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स्कॉटलैंड : आजादी के एजेंडे को लेकर निकल पड़ीं स्टरजन, सैलमंड ने दी ये सलाह

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 10 May 2021 08:44 PM IST

सार

स्कॉटलैंड की प्रांतीय असेंबली में आजादी समर्थक पार्टियों को बहुमत मिला। इस कारण ब्रिटेन से आजादी की उनकी मांग फिर प्रबल हो सकती है। 
 
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स्कॉटिश नेशनलिस्ट पार्टी की नेता निकोला स्टरजन
स्कॉटिश नेशनलिस्ट पार्टी की नेता निकोला स्टरजन - फोटो : pti

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विस्तार

स्कॉटलैंड की प्रांतीय असेंबली में आजादी समर्थक पार्टियों को मिले बहुमत के बाद स्कॉटिश नेशनलिस्ट पार्टी (एसएनपी) की नेता निकोला स्टरजन ने दो टूक लहजे में अपना एजेंडा साफ कर दिया है। रविवार को एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने बेलाग कहा, 'लंदन (संघीय सरकार) चाहे जो कहे, मैं स्कॉटलैंड की आजादी की तरफ आगे बढ़ूंगी।'
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चर्चा है कि स्कॉलैंड की असेंबली की बैठक में निकोला स्टरजन नए जनमत संग्रह के लिए प्रस्ताव पारित कराएंगी। तब जनमत संग्रह को रोकने के लिए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव सरकार उस प्रस्ताव को कोर्ट में चुनौती देगी। 


आजादी हासिल करूंगी
टीवी इंटरव्यू में स्टरलन ने आगे कहा, 'मुझे उम्मीद है कि मैं स्कॉटलैंड की आजादी हासिल करूंगी। आजादी के लिए जनमत संग्रह को रोकने के मकसद से अगर सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी अदालत का सहारा लेती है, तो यह उसका बेतुका और पूरी तरह भड़काने वाला कदम होगा।'

2014 में हार गए थे आजादी समर्थक
गौरतलब है कि स्टरजन लंबे समय से आजादी की मांग उठाती रही हैं। लेकिन 2014 के बाद से कंजरवेटिव सरकारें इसे नकारती रही हैं। 2014 में स्कॉटलैंड की आजादी के सवाल पर जनमत संग्रह हुआ था, लेकिन तब आजादी समर्थकों की हार हो गई थी।

विश्लेषकों का कहना है कि यूरोपियन यूनियन (ईयू) से ब्रिटेन के अलगाव (ब्रेग्जिट) के बाद स्कॉटलैंड में माहौल बदल गया है। स्कॉटलैंड के ज्यादातर लोग ईयू के साथ रहना  चाहते थे। लेकिन इंग्लैंड में ब्रेग्जिट की भावना की बेहद मजबूत थी। इस कारण पिछले एक जनवरी को ब्रेग्जिट अमल में आ गया। माना जाता है अब अगर जनमत संग्रह हुआ, तो स्कॉटलैंड की आजादी के समर्थकों की जीत हो सकती है।

दोबारा जनमत संग्रह मुख्य चुनावी मुद्दा था
स्टरजन की एसएनपी ने पिछले मंगलवार को हुए चुनाव में दोबारा जनमत संग्रह कराने को अपना मुख्य मुद्दा बनाया था। शनिवार को चुनाव के नतीजे घोषित हुए। उसके मुताबिक एसएनपी को 129 सदस्यों के सदन में 64 सीटें मिलीं। यानी बहुमत पाने से वह एक सीट पीछे रह गई। लेकिन आजादी की समर्थक ग्रीन पार्टी को आठ सीटें मिली हैं। इस तरह इन दोनों को मिलाकर सदन में बहुमत है।

स्टरजन ने समर्थकों से अपील की कि वे जनमत संग्रह के पक्ष में मतदान के लिए मतदाताओं को गोलबंद करना शुरू कर दें। इस चुनाव में एसएनपी से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले वरिष्ठ नेता एलेक्स सैलमंड को निराशा हाथ लगी। उनकी अल्बा पार्टी को सिर्फ दो फीसदी वोट मिले। 

अब 50 फीसदी लोग आजादी के समर्थन में
सैलमंड ने एक रूसी टीवी चैनल से कहा कि जब 2012 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से जनमत संग्रह के सवाल पर बातचीत शुरू की थी, तब स्कॉटलैंड में आजादी के पक्ष में 30 फीसदी जनमत था। 2014 में 45 प्रतिशत लोगों ने आजादी के पक्ष में वोट दिया। अब ये समर्थन 50 फीसदी से ज्यादा हो चुका है। सैलमंड ने स्टरजन को सलाह दी है कि आजादी समर्थक जनादेश का लाभ उठाते हुए वे अभी वार कर दें, जब लोहा गर्म है।

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