{"_id":"66b211e66c6b28e4c60568ee","slug":"sheikh-hasina-who-is-plotting-balkanization-to-break-bangladesh-why-is-it-a-threat-to-india-2024-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sheikh Hasina: बांग्लादेश को तोड़ने के लिए कौन रच रहा है 'बाल्केनाइजेशन' प्लॉट, भारत के लिए क्यों है खतरा?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Sheikh Hasina: बांग्लादेश को तोड़ने के लिए कौन रच रहा है 'बाल्केनाइजेशन' प्लॉट, भारत के लिए क्यों है खतरा?
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
Sheikh Hasina
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी 76 वर्षीय शेख हसीना ने जनवरी में चुनावों के बाद लगातार चौथी बार सत्ता संभाली थी। लगभग 15 सालों से देश की सत्ता पर काबिज रहीं शेख हसीना को आने वाले खतरे को आभास पहले ही हो चुका था। उन्होंने इस साल मई में एक चौंकाने वाली आशंका जाहिर की थी, जिसका परिणाम उन्हें 5 अगस्त को सत्ता से बेदखल होने के तौर पर भुगतना पड़ा है। शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग के एक सदस्य ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कुछ देश एक खास 'ऑपरेशन' के तहत बांग्लादेश को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को भी इस बात की पूरी जानकारी है।
31 जुलाई को शेख हसीना से मिले थे भारतीय दूतावास के अधिकारी
बांग्लादेश अवामी लीग से जुड़े सदरुल खान ने एक खास बातचीत में बताया कि 31 जुलाई को ढाका स्थित भारतीय दूतावास के शीर्ष अधिकारी ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि वे शेख हसीना के लिए एक खास संदेश लेकर आए थे। शायद भारत की खुफिया एजेंसियों को बांग्लादेश में होने वाली उथल-पुथल की पूरी जानकारी मिल चुकी थी और वे आखिरी संदेश पहुंचाने के लिए आए थे। इस बैठक में शेख हसीना को हर सूरत में भारत का पूरा 'समर्थन' मिलने की प्रतिबद्धता जताई थी। उन्होंने कहा कि भारत ने अपना वायदा निभाया और शेख हसीना के लिए एक सेफ पैसेज भी उपलब्ध कराया और अपने यहां शरण भी दी।
शेख हसीना ने एक बैठक में किया था खुलासा
सदरुल ने बताया कि बांग्लादेश में जनवरी में आम चुनावों के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने आवास पर पार्टी सदस्यों की एक बैठक में खुलासा किया था कि बांग्लादेश के खिलाफ 'बाल्केनाइजेशन' प्लॉट रचा जा रहा है। इस साजिश में कुछ बड़े विदेशी राष्ट्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शेख हसीना ने इस बैठक में खुलासा किया था कि 7 जनवरी, 2024 के चुनावों से पहले एक विदेशी दूत ने उनसे संपर्क किया था, उस दूत ने उन्हें सुझाव दिया था कि अगर वह बांग्लादेश में एक विदेशी सैन्य अड्डे की अनुमति देती हैं, तो वह बिना किसी परेशानी के फिर से चुनाव जीत सकती हैं। हालांकि उन्होंने उस देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा जरूर किया कि वह पश्चिम का बड़ा देश है।
भारत के लिए सचेत होने का समय
रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर सदरुल ने बताया कि भारत के लिए यह सचेत होने का समय है। जो शक्तियां बांग्लादेश की सत्ता पर हावी होने की तैयारियां कर रह रही हैं, वह पहले भी भारत के खिलाफ बड़ी साजिश को अंजाम दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी)-जमात-ए-इस्लामी (जेआई) की गतिविधियां शुरू से ही संदेहास्पद रही हैं। यहां तक कि जब वे 2001 से 2006 के बीच देश में सत्ता में थे, तो बीएनपी सरकार ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोही गुटों को भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के नजदीक स्थित छत्रग्राम बंदरगाह से हथियारों की सप्लाई पहुंचाने की व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि हाल ही में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी बीएनपी और जेआई कैडर ने भारत के साथ कनेक्टिविटी और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने को लेकर शेख हसीना पर निशाना साधा था। यहां तक कि बीएनपी और उसके सहयोगी दल भारतीय सामान का बहिष्कार करने के लिए काफी वक्त से 'इंडिया आउट' कैंपेन चला रहे थे।
क्या है बालकेनाइजेशन' प्लॉट?
यह पूछे जाने पर कि ये 'बाल्केनाइजेशन' प्लॉट क्या है, तो इसका खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि मणिपुर में हाल ही में जो हिंसक वारदातें हुई हैं, वह दरअसल एक सोची समझी साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इसका बांग्लादेश से सीधा कनेक्शन है। उन्होंने आशंका जताई कि बांग्लादेश का धार्मिक आधार पर विभाजन हो सकता है। 'बालकेनाइजेशन' प्लॉट का खुलासा करते हुए उन्होंने आगे कहा कि कुछ विदेशी शक्तियां बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ इलाके को काटकर पूर्वी तिमोर जैसा एक नया ईसाई देश बनाने की साजिश रच रहे हैं। म्यांमार का कुकी चिन प्रांत, बांग्लादेश का चटगांव पहाड़ी इलाका और भारत के मिजोरम को मिला कर नया देश बनाने की साजिश रची जा रही है और इसका बेस बंगाल की खाड़ी में होगा। उन्होंने कहा कि म्यांमार का कुकी-चिन इलाका ईसाई बहुल है, इसलिए उन्हें आसानी से बरगलाया जा सकता है। कुकी-चिन नेशनल फ्रंट अलगाववादी संगठन के उग्रवादी ईसाई विद्रोहियों की मदद के लिए म्यांमार सेना से लड़ रहे हैं। यह गुट कई बार बांग्लादेशी सेना पर घातक हमले भी कर चुका है। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश का कोई हिस्सा कुकी-चिन विद्रोहियों के चलते अशांत है, तो इसके परिणाम दिल्ली में भी महसूस किए जाएंगे। यह पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़का सकते हैं और ड्रग माफिया युवाओं को हिंसा करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उनका दावा है कि शेख हसीना के बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत विरोधी ताकतें बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं कर पा रही थीं। इसलिए ईसाई राज्य बनने से भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चिताएं भी पैदा होंगी।
कुकी-चिन नेशनल फ्रंट क्यों है भारत के लिए खतरा?
कुकी-चिन नेशनल फ्रंट (केएनएफ) मुख्य रूप से बांग्लादेश के सिलहट और चटगांव हिल, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और म्यांमार के चिन राज्य में एक्टिव है। भारत के मणिपुर और मिजोरम राज्यों में, उन्हें कुकी और मिजो के तौर पर जाना जाता है, जबकि म्यांमार में उन्हें चिन के रूप में जाना जाता है। केएनएफ की स्थापना ढाका विश्वविद्यालय से ललित कला स्नातक नाथन बॉम ने 2017 में बावम लोगों के लिए एक स्वतंत्र संप्रभु राज्य बनाने के लिए की थी, जिसमें रंगमती और बंदरबन जिलों के भीतर नौ उपजिले (उप-जिले) शामिल थे। खुद बांग्लादेश पुलिस की आतंकवाद विरोधी इकाई रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) ने भी माना है कि केएनएफ की रणनीति सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से म्यांमार-बांग्लादेश सीमा पर कुकी-चिन लोगों के लिए स्वायत्तता हासिल करना है। वहीं कुकी-चिन भारत के पूर्वोत्तर और म्यांमार में भी सक्रिय उग्रवादी समूहों का हिस्सा हैं। वहीं चिन राज्य से बड़ी संख्या में कुकी भारत के मिजोरम राज्य में चले गए हैं। इस बीच, भारत के मणिपुर में कुकी और मैतई के बीच जो हिंसक संघर्ष चल रहा है, वह इसी का परिणाम माना जा सकता है। कुकी-चिन अलगाववादी संगठन ने न केवल हिंसा को भड़काया है, बल्कि हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी को भी बढ़ावा दिया है। म्यांमार से शरणार्थियों की अवैध एंट्री को देखते हुए भारत ने 1643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि अवामी लीग के नेता शुरू से आरोप लगाते रहे हैं कि बाइडन सरकार म्यांमार में इन विद्रोही ताकतों की मदद कर रही है और अमेरिकी प्रशासन ने पहले ही बर्मा अधिनियम पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके तहत अमेरिकी प्रशासन म्यांमार के विद्रोहियों को 'गैर-घातक सहायता' प्रदान कर रहा है। म्यांमार सरकार ने विद्रोहियों को अमेरिकी सहायता पर आपत्ति जताई है, लेकिन अमेरिका का कहना है कि वह म्यांमार में बढ़ते चीनी प्रभाव को रोकने के लिए विद्रोहियों की मदद कर रहा है।
प्रतिबंध लगाने और चुनाव टालने की रची साजिश
सदरुल के मुताबिक पिछले संसदीय चुनाव के दौरान चुनाव उस पश्चिमी देश के राजदूत ने शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कई तरह की रणनीतियां आजमाईं, लेकिन वे असफल रहे। चुनाव से ठीक दो माह पहले, 28 अक्तूबर, 2023 को, मियां अराफी नाम का एक शख्स, जो खुद को उस पश्चिमी देश के राष्ट्रपति का एडवायजर बताता है, वह हिंसक झड़प के तुरंत बाद ढाका में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यालय में गया और कार्यकर्ताओं को विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाया। 7 जनवरी 2024 के चुनाव से पहले, उस पश्चिमी देश के राजदूत और विपक्षी पार्टी बीएनपी के बीच कई बैठकें हुईं। बांग्लादेश पर प्रतिबंध लगाने और चुनाव टालने की की धमकियां दी गईं। लेकिन शेख हसीना की दृढ़ता के आगे वे फेल हो गए। वह बताते हैं कि उन्होंने बांग्लादेश पर क्वॉड गठबंधन में शामिल होने का दबाव बनाया और सेंट मार्टिन द्वीप को पट्टे पर देने का प्रस्ताव रखा। लेकिन बांग्लादेश ने इन प्रस्तावों को दृढ़ता से खारिज कर दिया। यहां तक जून 2023 में, बांग्लादेश ने अवामी लीग और 14-पक्षीय गठबंधन की बैठक में इस प्रस्ताव की खुलकर निंदा भी की। उन्होंने कहा कि नौसैनिक अड्डा बनने से बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ेगी और दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता पर भी इसका असर पड़ेगा।
सेंट मार्टिन द्वीप पर एक सैन्य अड्डा बनाना चाहता है अमेरिका
बांग्लादेश का दावा है कि अमेरिका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेंट मार्टिन द्वीप पर एक सैन्य अड्डा स्थापित करना चाहता है, जो एक छोटा सा द्वीप है और बांग्लादेश का सबसे दक्षिणी हिस्सा है। यह कॉक्स बाजार-टेकनाफ प्रायद्वीप के सिरे से लगभग नौ किलोमीटर दक्षिण में है। चेरा द्वीप नामक एक और छोटा सा द्वीप है, जो उच्च ज्वार के समय अलग हो जाता है। बंगाली में सेंट मार्टिन द्वीप को नारिकेल जिन्जीरा के नाम से जाना जाता है और बंगाली में इसका अर्थ 'नारियल द्वीप' है और यहां मूंगा की चट्टानें हैं। बता दें कि अमेरिका बीजिंग और मॉस्को के साथ ढाका के घनिष्ठ संबंधों को लेकर चिंतित है। अगर अमेरिका को बांग्लादेश में सैन्य अड्डा मिल जाता है, तो भारत का महत्व भी कम हो जाएगा। अमेरिका जानता है कि भारत एक बड़ा देश है और उसके पास मजबूत सैन्य और आर्थिक नीतियां भी हैं, इसलिए उसे ज्यादा धमकाया नहीं जा सकता। इसलिए वह ढाका पर अमेरिका को सैन्य अड्डा देने के लिए दबाव डालना चाहता है।