थिंक टैंक की रिपोर्ट: अमेरिका को ‘जिहादियों’ से ज्यादा खतरा है ‘घरेलू आतंकवाद’ से
विश्लेषकों के मुताबिक धुर दक्षिणपंथी गुटों की हिंसा पर ध्यान डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद गया। खास कर इस साल छह जनवरी को कैपिटॉल हिल (संसद भवन) पर हुए ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद गुजरे वर्षों में रहीं इन गुटों की गतिविधियों पर ध्यान दिया जाने लगा...
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9/11 यानी अमेरिका पर हुए 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों में जितने लोग मारे गए, उससे कहीं ज्यादा लोग उसके बाद से देश के धुर दक्षिणपंथी गुटों के हमले में मारे गए हैं। इस बात की तरफ ध्यान एक थिंक टैंक की ताजा रिपोर्ट में खींचा गया है। इसमें इस साल के आरंभ में जारी हुई उस खुफिया रिपोर्ट का भी जिक्र है, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि घरेलू आतंकवाद इस समय अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
थिंक टैंक न्यू अमेरिका ने अपनी इस रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका में लंबे समय तक घरेलू दक्षिणपंथी उग्रवाद के खतरे को कम करके देख जाता रहा। देश का ध्यान और संसाधन अल-कायदा या आईएसआईएस जैसे विदेशी आतंकवादी गुटों से लड़ाई में झोंका जाता रहा। जबकि श्वेत चरमपंथ की अनदेखी की गई।
अमेरिका की नागरिक अधिकार संस्था- अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) की निदेशक हिना शम्सी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि अमेरिका की कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने श्वेत वर्चस्ववादी हिंसा को गलत ढंग से समझा है। इसका आंशिक कारण यह है कि 9/11 के बाद ध्यान मुसलमानों, आव्रजकों और अश्वेत समुदायों की निगरानी और जांच पर टिका रहा। उन समूहों को खतरा मानने का गलत और अन्यायपूर्ण नजरिया इन एजेंसियों में रहा है।’
विश्लेषकों के मुताबिक धुर दक्षिणपंथी गुटों की हिंसा पर ध्यान डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद गया। खास कर इस साल छह जनवरी को कैपिटॉल हिल (संसद भवन) पर हुए ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद गुजरे वर्षों में रहीं इन गुटों की गतिविधियों पर ध्यान दिया जाने लगा। अमेरिका में धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद की पहली बड़ी घटना 1995 में ओकलाहोमा शहर में हुई थी, जहां बम से एक सरकारी इमारत को उड़ा दिया गया था। उस घटना में 168 लोग मारे गए थे।
अब वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक न्यू अमेरिका ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें 251 ऐसे हत्याकांडों का विश्लेषण किया गया है, जिसके पीछे इस थिंक टैंक ने अमेरिका के घरेलू आतंकवादियों का हाथ बताया है। ये सभी घटनाएं 9/11 के बाद की हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में धुर दक्षिणपंथी गुटों ने 144 लोगों की हत्या की। जबकि इसी दौरान ‘जिहादी’ गुटों ने 107 हमले किए, जिनमें 14 लोग मारे गए। न्यू अमेरिका के मुताबिक घरेलू आतंकवादी गुटों में सरकार विरोधी, प्राइवेट हथियारबंद समूह, श्वेत वर्चस्ववादी, और गर्भपात विरोधी आदि गुट शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है- ‘अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले ज्यादातर विदेशी घुसपैठियों ने नहीं, बल्कि उन लोगों ने किए जो अमेरिका के नागरिक या यहां के वैध निवासी हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-कायदा या आईएसआईएस जैसे गुटों की हिंसा पर अमेरिका सरकार सख्ती से कदम उठाती है। लेकिन श्वेत वर्चस्ववादियों की तरफ से बढ़ते खतरों के बावजूद उनके प्रति सरकार का रुख नरम रहा है।
इसके पहले 2019 में थिंक टैंक ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि श्वेत चरमपंथियों के हमलों पर सरकार की प्रतिक्रिया नाकाफी रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि ऐसी घटनाएं होने पर अकसर आतंकवाद से संबंधित धाराएं नहीं लगाई जातीं। उन मामलों में गिरोहों की हिंसा या ऐसे ही कम सजा वाले अपराधों की धाराएं लगाई जाती हैं। न्यू अमेरिका की ताजा रिपोर्ट के लेखकों में से एक डेविड स्टरमैन ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘धुर दक्षिणपंथ पर उतना ध्यान नहीं दिया गया है, जितना दिया जाना चाहिए था।’ जानकारों का कहना है कि यही लापरवाही अब अमेरिका को भारी पड़ रही है।