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Iran-US Row: क्या खामेनेई से सुलह करना चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति? रुबियो बोले- मुलाकात को तैयार हैं ट्रंप
Sat, 14 Feb 2026 11:31 PM IST
देवेश त्रिपाठी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 14 Feb 2026 11:31 PM IST
सार
रूस-यूक्रेन युद्ध पर पूछे गए सवाल के जवाब में रुबियो ने कहा कि उनका मानना है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध लक्ष्य बदल चुके हैं और अब वे डोनेत्स्क क्षेत्र के उस 20 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण चाहते हैं जो अभी उनके कब्जे में नहीं है। उन्होंने मध्य पूर्व में दूसरा विमानवाहक पोत भेजने के ट्रंप के फैसले को इस रूप में बताया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान कोई बड़ा टकराव न भड़काए।
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डोनाल्ड ट्रंप, अयातुल्ला खामनेई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकता ईरान के साथ एक समझौता करना है। रुबियो ने आगे कहा कि ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई से मिलने के लिए भी तैयार हैं। ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा, 'राष्ट्रों को एक-दूसरे से संवाद करना चाहिए। मैं ऐसे राष्ट्रपति के अधीन काम करता हूं जो किसी से भी मिलने को तैयार हैं।'
मार्को रुबियो ने विश्वास जताया कि अगर खामेनेई मुलाकात की इच्छा जताएं तो ट्रंप उनसे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि मुलाकात की वजह सहमति नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए संवाद को जरूरी मानने की सोच होगी।
ये भी पढ़ें: विदेश नीति: भारत तेल खरीदने का फैसला कैसे करेगा, क्या क्वाड में सबकुछ ठीक नहीं? जयशंकर ने दिए सवालों के जवाब
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यूरोप के नेताओं को भी संदेश दे गए रुबियो
रुबियो ने यूरोप के नेताओं को भी संदेश दिया कि उन्हें अमेरिका के साथ साझा परंपराओं और मूल्यों की ओर लौटना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि यूरोप समृद्ध हो, क्योंकि दोनों के बीच गहरे संबंध हैं और उनका गठबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह ऐसा गठबंधन होना चाहिए जिसमें सहयोगी सक्षम हों और अपने मूल्यों की रक्षा के लिए तैयार हों।
उन्होंने कहा, 'आखिर हमें क्या जोड़ता है? हम एक ही सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं और यह महान सभ्यता है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।' रुबियो की ये टिप्पणियां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण के विस्तार के रूप में देखी जा रही हैं। उनका लहजा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पिछले वर्ष दिए गए आक्रामक भाषण की तुलना में अधिक सौम्य था, हालांकि उसमें ट्रंप के राष्ट्रवादी संदेश की झलक भी थी।
ये भी पढ़ें: US-China Relations: जर्मनी में वांग यी और मार्को रुबियो की मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने पर बनी सहमति
रुबियो के बयान पर क्या बोला यूरोप?
गौरतलब है कि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी हाल में कहा था कि ट्रांसअटलांटिक संबंधों को विकसित होना चाहिए और यूरोप को अपनी सुरक्षा व स्वतंत्रता को मजबूत करना होगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रुबियो के भाषण पर राहत जताई, लेकिन कहा कि कुछ सीमाएं ऐसी पार हो चुकी हैं जिन्हें वापस नहीं लिया जा सकता। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने यूरोप को अपनी रक्षा और सुरक्षा के मुद्दे पर आत्मसंतोष से बचने की सलाह दी।
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मार्को रुबियो ने विश्वास जताया कि अगर खामेनेई मुलाकात की इच्छा जताएं तो ट्रंप उनसे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि मुलाकात की वजह सहमति नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए संवाद को जरूरी मानने की सोच होगी।
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यूरोप के नेताओं को भी संदेश दे गए रुबियो
रुबियो ने यूरोप के नेताओं को भी संदेश दिया कि उन्हें अमेरिका के साथ साझा परंपराओं और मूल्यों की ओर लौटना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि यूरोप समृद्ध हो, क्योंकि दोनों के बीच गहरे संबंध हैं और उनका गठबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह ऐसा गठबंधन होना चाहिए जिसमें सहयोगी सक्षम हों और अपने मूल्यों की रक्षा के लिए तैयार हों।
उन्होंने कहा, 'आखिर हमें क्या जोड़ता है? हम एक ही सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं और यह महान सभ्यता है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।' रुबियो की ये टिप्पणियां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण के विस्तार के रूप में देखी जा रही हैं। उनका लहजा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पिछले वर्ष दिए गए आक्रामक भाषण की तुलना में अधिक सौम्य था, हालांकि उसमें ट्रंप के राष्ट्रवादी संदेश की झलक भी थी।
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रुबियो के बयान पर क्या बोला यूरोप?
गौरतलब है कि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी हाल में कहा था कि ट्रांसअटलांटिक संबंधों को विकसित होना चाहिए और यूरोप को अपनी सुरक्षा व स्वतंत्रता को मजबूत करना होगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रुबियो के भाषण पर राहत जताई, लेकिन कहा कि कुछ सीमाएं ऐसी पार हो चुकी हैं जिन्हें वापस नहीं लिया जा सकता। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने यूरोप को अपनी रक्षा और सुरक्षा के मुद्दे पर आत्मसंतोष से बचने की सलाह दी।
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