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नेपाल पहुंचे जयशंकर ने की विदेश मंत्री के साथ बैठक, जयनगर से जनकपुर रेल परियोजना पर संतोष
Fri, 23 Aug 2019 04:08 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडू
अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडू
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 23 Aug 2019 04:08 AM IST
सार
- इसका मकसद 20 लाख पर्यटकों को यहां आने के लिए आकर्षित करना है
- संयुक्त आयोग ने बाढ़ की समस्या को हल करने की आवश्यकता पर बल दिया
- दोनों मंत्रियों ने पर्यटन, विशेषकर विजिट नेपाल ईयर 2020 के संदर्भ में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया
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- फोटो : s jaishankar
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विस्तार
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके नेपाली समकक्ष प्रदीप ग्यावली ने आपसी संपर्क और आर्थिक सहभागिता पर जोर देते हुए द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा की है। इसमें दोनों पक्षों ने जयनगर-जनकपुर और जोगबनी-बिराटनगर खंड पर सीमापार वाली रेलवे परियोजना और बिराटनगर में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट की प्रगति पर भी संतोष जताया।
भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की इस पांचवीं बैठक में संपर्क व आर्थिक सहभागिता, व्यापार-पारगनम, बिजली-जल संसाधन और शिक्षा पर विशेष ध्यान के साथ द्विपक्षीय रिश्तों पर वार्ता की। दोनों मंत्रियों ने पर्यटन, विशेषकर विजिट नेपाल ईयर 2020 के संदर्भ में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसका मकसद 20 लाख पर्यटकों को यहां आने के लिए आकर्षित करना है।
नेपाल-भारत संयुक्त आयोग की स्थापना 1987 में हुई थी और इसका आयोजन भारत और नेपाल में क्रमिक ढंग से होता है। संयुक्त आयोग ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन, हुलाकी सड़क पर सही ढंग से काम चल रहा है और नुवाकोट एवं गोरखा जिलों में भूकंप के बाद निजी आवासों के निर्माण के पूरा हो गया है। आयोग ने रक्सौल-काठमांडू इलेक्टिृफाइड रेल लाइन की प्रगति पर भी संतोष जताया।
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बाढ़ की समस्या हल करना जरूरी
दोनों पक्षों ने व्यापार, ट्रांजिट और रेल सेवा समझौतों की समीक्षा के शीघ्रता से निपटारे पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों के यह भी संज्ञान लिया कि सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों को बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। संयुक्त आयोग ने बाढ़ की समस्या को हल करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में पाया गया कि इलाके में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह दिक्कत बनी हुई है।
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भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की इस पांचवीं बैठक में संपर्क व आर्थिक सहभागिता, व्यापार-पारगनम, बिजली-जल संसाधन और शिक्षा पर विशेष ध्यान के साथ द्विपक्षीय रिश्तों पर वार्ता की। दोनों मंत्रियों ने पर्यटन, विशेषकर विजिट नेपाल ईयर 2020 के संदर्भ में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसका मकसद 20 लाख पर्यटकों को यहां आने के लिए आकर्षित करना है।
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नेपाल-भारत संयुक्त आयोग की स्थापना 1987 में हुई थी और इसका आयोजन भारत और नेपाल में क्रमिक ढंग से होता है। संयुक्त आयोग ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन, हुलाकी सड़क पर सही ढंग से काम चल रहा है और नुवाकोट एवं गोरखा जिलों में भूकंप के बाद निजी आवासों के निर्माण के पूरा हो गया है। आयोग ने रक्सौल-काठमांडू इलेक्टिृफाइड रेल लाइन की प्रगति पर भी संतोष जताया।
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बाढ़ की समस्या हल करना जरूरी
दोनों पक्षों ने व्यापार, ट्रांजिट और रेल सेवा समझौतों की समीक्षा के शीघ्रता से निपटारे पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों के यह भी संज्ञान लिया कि सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों को बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। संयुक्त आयोग ने बाढ़ की समस्या को हल करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में पाया गया कि इलाके में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह दिक्कत बनी हुई है।