे तो एल्गी ब्लूम प्राकृतिक होते हैं, लेकिन मानवीय कारक भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। यही वजह है कि आल्प्स में मौजूद से शैवालों को लेकर सर्वेक्षण और नमूने लेने का काम शुरू हुआ है।
विज्ञापन
ग्लेशियर ब्लड दिखने की वजह
फ्रंटियर्स इन प्लांट साइंस में इस हफ्ते विकास इस शोध में कुछ शुरुआती निष्कर्ष भी मिले हैं। शोध के लेखक एडलीन स्टीवर्ट का कहना है कि शैवाल पौधों जैसे बैक्टीरिया होते हैं जो पूरे पारिस्थितिकी का आधार हैं।
अपने प्रकाश संश्लेषण कौशल के कारण यह दुनिया में मौजूद ऑक्सीजन का बड़ा हिस्सा उत्पादित करते हैं और खाद्य श्रृंखला की बुनियाद तैयार करते हैं। लेकिन कभी-कभार यह खुद मात्रात्मक रूप से बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। इस बिगड़े असंतुलन के कारण यह रक्त जैसा लाल विषाक्त छोड़ने लगते हैं, जो ग्लेशियर ब्लड या वाटरमेलन स्नो के रूप में दिखाई देने लगता है।