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अध्ययन: खून के अणुओं से कम होगी उम्र बढ़ने की रफ्तार, जवां दिखेगी त्वचा
Mon, 01 Dec 2025 04:58 AM IST
लव गौर
एजेंसी
एजेंसी
Published by: लव गौर
Updated Mon, 01 Dec 2025 04:58 AM IST
सार
शोधकर्ताओं के मुताबिक यह भविष्य की स्किन थेरेपी का अप्रत्याशित स्रोत बन सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि शरीर खुद ऐसे अणु बनाता है जिनमें प्राकृतिक एंटी-एजिंग क्षमता होती है।
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इंडोल मेटाबोलाइट्स ने त्वचा कोशिकाओं में सूजन को कम किया
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
वैज्ञानिकों ने खून में पाई जाने वाली एक कम-पहचानी बैक्टीरिया प्रजाति से बने नए एंटी-एजिंग यौगिक खोजे हैं। यह खोज भविष्य में नई स्किन-रिजुवनेशन थेरेपी यानी त्वचा को फिर से जवां करने के तरीकों की राह दिखा सकती है। इन यौगिकों को इंडोल मेटाबोलाइट्स कहा जाता है।
इन यौगिकों लैब में तैयार त्वचा कोशिकाओं में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और कोलाजेन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि को कम किया। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह भविष्य की स्किन थेरेपी का अप्रत्याशित स्रोत बन सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि शरीर खुद ऐसे अणु बनाता है जिनमें प्राकृतिक एंटी-एजिंग क्षमता होती है। खून में रहने वाले एक बैक्टीरिया के बनाए गए ये तीन शक्तिशाली अणु मानव त्वचा कोशिकाओं में सूजन और कोशिकाओं के नुकसान को कम करने में सक्षम पाए गए। यह शोध अध्ययन अमेरिकन केमिकल सोसायटी और अमेरिकन सोसायटी ऑफ फार्माकोग्नॉसी के जर्नल ऑफ नेचुरल प्रोडक्ट्स में छपा है।
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खून में रहने वाले बैक्टीरिया खोल सकते हैं सेहत के राज
वैज्ञानिकों को अभी भी यह कम समझ है कि खून में घूमने वाले बैक्टीरिया के उप-उत्पाद (मेटाबोलाइट्स) इंसानी सेहत पर कैसे असर डालते हैं। इनमें से इंडोल यौगिक खास तौर से अहम हैं क्योंकि यह बुढ़ापा रोधी, सूजन रोधी और सूक्ष्मजीव रोधी प्रभाव वाले गुण रखता है। वैज्ञानिकों ने 2015 में ऐसा ही एक खून में रहने वाला बैक्टीरिया खोजा जो ये यौगिक बनाता है और उसका नाम पैराकोकस सैंगुइनिस रखा गया। इस विचार को समझने के लिए टीम ने पैराकोकस सैंगुइनिस को तीन दिन तक बड़ी मात्रा में उगाया और इसमें बने सभी मेटाबोलाइट्स (एक पदार्थ जो चयापचय में बनता है या उसके लिए जरूरी है) को निकाला।
ये भी पढ़ें: अध्ययन: समुद्र में माइक्रोप्लास्टिक बने ‘खतरनाक वाहक’, एंटीबायोटिक-रोधी बैक्टीरिया तेजी से फैला रहे
इनमें से तीन इंडोल, जिनमें दो नए थे, ने तनावग्रस्त कोशिकाओं में प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों को कम किया, जबकि बगैर इलाज वाली कोशिकाओं में यह अधिक था। इन्हीं यौगिकों ने दो सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन और एक कोलाजेन तोड़ने वाले प्रोटीन के स्तर भी कम किए। इन शुरुआती परिणामों के आधार पर, वैज्ञानिकों का कहना है कि ये नए इंडोल मेटाबोलाइट भविष्य में ऐसे इलाज विकसित करने में मदद कर सकते हैं जो त्वचा पर उम्र बढ़ने के प्रभावों को कम करें।
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इन यौगिकों लैब में तैयार त्वचा कोशिकाओं में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और कोलाजेन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि को कम किया। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह भविष्य की स्किन थेरेपी का अप्रत्याशित स्रोत बन सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि शरीर खुद ऐसे अणु बनाता है जिनमें प्राकृतिक एंटी-एजिंग क्षमता होती है। खून में रहने वाले एक बैक्टीरिया के बनाए गए ये तीन शक्तिशाली अणु मानव त्वचा कोशिकाओं में सूजन और कोशिकाओं के नुकसान को कम करने में सक्षम पाए गए। यह शोध अध्ययन अमेरिकन केमिकल सोसायटी और अमेरिकन सोसायटी ऑफ फार्माकोग्नॉसी के जर्नल ऑफ नेचुरल प्रोडक्ट्स में छपा है।
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खून में रहने वाले बैक्टीरिया खोल सकते हैं सेहत के राज
वैज्ञानिकों को अभी भी यह कम समझ है कि खून में घूमने वाले बैक्टीरिया के उप-उत्पाद (मेटाबोलाइट्स) इंसानी सेहत पर कैसे असर डालते हैं। इनमें से इंडोल यौगिक खास तौर से अहम हैं क्योंकि यह बुढ़ापा रोधी, सूजन रोधी और सूक्ष्मजीव रोधी प्रभाव वाले गुण रखता है। वैज्ञानिकों ने 2015 में ऐसा ही एक खून में रहने वाला बैक्टीरिया खोजा जो ये यौगिक बनाता है और उसका नाम पैराकोकस सैंगुइनिस रखा गया। इस विचार को समझने के लिए टीम ने पैराकोकस सैंगुइनिस को तीन दिन तक बड़ी मात्रा में उगाया और इसमें बने सभी मेटाबोलाइट्स (एक पदार्थ जो चयापचय में बनता है या उसके लिए जरूरी है) को निकाला।
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इनमें से तीन इंडोल, जिनमें दो नए थे, ने तनावग्रस्त कोशिकाओं में प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों को कम किया, जबकि बगैर इलाज वाली कोशिकाओं में यह अधिक था। इन्हीं यौगिकों ने दो सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन और एक कोलाजेन तोड़ने वाले प्रोटीन के स्तर भी कम किए। इन शुरुआती परिणामों के आधार पर, वैज्ञानिकों का कहना है कि ये नए इंडोल मेटाबोलाइट भविष्य में ऐसे इलाज विकसित करने में मदद कर सकते हैं जो त्वचा पर उम्र बढ़ने के प्रभावों को कम करें।