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S Jaishankar: जयशंकर बोले- शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भारत प्रतिबद्ध, चीन से रिश्ते कठिन दौर में

Thu, 18 Aug 2022 05:02 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बैंकॉक
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बैंकॉक Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 18 Aug 2022 05:02 PM IST
सार

एस जयशंकर भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की नौवीं बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को थाईलैंड पहुंचे थे। यहां एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र, समावेशी और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र की परिकल्पना में भरोसा करता है, जो नियम-आधारित व्यवस्था, टिकाऊ और पारदर्शी बुनियादी ढांचा निवेश पर आधारित हो। 
 

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S Jaishankar says India envisages free open inclusive and peaceful Indo-Pacific built on rules-based order
एस जयशंकर - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों थाईलैंड के दौरे पर हैं। यहां गुरुवार को उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र, समावेशी और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र की परिकल्पना में भरोसा करता है, जो नियम-आधारित व्यवस्था, टिकाऊ और पारदर्शी बुनियादी ढांचा निवेश पर आधारित है। उनका यह टिप्पणी चीनी जासूसी पोत के श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर पहुंचने और ताइवान और चीन के विवाद के बाद आया है।

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उन्होंने चीन मसले पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चीन ने सीमा पर जो रवैया अपनाया है, उसकी वजह से दोनों देशों के रिश्ते बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। दोनों देशों की एकजुटता के बगैर एशियाई शताब्दी का सपना साकार नहीं होगा।
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'हिंद-प्रशांत पर भारत के दृष्टिकोण' विषय पर बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर
भारतीय विदेश मंत्री ने बैंकॉक के चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय में 'हिंद-प्रशांत पर भारत के दृष्टिकोण' विषय पर व्याख्यान देते हुए ये बातें कही। यहां उन्होंने यह भी कहा कि क्वाड, सबसे प्रमुख बहुपक्षीय मंच है जो इंडो-पैसिफिक में समकालीन चुनौतियों और अवसरों पर नजर बनाए हुए है और इस क्षेत्र को लेकर सबसे मुखर है। गौरतलब है कि क्वाड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। 
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यहां बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की परिकल्पना करते हैं जो एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, टिकाऊ और पारदर्शी बुनियादी ढांचे के निवेश, नेविगेशन की स्वतंत्रता और ओवर-फ्लाइट, अबाधित वैध वाणिज्य, संप्रभुता के लिए पारस्परिक सम्मान के साथ ही विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, साथ ही सभी राष्ट्रों की समानता,पर आधारित है। जयशंकर ने आगे कहा कि भारत, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) को भारत-प्रशांत के केंद्र में रखता है। 

अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2017 में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्यवहार का मुकाबला करने के लिए क्वाड स्थापित किया था। सभा को संबोधित करते हुए, जयशंकर ने कहा कि क्वाड सबसे प्रमुख बहुपक्षीय मंच है जो हिंद-प्रशांत में समकालीन चुनौतियों और अवसरों का समाधान करता है। उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि संपूर्ण इंडो-पैसिफिक क्षेत्र इसकी गतिविधियों से लाभान्वित होगा।उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था की संभावनाएं सत्ता और संसाधनों के अधिक न्यायसंगत और लोकतांत्रिक वितरण पर निर्भर करती हैं।

मंदिर में की थी पूजा-अर्चना
इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को यहां स्थित एक हिंदू मंदिर में पूजा अर्चना की। जयशंकर भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की नौवीं बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को थाईलैंड पहुंचे थे।


विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘बैंकॉक के देवस्थान में आज प्रार्थना की। फ्रा महाराजागुरु विधि का आशीर्वाद लिया। यह हमारी साझी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को रेखांकित करता है।’ देवस्थान या ‘थाई रॉयल कोर्ट’ का ‘रॉयल ब्राह्मण ऑफिस’ बैंकॉक के फ्रा नाखोन जिले में वाट सुथत के पास स्थित है। यह मंदिर थाईलैंड में हिंदू धर्म का आधिकारिक केंद्र है। महाराजागुरु विधि थाई ब्राह्मण समुदाय के प्रमुख हैं।

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