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Setback for US Dollar: अध्ययन रिपोर्ट में खुलासा, दुनिया में बड़ी तेजी से गिरी 2022 में डॉलर की हैसियत

Wed, 19 Apr 2023 05:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 19 Apr 2023 05:21 PM IST
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सार
Setback for US Dollar: विश्लेषकों के मुताबिक रिजर्व करेंसी के रूप में डॉलर के हिस्से में तेज गिरावट यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद आने लगी। यूरीजोन की रिपोर्ट में कहा गया है- ‘अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की असाधारण कार्रवाइयां कीं। इससे बहुत-से देश डॉलर में अपनी संपत्ति रखने को लेकर अनिच्छुक हो गए।’
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Setback for US Dollar: Study report revealed, dollar dominance status fell sharply in 2022, but not dying
डॉलर और यूरो - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रिजर्व करेंसी के रूप में डॉलर की हैसियत को साल 2022 में अभूतपूर्व झटका लगा। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर का विकल्प ढूंढने की चल रही कोशिशों में एक नया पहलू जोड़ दिया है। यूरीजोन एसएलजे असेट मैनेजमेंट नाम की एक मार्केटिंग एजेंसी ने पिछले विभिन्न देशों के विदेशी मुद्रा भंडारों में अलग-अलग मुद्राओं की मौजूदगी के बारे में अपनी नई अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। हालांकि इसमें कहा गया है कि अभी भी सबसे बड़ी मौजूदगी डॉलर की ही है, लेकिन 2022 में इसकी मात्रा में भारी गिरावट आई।  

इस एजेंसी के रणनीतिकारों जोआना फ्रियरे और स्टीफन जेन ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट को जारी करते हुए बताया कि 2022 के अंत में विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर का हिस्सा घट कर 47 फीसदी रह गया। 2021 के अंत में डॉलर का हिस्सा 55 फीसदी था। जबकि 2003 में विभिन्न देशों के विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर का हिस्सा दो तिहाई (66 फीसदी) था। फ्रियरे और जेन ने कहा- ‘एक साल के अंदर आठ फीसदी की गिरावट असाधारण है। इसका अर्थ यह हुआ कि उसके पहले के वर्षों में जिस रफ्तार से डॉलर का हिस्सा घट रहा था, पिछले वर्ष यह रफ्तार दस गुना बढ़ गई।’

विश्लेषकों के मुताबिक रिजर्व करेंसी के रूप में डॉलर के हिस्से में तेज गिरावट यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद आने लगी। यूरीजोन की रिपोर्ट में कहा गया है- ‘अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की असाधारण कार्रवाइयां कीं। इससे बहुत-से देश डॉलर में अपनी संपत्ति रखने को लेकर अनिच्छुक हो गए।’ यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और उसके साथी देशों ने डॉलर में रखी गई रूस 300 बिलियन डॉलर की संपत्ति जब्त कर ली थी। साथ ही उसे डॉलर में लेन-देन के सिस्टम स्विफ्ट से बाहर कर दिया।

पश्चिमी देशों की इस कार्रवाई के बाद रूस अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर के विकल्प की तलाश में जुट गया। पिछले महीने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने घोषणा की थी कि अब रूस अपने तमाम भुगतान का लेन-देन चीनी मुद्रा युवान में करेगा। उधर कई दूसरे देशों ने भी आपसी मुद्राओं में या युवान में भुगतान की नीति अपना ली है।

इस बीच विदेशी मुद्रा भंडारों में यूरो (यूरोपीय यूनियन की मुद्रा) के हिस्से में पिछले साल पांच फीसदी की उछाल दर्ज हुई। इस तरह अब उसका हिस्सा उस स्तर पर पहुंच गया है, जहां आखिरी बार 2003 में देखने को मिला था। चीनी मुद्रा युवान का हिस्सा भी तेजी से बढ़ा है। यूरीजोन की रिपोर्ट में कहा गया है- ‘हमारी राय है कि रिजर्व करेंसी के रूप में डॉलर की हैसियत गिरने की गति हाल के वर्षों में तेज हो गई है। खास कर यूक्रेन युद्ध के बाद यह गति चिंताजनक सीमा तक पहुंच गई है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में डॉलर का वर्चस्व अभी कुछ समय तक जारी रहेगा।’

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच सोल्यूशंस ने भी अपने एक ताजा आकलन में कहा है कि समय गुजरने के साथ डॉलर का वर्चस्व कमजोर हो जाएगा। हालांकि इस एजेंसी का भी आकलन है कि ऐसा धीरे-धीरे होगा।

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