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पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा होगी बहुत ही यादगार : जयशंकर

Fri, 05 Mar 2021 12:29 AM IST
संजीव कुमार झा एजेंसी, ढाका
एजेंसी, ढाका Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 05 Mar 2021 12:29 AM IST
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S Jaishankar arrives in Bangladesh to prepare ground for PM Narendra Modi visit
एस जयशंकर बांग्लादेश पहुंचे - फोटो : Twitter@s jaishankar

विदेशमंत्री एस जयशंकर ने ने बृहस्पतिवार को कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महीने के अंत में होने वाली बांग्लादेश की यात्रा बहुत ही यादगार होगी। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को सही मायने में ‘360 डिग्री पार्टनरशिप’ करार दिया। जयशंकर पीएम मोदी की यात्रा की तैयारियों को लेकर बृहस्पतिवार सुबह ढाका पहुंचे। पीएम बांग्लादेश की आजादी की 50वीं सालगिरह और दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने के समारोह में हिस्सा लेंगे।

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उन्होंने बांग्लादेश के विदेशमंत्री एके अब्दुल मोमिन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने के तरीकों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के केंद्र में है और देश की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के लिए लगातार प्रासंगिक बना हुआ है। बातचीत के बाद मोमिन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हम पीएम मोदी की यात्रा की तैयारी को लेकर काम कर रहे हैं। हम उम्मीद है कि यह बहुत ही यादगार होगी। कोरोना महामारी के बाद पीएम मोदी की पहली विदेश यात्रा होगी। हम सभी को उनका पिछला दौरा याद है जोकि हमारे संबंधों में बहुत ही परिवर्तनकारी साबित हुआ। 
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पीएम मोदी 26 मार्च को दो दिवसीय दौरे पर ढाका पहुंचेंगे और कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। विदेशमंत्री ने कहा कि यह बांग्लादेश के लोगों के लिए बहुत ही खास वर्ष है। इस साल बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे हो रहे हैं तो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के भी 50 साल हो रहे हैं। आप सभी के सभी सपने पूरे हों और वह आश्वासन दे सकते हैं कि भारत हमेशा उनके साथ एक विश्वसनीय दोस्त के रूप में खड़ा रहेगा। हमारे रिश्ते बहुत ही व्यापक है और इसमें आपसी सहजता का स्तर बहुत ही उच्च है। यह सही मायनों में 360 डिग्री पार्टनरशिप है। 
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उन्होंने कहा कि भारत अपने यहां तैयार कोरोना वैक्सीन को दुनियाभर के कई देशों को दे रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा वैक्सीन बांग्लादेश को दी गई है। इस पड़ोसी मुल्क को 90 लाख वैक्सीन दी गई है। सीमा पर हत्याओं पर उन्होंने कहा कि जिसे आप बार्डर किलिंग्स कह रहे हैं, वह भारत की सीमा के बहुत अंदर की बात है। इसके पीछे सीमा पर होने वाले अपराध वजह हैं। दोनों देश अपराधमुक्त सीमा चाहते हैं। तीस्ता जल समझौते पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हो रही बातचीत में लगातार प्रगति हो रही है। विदेशमंत्री ने कहा कि मोमिन के साथ हमने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर व्यापक चर्चा की। हम सुरक्षा, कारोबार, परिवहन व कनेक्टिविटी, संस्कृति, लोगों से लोगों के संपर्क समेत साझा हितों वाले सभी मुद्दों पर काम कर रहे हैं। 

जयशंकर ने आईएनएसटीसी गलियारे के मार्ग को चाबहार तक बढ़ाने पर सहमति की उम्मीद जताई

भारत ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) समन्वय परिषद की बैठक में सदस्य देश गलियारे के मार्ग का विस्तार कर इसमें चाबहार बंदरगाह को शामिल करने पर सहमत होंगे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नौवहन भारत शिखर सम्मेलन से इतर आयोजित ‘चाबहार दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) एक महत्वपूर्ण व्यापार गलियारा परियोजना है जिसमें भारत के साथ 12 देश लोगों के फायदे के लिये आर्थिक गलियारा स्थापित करने के उद्देश्य से सहयोग कर रहे है।

उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा समन्वय परिषद की बैठक में सदस्य देश गलियारे के मार्ग का विस्तार कर इसमें चाबहार बंदरगाह को शामिल करने पर सहमत हो जाएंगे।

जयशंकर ने यह भी उम्मीद जतायी कि बैठक में इस परियोजना की सदस्यता के विस्तार पर भी सहमति बनेगी। उन्होंने कहा कि वे इस बहुस्तरीय गलियारा परियोजना में शामिल होने के लिये उज्बेकिस्तान और अफगानिस्तान द्वारा रूचि दिखाए जाने का भी स्वागत करते हैं ।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत सरकार क्षेत्रीय सम्पर्क के महत्व को समझती है और इसी के मद्देनजर चाबहार में बंदरगाह के विकास के लिये निवेश का महत्वपूर्ण निर्णय किया गया ।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर पिछले काफी समय से चर्चा चल रही थी लेकिन साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय परिवहन एवं पारगमन गलियारा स्थापित करने के लिये भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ।

जयशंकर ने कहा कि परिवहन एवं पारगमन गलियारे का मकसद पूरे क्षेत्र में वाणिज्य का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करना और शुरूआत में अफगानिस्तान और बाद में मध्य एशिया के साथ सुरक्षित एवं भरोसेमंद कारोबार का मार्ग स्थापित करना है ।

विदेश मंत्री ने कहा कि आज भारत हमारे क्षेत्र में सम्पर्क को बेहतर बनाने के लिए सभी क्षेत्रीय पक्षकारों के साथ मिलकर काम करने की मजबूत प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता है, साथ ही जमीन से घिरे मध्य एशिया के देशों को चाबहार के जरिये समुद्र तक निर्बाध पहुंच उपलब्ध करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि चाबहार बंदरगाह न केवल वाणिज्यिक पारगमन के केंद्र के रूप में उभरा है बल्कि मानवीय सहायता प्रदान करने में सहायक रहा है, खास तौर पर कोविड-19 महामारी के समय में ।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह बंदरगाह अफगानिस्तान के लोगों की समृद्धि, शांत एवं स्थिरता की हमारी साझी प्रतिबद्धता का हिस्सा है । भारत ने सितंबर 2020 में अफगानिस्तान को मानवीय खाद्य सहाता के तौर पर 75 हजार मीट्रिक टन गेहूं चाबहार बंदरगाह के जरिये पहुंचाया था। उन्होंने बताया कि इसके अलावा भारत ने जून 2020 में ईरान को टिड्डियों से मुकाबला करने के लिये 25 मीट्रिक टन कीटनाशक मालाथियान पहुंचाया था।

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