सऊदी अरब ने की अमेरिकी सीनेट की निंदा, कहा- प्रिंस पर लगाए गए सभी आरोप झूठे
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सऊदी अरब ने अमेरिकी सीनेट की निंदा की है। जिसमें सीनेटरों ने कहा था कि वह यमन की लड़ाई में सऊदी की भागीदारी के समर्थन में नहीं हैं और न ही वह सऊदी को हथियारों की बिक्री का समर्थन करते हैं। वह ऐसा तब तक करते रहेंगे जब तक सऊदी प्रिंस सत्ता में रहते हैं। इसके अलावा सऊदी ने एक और मुद्दे पर अमेरिकी सीनेट की आलोचना की है, जिसमें सीनेटरों ने कहा था कि जमाल खशोगी हत्या मामले में सीआईए की रिपोर्ट के बाद से अब उन्हें पहले से अधिक यकीन हो गया है कि इस हत्या में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का ही हाथ था।
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सऊदी अरब ने अमेरिकी सीनेट की निंदा की है। जिसमें सीनेटरों ने कहा था कि वह यमन की लड़ाई में सऊदी की भागीदारी के समर्थन में नहीं हैं और न ही वह सऊदी को हथियारों की बिक्री का समर्थन करते हैं। वह ऐसा तब तक करते रहेंगे जब तक सऊदी प्रिंस सत्ता में रहते हैं। इसके अलावा सऊदी ने एक और मुद्दे पर अमेरिकी सीनेट की आलोचना की है, जिसमें सीनेटरों ने कहा था कि जमाल खशोगी हत्या मामले में सीआईए की रिपोर्ट के बाद से अब उन्हें पहले से अधिक यकीन हो गया है कि इस हत्या में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का ही हाथ था।
सऊदी के विदेश मंत्रालय ने सीनेटरों के बयानों को हस्तक्षेप और झूठे आरोप करार दिया है। गुरुवार को भी सीनेटरों ने किसी कानून के बारे में तो कुछ नहीं कहा लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संदेश दिया कि अमेरिकी सांसद सऊदी की योजनाओं के खिलाफ हैं।
बता दें लापता सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी को लेकर वाशिंगटन पोस्ट की खबर में एक नया खुलासा हुआ था कि पत्रकार को निशाना बनाने के लिए सऊदी के प्रिंस ने ऑपरेशन का आदेश दिया था। खशोगी की मंगेतर ने इस मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद की गुहार लगाई थी।
उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट के जरिए अपील की थी कि वह अपने सिद्दांतों के लिए लड़ते थे। खशोगी इसी अखबार के लिए स्तंभ लिखते थे। वह सऊदी अरब के खिलाफ भी बड़े पैमाने पर लिखते थे। जिसमें यमन युद्ध की आलोचना, कनाडा के साथ राजनयिक विवाद शामिल है। इन सभी मुद्दों ने प्रिंस मोहम्मद की छवि को नुकसान पहुंचाया।
क्या कहा सऊदी ने?
क्या है अमेरिकी सीनेट का प्रस्ताव?
गुरुवार को इसपर पहली बार वोट डला गया, जिसमें अमेरिकी कांग्रेस ने यमन की लड़ाई में सऊदी की भागीदारी के लिए लगाई गई अमेरिकी सेना को वापस बुलाने की मांग की। इस सेना को 1973 के वॉर पावर एक्ट के तहत यमन युद्ध में लगाया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि सभी अमेरिकी सैनिकों को जो यमन में तैनात हैं वापस बुलाया जाए। केवल उन्हीं सैनिकों को वहां पर रहने दिया जाए जो इस्लामिक चरमपंथियों का मुकाबला कर रहे हैं। बीते महीने भी अमेरिका ने युद्ध में लगे सऊदी विमानों को इंधन न देने का चुनाव किया था। अगर गुरुवार को आए प्रस्ताव पर कानून बनता है तो अमेरिका युद्ध से अपने हाथ खींच सकता है।
खशोगी अमेरिकी निवासी थे। उन्होंने सऊदी अरब के राजकुमार सलमान के शासन और उनके बेटे मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ भी कई लेख लिखे थे। आखिरी बार वह 2 अक्तूबर को इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास के अंदर जाते हुए देखे गए थे। तुर्की के अधिकारियों के अनुसार उन्हें लगता है कि दूतावास के अंदर खशोगी की हत्या कर दी गई है। अखबार में यह भी कहा गया था कि बीते 7 सालों से अमेरिका में रह रहे खशोगी को लालच देने के लिए सऊदी अधिकारियों ने कई योजनाएं भी बनाई थीं। अखबार में खशोगी के कई दोस्तों द्वारा दिए बयान भी थे।