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Shubhanshu Shukla: 'तेज होने के लिए कभी-कभी धीमा होना जरूरी', शुभांशु शुक्ला ने पोस्ट किया आईएसएस का वीडियो

Sun, 20 Jul 2025 11:01 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 20 Jul 2025 11:01 AM IST
सार

शुभांशु शुक्ला धरती पर लौटने के बाद अब धरती के माहौल में ढलने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अब शुभांशु ने नया वीडियो पोस्ट कर गुरुत्वाकर्षण और गुरुत्वाकर्षण रहित माहौल के अंतर पर बात की। 

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शुभांशु शुक्ला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया है। इस वीडियो में शुभांशु अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर योग करते दिख रहे हैं। इस वीडियो के साथ शुभांशु ने लिखा कि 'अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने के बाद से ही तय समयसीमा में अपने कामों और प्रयोगों को करने में व्यस्त थे। शुरुआत में यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि आप सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) में चलना सीख रहे होते हैं और स्टेशन के बारे में जान रहे होते हैं।'
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कभी-कभी धीमा होना जरूरी
शुभांशु शुक्ला ने लिखा कि 'यह वीडियो मिशन के कुछ दिनों बाद का है जब मैं आखिरकार अपनी गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण कर पा रहा था। मैं बस स्थिर रहना चाहता था, लेकिन इसमें असफल हो रहा था। कोई भी छोटी सी गड़बड़ी अंतरिक्ष में आपके शरीर को हिला सकती है और पूरी तरह से स्थिर रहने के लिए बेहद कौशल की जरूरत होती है। इस तेज गति से भागती दुनिया में हमारे मन की तरह। आज कुछ समय के लिए स्थिर रहें। तेज होने के लिए कभी-कभी धीमा होना भी जरूरी है।'
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15 जुलाई को लौटे शुभांशु
एक्सिओम-4 मिशन के तहत आईएसएस पर 18 दिन बिताने के बाद शुभांशु शुक्ला बीती 15 जुलाई को धरती पर वापस लौट आए हैं। फिलहाल शुभांशु डॉक्टरों की देखरेख में गुरुत्वाकर्षण के माहौल में तालमेल बिठा रहे हैं और चलना सीख रहे हैं। शुभांशु ने अपने पिछले पोस्ट में बताया था कि 'हम गुरुत्वाकर्ण के वातावरण में बड़े होते हैं। हमारा शरीर इसके अलावा कुछ और नहीं जानता। गुरुत्वाकर्षण रहित माहौल में रहने का हमारे शरीर पर कई तरह से असर पड़ता है। इससे शरीर में द्रव की कमी, दिल की धड़कन धीमी होना शामिल है। साफ है कि स्थिर रहना गुरुत्वाकर्षण के साथ या उसके बिना एक चुनौती है।'

18 दिन आईएसएस पर रहकर 60 प्रयोग किए
शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत 25 जून 2025 को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल में बैठकर अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे। उनकी लॉन्चिंग फैल्कन-9 रॉकेट के जरिए कराई गई थी। 26 जून को एक्सिओम-4 आईएसएस पर डॉक कर गया था। इसके बाद शुभांशु और उनके साथी अंतरिक्ष यात्रियों को 14 दिन तक अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर प्रयोगों में हिस्सा लेना था। हालांकि, मिशन की अवधि कुछ दिन के लिए बढ़ा दी गई। इस दौरान शुभांशु और उनकी टीम ने 60 से ज्यादा प्रयोगों में हिस्सा लिया।
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